नयी दिल्ली, 13 मार्च (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नेता कौस्तव बागची के खिलाफ मानहानि मामले में यथास्थिति बनाये रखने का शुक्रवार को आदेश दिया।
बागची पर आरोप है कि उन्होंने एक पुस्तक के अंश सोशल मीडिया पर साझा किए, जिसमें पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के कथित निजी जीवन के बारे में आरोप लगाए गए हैं।
न्यायमूर्ति बी. वी. नागरत्ना और न्यायमूर्ति उज्जल भुइयां की पीठ ने बागची द्वारा कलकत्ता उच्च न्यायालय के एक आदेश के खिलाफ दायर याचिका पर पश्चिम बंगाल सरकार को नोटिस जारी किया।
उच्च न्यायालय ने उनकी याचिका खारिज कर दी थी, जिसमें बागची ने मानहानि मामले में उन्हें समन जारी करने वाले निचली अदालत के आदेश को चुनौती दी थी।
यह विवाद उस पुस्तक को लेकर उत्पन्न हुआ, जो पहली बार 2015 में प्रकाशित हुई थी और जिसमें कहा गया था कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ने गुप्त रूप से किसी से विवाह किया। इस पुस्तक में उनके मुख्यमंत्री पद ग्रहण करने से पहले उनके निजी जीवन के कुछ अन्य कथित विवरण भी प्रकाशित किए गए थे।
पेशे से वकील बागची ने उक्त पुस्तक के कुछ पृष्ठ सोशल मीडिया मंचों पर अपलोड किए और मुख्यमंत्री के निजी जीवन के बारे में कई टेलीविजन नेटवर्क पर कथित तौर पर टिप्पणियां भी कीं।
इसके बाद, लोक अभियोजक ने वैधानिक मंजूरी लेकर शहर की सत्र अदालत में बीएनएसएस-2023 की धारा 222(2) (मानहानि के लिए अभियोजन) का हवाला देते हुए शिकायत दर्ज की, जिसमें यह आरोप लगाया गया कि बागची ने बीएनएस की धारा 356(2) (भगोड़े अपराधी की अनुपस्थिति में जांच, सुनवाई या निर्णय) के तहत दंडनीय अपराध किया।
सत्र अदालत ने आवेदक को बीएनएस-2023 की धारा 223 (आरोपी को सुनवाई का अवसर प्रदान करने) के तहत सुनवाई का अवसर दिया, मामले का संज्ञान लिया और समन जारी किया।
भाषा
सुरेश अविनाश
अविनाश
यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.
