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Sunday, 8 February, 2026
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सांगानेर में अवैध भूमि विभाजन और निर्माण के खिलाफ लोकायुक्त से शिकायत

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(सुधार के साथ रिपीट)

जयपुर, 10 जनवरी (भाषा) जयपुर की एक रियल एस्टेट कंपनी ने अपने भूखंड के कथित अवैध विभाजन और सांगानेर क्षेत्र में अनधिकृत निर्माण पर अधिकारियों की निष्क्रियता को लेकर लोकायुक्त का दरवाजा खटखटाया है। यह जानकारी कंपनी के एक अधिकारी ने दी।

कंपनी के एसोसिएट वाइस प्रेसिडेंट सुरेंद्र सिंह ने बताया कि ‘राजदरबार पिंक सिटी डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड’ ने इस संबंध में लोकायुक्त के समक्ष शिकायत दर्ज कराकर राजस्व अधिकारियों की कथित भूमिका की जांच की मांग की है।

शिकायत में आरोप लगाया गया है कि वर्ष 2021 में प्रमुख कृषि भूमि का विभाजन किया गया और नगर निकायों ने अवैध निर्माण पर कोई कार्रवाई नहीं की।

सिंह के अनुसार, कंपनी ने सात जनवरी को दाखिल शिकायत में आरोप लगाया कि सांगानेर तहसीलदार और अन्य अधिकारियों ने जयसिंहपुरा बास गांव, भांकरोटा की कृषि भूमि का विभाजन कर दिया।

यह भूमि लगभग 6.29 हेक्टेयर की है और इसमें कई खसरा नंबर शामिल हैं। कंपनी ने बताया कि उसने 2005 में इसका आधा हिस्सा अविभाजित रूप में खरीदा था।

कंपनी के अनुसार, शेष हिस्से के सह-स्वामियों ने 23 फरवरी 2021 को बिना उसकी सहमति के विभाजन आदेश प्राप्त कर लिया, जो प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन है। इससे कंपनी को वित्तीय नुकसान हुआ क्योंकि उसे भूमि के ऐसे हिस्से मिले जो अनुपयोगी थे।

इसने यह भी आरोप लगाया कि भूमि का कुछ हिस्सा तीसरे पक्ष को बेच दिया गया, जिन्होंने जयपुर विकास प्राधिकरण (जेडीए) की मंजूरी के बिना निर्माण कर लिया और शिकायतों के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई।

कंपनी ने लोकायुक्त से मांग की है कि संबंधित खसरा नंबरों पर जेडीए की मंजूरी के बिना किए गए सभी निर्माणों को ध्वस्त किया जाए और सांगानेर तहसीलदार द्वारा बिना कंपनी की सहमति के पारित विभाजन आदेश को निरस्त किया जाए। इसके अलावा, कंपनी ने संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई और उचित राहत की भी मांग की है।

इस बीच, सांगानेर के पूर्व तहसीलदार कार्तिकेय लाटा ने कहा कि यह मामला कभी उनके संज्ञान में नहीं आया और वह इस बारे में कुछ नहीं कह सकते।

वहीं, कार्यवाहक तहसीलदार विपुल ने भी इस बारे में अनभिज्ञता जताई।

भाषा बाकोलिया

सुरभि नेत्रपाल

सुरभि

नेत्रपाल

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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