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Tuesday, 31 March, 2026
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कानपुर देहात आत्मदाह मामले को लेकर कांग्रेस का प्रदर्शन : पुलिस से हुई झड़प

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लखनऊ (उप्र), 15 फरवरी (भाषा) उत्तर प्रदेश के कानपुर देहात जिले में हाल ही में अतिक्रमण हटाने की कार्यवाही के दौरान झोपड़ी में एक महिला और उसकी बेटी की जलकर हुई मौत के मामले को लेकर बुधवार को राज्यपाल से मुलाकात करने गये कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं की पुलिसकर्मियों के साथ तीखी झड़प हुई।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बृजलाल खाबरी ने यहां संवाददाताओं को बताया कि कानपुर देहात में हुई वारदात के मामले को लेकर उनकी अगुवाई में पार्टी का एक प्रतिनिधिमण्डल राज्यपाल आनंदीबेन पटेल से मुलाकात करने गया था, मगर उन्हें समय नहीं दिया गया। इसके विरोध में प्रतिनिधिमण्डल तथा अन्य पार्टी कार्यकर्ताओं ने धरना-प्रदर्शन किया।

उन्होंने बताया कि पुलिस ने पार्टी कार्यकर्ताओं को जबरन रोकने की कोशिश की जिसका विरोध किया गया और इस दौरान पार्टी नेता बैरीकेड पर चढ़ गये और पुलिस से उनकी तीखी नोकझोंक हुई।

खाबरी ने आरोप लगाया कि कानपुर में मां और बेटी की जलकर हुई मृत्यु की जघन्य घटना मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की बुलडोजर नीति का परिणाम है। सरकार प्रदेश भर में अन्यायपूर्ण बुलडोजर नीति अपनाकर जहां लगातार अपनी पीठ थपथपा रही है, वहीं जनमानस में भारतीय संविधान और कानून पर से विश्वास उठ रहा है।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने मामले की न्यायिक जांच कराने और पीड़ित परिवार को समुचित आर्थिक सहायता देने की मांग की है।

गौरतलब है कि पिछले सोमवार की शाम कानपुर देहात जिले के रूरा थाना इलाके के मडौली गांव में अतिक्रमण विरोधी अभियान के दौरान प्रमिला दीक्षित (45) और उनकी बेटी नेहा दीक्षित (20) ने कथित तौर पर अपनी झोपड़ी में खुद को आग लगा ली जिससे दोनों की मौत हो गयी थी। उनकी झोपड़ी कथित रूप से ग्राम समाज की जमीन पर बनी थी।

कांग्रेस के प्रान्तीय अध्यक्ष एवं पूर्व मंत्री नकुल दुबे ने कहा कि योगी आदित्यनाथ के दूसरे कार्यकाल में भी ब्राह्मणों की हत्या का सिलसिला रुक नहीं रहा है। लगातार धर्म-जाति के विघटन के नाम पर ब्राह्मणों का वोट हासिल करने वाली भाजपा की सरकार में ब्राह्मण, दलित और अतिपिछड़े सबसे ज्यादा त्रस्त हैं।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व मंत्री नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने इस घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि जिस तरीके से अतिक्रमण के नाम पर बर्बरता की गई है वह घोर प्रशासनिक लापरवाही और पुलिस की मनमानी का जीता जागता उदाहरण है। ऐसा पुलिसिया बर्ताव खुलेआम लोकतंत्र की हत्या के समान है।

उन्होंने कहा कि बुलडोजर नीति पर अपनी पीठ थपथपा रही सरकार के शासन में संविधान की ताकत को लगातार कमजोर करने का षड्यंत्र चल रहा है।

भाषा सलीम रंजन

रंजन

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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