Thursday, 7 July, 2022
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पाप स्वीकारना और 5 रुपए की किताब: आंध्र में अपने फॉलोअर्स के रेप के आरोपी ‘पादरी’ की गंदी दुनिया

प्रेमा स्वरूपी मिनिस्ट्रीज़ के अनिल कुमार उर्फ प्रेम दास पर कथित यौन हमले का मुक़दमा दर्ज करके उसे गिरफ्तार कर लिया गया है. उसका कथित अपराध तब सामने आया, जब एक 28 वर्षीय महिला पुलिस के पास पहुंच गई.

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पायकराओपेटा: आंध्र प्रदेश में एक 28 वर्षीय महिला की ओर से पुलिस में दर्ज एक शिकायत ने कथित यौन उत्पीड़न और जबरन वसूली के ऐसे रैकेट का पर्दाफाश किया है, जिसे एक 42 वर्षीय ‘स्वयंभू पादरी’, धर्म की आड़ में चला रहा था.

शिकायतकर्त्ता के अनुसार, ये सब एक 5 रुपए की पुस्तक के साथ शुरू हुआ- जिसे कथित रूप से अभियुक्त ने लिखा था- जो उसने 2018 में हैदराबाद के एक चर्च से ली थी. उसका कहना है कि इसके नतीजे में उसका अभियुक्त से परिचय हुआ और वो अभियुक्त द्वारा चलाए जा रहे एक धार्मिक केंद्र में आ गई, जहां उसपर कथित तौर से यौन हमला हुआ.

ये शिकायत कथित यौन हमले के डेढ़ साल बाद और उसके महीनों बाद आई, जब शिकायतकर्त्ता केंद्र से भाग जाने का दावा करती है.

फरवरी में, राज्य की पायकराओपेटा पुलिस (विशाखापटनम ग्रामीण के अंतर्गत) ने अनिल कुमार उर्फ प्रेम दास को, पायकराओपेटा मंडल के एक गांव में स्थित अपने धार्मिक केंद्र में, महिलाओं पर कथित यौन हमलों का आरोप लगाकर उसे गिरफ्तार कर लिया.

दो अन्य पादरियों को भी, जो कुमार के साथ सेंटर चलाते थे, मुक़दमा दर्ज करके हिरासत में ले लिया गया है. पुलिस का कहना है कि लिली नाम की एक 45 वर्षीय महिला, जो कथित रूप से केंद्र को चला रही टीम का हिस्सा थी, फरार चल रही है.

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कुमार पर भारतीय दंड संहिता की धारा 376 (बलात्कार), 354-ए (यौन उत्पीड़न), 493 (विधिवत शादी करने का झांसा देकर किसी महिला के साथ सहवास करना), 374 (विधिविरुद्ध श्रम के लिए विवश करना), और कुछ अन्य धाराओं के तहत मुक़दमा दर्ज किया गया है.

पुलिस ने ये भी कहा कि कुमार के खिलाफ वित्तीय धोखाधड़ी के भी आरोप थे, जो मुख्य शिकायतकर्त्ता महिला के साथ आईं, दो अन्य महिलाओं ने लगाए थे.

नरसीपटनम के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक डी मणिकांत (पायकराओपेटा पुलिस थाना उन्हीं के कार्यक्षेत्र में आता है) के अनुसार, मुख्य अभियुक्त कुमार ने, जो विजयवाड़ा का रहने वाला है, 2018 में किसी समय प्रेमा स्वरूपी मिनिस्ट्रीज़ नाम से एक धार्मिक संस्था स्थापित की थी. एक गांव में स्थित वो संस्था दान के पैसों से चलती थी.

पुलिस कहना है कि कुमार 2017 तक भारतीय रेलवे का एक कर्मचारी हुआ करता था.

मणिकांत ने दिप्रिंट को बताया कि वो ये देखकर आकर्षित हुआ कि दूसरे पादरियों को किस तरह सम्मान मिलता था, और वो भी इसी तरह का सम्मान और तवज्जो चाहता था, इसलिए वो एक पादरी बन गया.’

हालांकि, पुलिस का कहना था कि वो ख़ुद को एक पादरी बताता था और पुलिस को दी गई शिकायत में भी उसे यही बताया गया है, लेकिन ये स्पष्ट नहीं है कि वो कब और कहां विधिवत पादरी बना और बना भी कि नहीं, और क्या वो किसी औपचारिक चर्च से जुड़ा है.

इस बीच, प्रेमा स्वरूपी मिनिस्ट्रीज़ की वेबसाइट पर दावा किया गया है कि ये संस्था 2015 में स्थापित की गई थी और इसका मिशन पश्चाताप, मुक्ति, और माफी के ईसा चरित का उपदेश दुनिया भर में फैलाना है’. ये संस्था एक यूट्यूब चैनल भी चलाती है, जिसमें अभियुक्त के ‘प्रवचन’ होते हैं.

पुलिस का कहना है कि 9 फरवरी को जब उन्होंने सेंटर पर छापा मारा, तो वहां उन्हें कुछ महिलाएं (20 से 45 वर्ष के बीच की), कुछ पुरुष, और आठ साल तक की आयु के कुछ लड़के मिले, जो परिसर में ही रह रहे थे. शिकायतकर्त्ता का आरोप था कि सेंटर को चला रहे लोग, लड़कों से ‘ग़ुलामों’ की तरह का बर्ताव करते थे.

आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए जाने-माने ईसाई मत प्रचारक, केए पॉल ने दिप्रिंट से कहा, कि इस घटना की बिना किसी पक्षपात या एजेंडा के, गहराई से जांच की जानी चाहिए.

पॉल ने कहा, ‘मैंने इस विषय पर ख़ासतौर से किसी धार्मिक लीडर से बात नहीं की है, लेकिन मुझे घटना की जानकारी है. सच कहूं, तो कोई चर्च किसी को भी पादरी बना सकता है. कुछ पादरी ऐसे होते हैं जो संस्थाओं द्वारा प्रशिक्षित किए जाते हैं, और संदेश फैलाने के लिए उन्हें सार्वजनिक स्थलों पर भेजा जाता है, और फिर कुछ स्वयंभू पादरी होते हैं, जो बिना किसी जवाबदेही के दावे करते हैं, और वो ख़तरनाक होते हैं’.

दिप्रिंट ने दो बार वेबसाइट के ज़रिए प्रेमा स्वरूपी मिनिस्ट्रीज़ से संपर्क करके, आरोपों पर उनकी प्रतिक्रिया लेने की कोशिश की, लेकिन इस ख़बर के प्रकाशित होने तक उनका कोई जवाब नहीं मिला था.

पीड़िता ने पुस्तक ख़रीदी और पादरी की शिक्षा की ओर ‘खिंची’

28 वर्षीय की शिकायत के अनुसार- जिसे दिप्रिंट ने देखा है- वो तेलंगाना के सूर्यापेट ज़िले की रहने वाली है और हैदराबाद की एक सॉफ्टवेयर कंपनी में काम किया करती थी.

उसका कहना है कि 2018 में एक बार चर्च के दौरे पर, उसे धार्मिक शिक्षा की एक छोटी सी किताब नज़र आई जो उसने ले ली. उसने बताया कि 5 रुपए मूल्य की वो किताब, प्रेमा स्वरूपी मिनिस्ट्रीज़ का प्रकाशन थी.

शिकायतकर्त्ता का कहना है कि पुस्तक की विषय सामग्री से प्रेरित होकर, उसने किताब पर दिए गए एक नंबर के ज़रिए संस्था से संपर्क किया. शिकायत के अनुसार वो नंबर कुमार का था.

केंद्र के बाहर प्रेमा स्वरूपी मंत्रालयों का बैनर | फोटो: ऋषिका सदम/ दिप्रिंट

शिकायतकर्त्ता का दावा था कि वो किताब को हैदराबाद में बांटना चाहती थी और कुमार ने उसे ‘सैकड़ों’ प्रतियां भेज दीं, जिसके लिए महिला ने ‘उसे 10,000 रुपए अदा किए’. प्रेमा स्वरूपी वेबसाइट का दावा है कि इस किताब की लाखों प्रतियां बिकती हैं.

आख़िर में, कुमार ने कथित रूप से शिकायतकर्त्ता को अपनी नौकरी छोड़कर, उसके केंद्र में आने पर राज़ी कर लिया और दावा किया कि ‘ईश्वर का आदेश है कि वो अपना जीवन उसकी सेवा में समर्पित कर दे.’

शिकायत के अनुसार, कुमार ने 28 वर्षीय महिला के लिए हैदराबाद से केंद्र तक आने के लिए बस टिकट बुक किए, और 2019 के शुरू में वो अपनी नौकरी छोड़कर ट्रस्ट में शामिल हो गई.

शिकायत में कहा गया है कि उसने वहां क़रीब 30 लोगों को पहले से रहते हुए पाया, जिनमें से अधिकतर महिलाएं थीं. उसका कहना है कि उन सभी का एक ही उद्देश्य था- ‘ईश्वर की सेवा करना और अपने पापों को धोना.’


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‘महिलाओं को पाप स्वीकारने के लिए बुलाया और उनका यौन शोषण किया’

लेकिन, शिकायत में कहा गया कि धार्मिक लीडर ने जल्द ही उस पर यौन हमला कर दिया.

उसने बताया कि जैसे ही कोई संगठन में शामिल होता था, प्रबंधन उनके मोबाइल फोन ले लेता था, और (माता-पिता के अलावा) उनमें स्टोर किए सभी लोगों के नंबर डिलीट कर दिए जाते थे, कथित रूप से इसलिए कि ‘ईसाई धर्म लोगों को फोन इस्तेमाल करने की इजाज़त नहीं देता.’

उसने बताया कि अभियुक्त हर दिन, केंद्र में रह रही महिलाओं में से एक को, ‘पाप स्वीकारने’ के लिए एक कमरे में बुलाता था, एक धार्मिक प्रथा जिसमें अनुयायी धर्म प्रमुख के सामने अपनी किसी ग़लती या ‘पाप’ को स्वीकार करते हैं.

शिकायतकर्त्ता ने बताया कि जब उसकी बारी आई, तो कुछ ‘स्पष्ट’ वीडियो ऑन लाइन दिखाई गईं, उससे कहा गया कि वो कल्पना करे, कि वीडियो की एक किरदार वो है, और दूसरा किरदार अभियुक्त है. फिर उसने कथित रूप से उसपर यौन हमला किया. जब उसने आपत्ति जताई तो उसे कथित रूप से बताया गया कि अगर उसने अभियुक्त का कहा नहीं माना, तो उस पर ‘ईश्वर का श्राप’ लगेगा. शिकायतकर्त्ता के अनुसार कुमार ‘ईश्वर का दूत’ होने का दावा करता था.

लेकिन, कथित रूप से वो उसके कटु अनुभवों का अंत नहीं था. 28 वर्षीय ने अपनी शिकायत में दावा किया है, कि संस्था के एक मैनेजर के भाई के साथ उसकी ‘ज़बर्दस्ती शादी’ कर दी गई और अप्रैल 2021 में जब वो गर्भवती हुई, तो उसे गर्भपात कराने के लिए मजबूर किया गया.

शिकायतकर्त्ता ने आरोप लगाया है कि शादी के बाद, उसके 30 वर्षीय पति वीरा सत्या ने उसे शारीरिक यातनाएं दीं और उसका यौन शोषण किया. सत्या फिलहाल पुलिस हिरासत में है.

28 वर्षीय महिला ने दावा किया कि उसे धमकी दी गई कि अगर उसने यौन हमलों के बारे में किसी को बताया, तो बुरा अंजाम भुगतना होगा. उसे कहा गया कि उसके माता-पिता जो तेलंगाना में कृषि मज़दूर थे, शापित हो जाएंगे, और उनकी मौत हो जाएगी.

शिकायतकर्त्ता के अनुसार, उसने कई बार सेंटर को छेड़ने की कोशिश की, लेकिन उसे कथित रूप से एक कमरे में बंद करके रखा गया.

उसने बताया कि आख़िरकार पिछले साल अगस्त में, अपने बीमार पेरेंट्स को देखने जाने के बहाने, वो बच निकलने में कामयाब हो गई.

अपनी शिकायत में उसने कहा, ‘मेरे माता-पिता को अभी भी पता नहीं है, कि मेरे साथ क्या हुआ. उन्हें मालूम नहीं था कि मैं ट्रस्ट में शामिल हो गई थी, मैंने उन्हें बहुत बाद में बताया, और वो बहुत ग़ुस्सा हुए थे’.

टिप्पणी के लिए संपर्क किए जाने पर उसने दिप्रिंट से कहा, ‘मैंने शिकायत में जो कुछ कहा है, वो सब मेरे साथ हुआ है.’

एएसपी मणिकांत ने कहा कि शिकायतकर्त्ता को मेडिकल जांच के लिए भेजा गया था. ‘स्पष्ट सबूत हैं कि उसका ज़रूर गर्भपात हुआ होगा, उसके पेट पर टांकों के निशान थे’.

पुलिस ने दिप्रिंट को ये भी बताया, कि उन्हें कुमार के फोन में उसके तथा कुछ महिलाओं को कुछ स्पष्ट/नग्न फोटो मिले हैं. उनमें से कुछ फोटो शिकायतकर्त्ता के भी थे, जिसने दावा किया है कि सेंटर में रहने के दौरान, उसे अभियुक्त को तस्वीरें भेजने के लिए मजबूर किया जाता था.

‘महिलाएं बेहोशी की हालत में दिखती थीं, केंद्र छोड़ने से किया इनकार’

पुलिस ने बताया कि 28 वर्षीय महिला के अलावा, उन्हें पांच अन्य से भी कुमार के खिलाफ शिकायतें मिली हैं. इनमें से दो शिकायतें मुख्य शिकायतकर्त्ता के साथ ही मिलीं थीं, जबकि अन्य भी उसी सप्ताह मिली थीं.

उनमें से एक शिकायतकर्त्ता महिला है जिसका दावा है कि उसने ट्रस्ट को दान दिया और कुछ दिन के लिए केंद्र में ठहरी. उसकी शिकायत के अनुसार, जिसे दिप्रिंट ने देखा है, उसका पूरा परिवार कुमार के प्रवचन सुना करता था. इस शिकायतकर्त्ता ने आरोप लगाया है, कि संस्था के एक और पादरी संतोष प्रकाश राज उर्फ प्रशांत कुमार ने, उसकी बहुन की नाबालिग़ बेटी को एक ‘वीडियो कॉल’ की, और उसे अपनी कुछ स्पष्ट तस्वीरें फोन पर भेजने के लिए मजबूर किया.

दूसरे शिकायतकर्त्ता उन महिलाओं के परिवार के सदस्य हैं, जो केंद्र में रह रही हैं. पुलिस ने कहा कि इन शिकायतकर्त्ताओं के अनुसार, कुमार उन महिलाओं का यौन शोषण कर रहा था, लेकिन परिवार के समझाने-बुझाने के बाद भी वो सेंटर छोड़ने को तैयार नहीं हुईं. इनमें से कुछ शिकायतकर्त्ताओं ने कुमार पर वित्तीय धोखाधड़ी का भी आरोप लगाया है.

पुलिस सूत्रों ने दिप्रिंट को ये भी बताया कि 9 फरवरी को जब एकीकृत बाल विकास सेवा विभाग के अधिकारी पुलिस रेड के दौरान केंद्र पहुंचे, तो कोई भी महिला उस जगह को छोड़ने को तैयार नहीं थी.

पुलिस के अनुसार, वहां केंद्र में क़रीब 27 लोग (आंध्र तथा तेलंगाना दोनों से) रह रहे थे, जो अलग-अलग आयु वर्ग और दोनों जेंडर के थे, लेकिन उनमें महिलाओं की संख्या अधिक थी, जो बीस से अधिक उम्र की थीं.

पुलिस सूत्रों ने कहा कि बहुत सी महिलाएं ख़ामोश रहीं, जब उनसे पूछा गया कि क्या कुमार ने उनका यौन शोषण किया था.

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने नाम छिपाने की शर्त पर बताया, ‘उनमें से कुछ ने इससे इनकार किया, कुछ ग़ुस्सा हो गईं और उन्होंने कहा कि हम उनकी ईश्वर की सेवा पर सवाल खड़े कर रहे हैं. कुछ महिलाओं ने इस तरह की बातें भी कहीं, कि ‘ये शरीर ईश्वर का ही है, अगर इसे छू लिया गया तो क्या ग़लत हो गया?’ पादरी ईश्वर के एक दूत हैं.’

अधिकारी ने आगे कहा, ‘हम सब हैरान रह गए. ऐसा लगता था कि धर्म के नाम पर महिलाओं का ब्रेनवॉश किया गया था, और उनसे कहा गया था कि अगर वो पादरी को प्रभावित कर लेती हैं, तो वो स्वर्ग में जाएंगी और वो उनकी सहायता करेंगे’.


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सभी वयस्क हैं, ‘उन्हें कुछ करने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता’

पुलिस ने कहा कि रेड के बाद केंद्र के ज़्यादातर निवासी, बाहर निकलने के इच्छुक नहीं थे. पुलिस ने वहां पर मौजूद 12 महिलाओं और चार बच्चों (7 से 12 साल की उम्र के) को सखी सेंटर भेज दिया, जो वाइज़ाग शहर में हिंसा पीड़ितों के लिए एक आश्रय है.

पुलिस ने कहा कि अन्य में से कुछ को सलाह दी गई और वो तुरंत निकल गईं, जबकि कुछ अगली सुबह वहां से चले गईं.

ज़िला बाल संरक्षण अधिकारी सत्यनारायण ने बताया, कि क़रीब 12 महिलाएं जो 20 वर्ष से अधिक उम्र की थीं, और कम से कम ग्रेजुएट थीं, अपने परिवारों को बताए बिना ट्रस्ट आईं थीं.

सत्यनारायण ने बताया, ‘वो केंद्र को छोड़ने को तैयार नहीं थीं, और कह रहीं थीं कि पादरी कभी भी ऐसा काम नहीं करेंगे, और वो सब ईश्वर की सेवा में लगीं थीं. जब पुलिस ने उन्हें पादरी के फोन की स्पष्ट तस्वीरें दिखाईं, तो उन्होंने पलट कर आरोप लगाया कि पुलिस ने उनमें बदलाव किया है. हमें पूरी रात उन्हें लगातार समझाना पड़ा, ताकि वो हमारे महिला संरक्षण केंद्रों पर आ जाएं’.

उन्होंने आगे कहा कि ज़्यादातर महिलाएं यूट्यूब पर उसके वीडियोज़ देखकर, पादरी के धार्मिक प्रवचनों की ओर आकर्षित हुईं, और अंत में ट्रस्ट में पहुंच गईं.

दिप्रिंट ने सखी सेंटर पहुंचकर जी सारण्य से मुलाक़ात की, जिन्होंने बताया कि इनमें से अधिकतर महिलाओं ने किसी भी तरह की मेडिकल जांच कराने से मना कर दिया था, और यौन शोषण से इनकार किया था.

उन्होंने ये भी कहा कि उनमें से अधिकतर महिलाएं, अपने परिवार की जानकारी के बिना कुमार के सेंटर में रह रहीं थीं. उनमें से चार, जो कुरनूल ज़िले से थीं, लोक सेवा आयोग परीक्षा के लिए तैयारी कर रहीं थीं, और उन्होंने अपने परिवारों से झूठ बोला था, कि वो कोचिंग केंद्रों पर रह रही हैं.

उन्होंने आगे कहा, ‘उनके फोन्स में चित्रों तथा रंगोली के फोटो थे, जिनके साथ दिल के संकेत बने थे, और ऐसी लिखाइयां थीं कि ‘मैं आपसे प्यार करती हूं, फादर’. जब हमने उनसे इन तस्वीरों के बारे में पूछा, तो उन्होंने कहा कि ये सब सम्मानवश था. ये पूछने पर कि वो केंद्र में क्यों आईं थीं, उन्होंने कहा कि ये दुनिया पाप से भरी है, और वो स्वर्ग में जाना चाहतीं थीं, और फादर उसे हासिल करने में उनकी सहायता करेंगे. हमने ऐसा केस पहले कभी नहीं देखा है’.

सारण्य ने कहा, ‘वो सब सभी वयस्क हैं, हम उन्हें कुछ भी करने के लिए मजबूर नहीं कर सकते. वो सब एक व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ी हैं, और ऐसा लगता है कि वो एकजुट हो सकती हैं (मिल सकती हैं, संपर्क में रह सकती हैं, या वापस सेंटर जाने की कोशिश कर सकती हैं)’.

सारण्य की बातों से सहमति जताते हुए एएसपी मणिकांत ने कहा, ‘पादरी ने आध्यात्मिक प्रवचन के नाम पर उन्हें फुसलाया, और ऐसा लगता है कि उन्हें बताया गया था, कि अपने पापों को धोने और स्वर्ग में पहुंचने के लिए, उन्हें पादरी के आदेशों को मानना होगा’.

बाहरी लोगों को केंद्र में प्रवेश करने से रोकने के लिए अस्थायी बैरिकेड्स | फोटो: ऋषिका सदम/ दिप्रिंट

दिप्रिंट ने श्रीरामापुरम गांव में केंद्र के परिसर का भी दौरा किया. तीन मंज़िली इमारत को पुलिस ने सील कर दिया था, और जो कपड़े सूखने के लिए बाहर डाले गए थे, वो अभी तक दीवारों पर पड़े थे. अंदर, कमरे बंद थे, और रैक्स में जूते भरे हुए थे.

स्थानीय निवासी इस बात से सतर्क हो गए हैं, कि उस जगह को लेकर कुछ विवाद चल रहा है. पता पूछने पर उनमें से कुछ ने दिप्रिंट से कहा, ‘क्या आप चर्च के लिए यहां आए हैं? वो महिलाओं के लिए सुरक्षित नहीं है, आप वापस चली जाईए’.

एक कृषि मज़दूर कोण्डा राजू, जिसने बताया कि वो दिन का अधिकतर समय, सेंटर के पास के खेतों में भैंसें चराने में बिताता था, उसने याद किया कि कैसे ‘पुलिस के आने से कुछ दिन पहले’, एक महिला ने संस्था के प्रबंधन से कुछ कहा-सुनी के बाद, सेंटर से बाहर आकर ख़ूब हंगामा मचाया था.

कथित यौन शोषण की ओर इशारा करते हुए, राजू ने कहा, ‘हम में से किसी को मालूम नहीं था, कि अंदर इतनी सारी महिलाएं मौजूद थीं, या वहां कुछ इतना भयानक काम चल रहा था’.

उन्होंने आगे कहा: ‘महिलाओं को बाल्कनी पर खड़े होने की अनुमति नहीं थी, और उन्हें हमेशा कमरों के अंदर रखा जाता था. हम बाहरी लोगों में से किसी को, बिल्डिंग के अंदर घुसने की इजाज़त नहीं थी’.

एक अन्य स्थानीय निवासी, 24 वर्षीय इलेक्ट्रीशियन अप्पलराजू ने बताया, कि वो बिजली बिलों के लिए मीटर रीडिंग लेने सेंटर जाता था, लेकिन उसने कहा कि उसे परिसर के अंदर घुसने, या किसी से बात करने की अनुमति नहीं थी.

उसने आगे कहा, ‘वो मुझे कहते थे कि अपना काम ख़त्म करके, जितना जल्दी हो सके वहां से निकल जाऊं. अगर मैं किसी से बात करने की कोशिश करता था, जो प्रबंधन मुझे बाहर भेज देता था’.

सेंटर से बमुश्किल 100 मीटर की दूरी पर शराब की एक दुकान है. उसके एक मालिक राजेश कुमार ने आरोप लगाया, कि धार्मिक संस्था का प्रबंधन अकसर उनसे वहां से हट जाने के लिए कहता था, और एक बार इसके लिए वो पुलिस के पास भी चला गया था.

प्रेमा स्वरूपी संस्था की कथित काली करतूतों की ख़बर, अब सियासी हल्क़ों तक भी पहुंच गई है.

पायकराओपेटा विधायक गोला बाबू राव ने, जो राज्य की सत्ताधारी वाईएसआरसीपी के सदस्य हैं, दिप्रिंट से कहा, ‘दो सप्ताह पहले भी, कुछ महिलाएं ट्रस्ट में आईं, और उन्होंने आरोप लगाया कि पादरी ने उन्हें पैसों का चूना लगाया है, और उन्हें इंसाफ चाहिए. मैं कलेक्टर के संपर्क में हूं और हमें अभी जांच करानी है, कि क्या बिल्डिंग के पास उचित पंजीकरण और अनुमतियां हैं.

‘मुझे अभी भी याद है कि पादरी की गिरफ्तारी के समय, जब मैं उन महिलाओं से मिलने गया था, तो वो बहुत डरी हुईं थीं. उनमें कुछ हमसे गिड़गिड़ा रहीं थीं कि हम उन्हें वहां से निकाल लें, लेकिन डर के कारण उनकी पुलिस से कुछ कहने की हिम्मत नहीं हो रही थी’.

(इस खबर को अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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