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Tuesday, 28 April, 2026
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‘राजनीति में शुचिता समय की मांग’ : गुजरात उच्च न्यायालय

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अहमदाबाद, सात जुलाई (भाषा) गुजरात उच्च न्यायालय ने ‘मोदी उपनाम’ को लेकर 2019 के आपराधिक मानहानि मामले में दोषसिद्धि पर रोक संबंधी कांग्रेस नेता राहुल गांधी की याचिका खारिज करते हुए शुक्रवार को कहा कि ‘राजनीति में शुचिता’ अब समय की मांग है।

न्यायमूर्ति हेमंत प्रच्छक ने याचिका खारिज करते हुए टिप्पणी की, ‘‘जनप्रतिनिधियों को स्वच्छ छवि का व्यक्ति होना चाहिए।’’ अदालत ने यह भी कहा कि दोषसिद्धि पर रोक लगाना नियम नहीं, बल्कि अपवाद है, जो विरले मामलों में इस्तेमाल होता है।

गांधी को मिली सजा के कारण उनकी लोकसभा की सदस्यता रद्द हो गयी है।

न्यायमूर्ति प्रच्छक ने फैसला सुनाते हुए कहा कि राहुल गांधी देशभर में पहले से ही 10 आपराधिक मामलों का सामना कर रहे हैं। एकल पीठ ने व्यवस्था दी कि (मोदी उपनाम वाली) टिप्पणी पर दो साल की जेल की सजा का निचली अदालत का आदेश ‘उचित, मुनासिब और विधिसम्मत’ है।

उच्च न्यायालय ने कहा, ‘‘वह (गांधी) बिल्कुल अस्तित्वहीन आधार पर दोषसिद्धि पर रोक लगाने की कोशिश कर रहे थे। यह कानून का एक सुस्थापित सिद्धांत है कि दोषसिद्धि पर रोक एक नियम नहीं, बल्कि एक अपवाद है, जिसका सहारा केवल दुर्लभ मामलों में लिया जाता है। अयोग्यता केवल सांसदों, विधायकों तक सीमित नहीं है। इतना ही नहीं, याचिकाकर्ता के खिलाफ 10 से अधिक आपराधिक मामले लंबित हैं।’’

गांधी जिन मामलों का सामना कर रहे हैं उनका उल्लेख करते हुए, उच्च न्यायालय ने कहा, ‘अब राजनीति में शुचिता का होना समय की मांग है। जनप्रतिनिधियों को साफ-सुथरी छवि वाला व्यक्ति होना चाहिए।’

न्यायमूर्ति प्रच्छक ने बताया कि मौजूदा शिकायत दर्ज कराने के बाद हिंदुत्ववादी विचारक वी डी सावरकर के पोते ने राहुल गांधी के ‘कैम्ब्रिज में वीर सावरकर के खिलाफ अपमानजनक बयान’ के लिए पुणे की एक अदालत में एक और शिकायत दर्ज करायी थी। साथ ही उनके खिलाफ लखनऊ की एक अदालत में एक अलग शिकायत भी दायर की गई थी।

न्यायाधीश ने कहा कि इस परिप्रेक्ष्य में दोषसिद्धि पर रोक लगाने से इनकार करना किसी भी प्रकार से आवेदक के साथ अन्याय नहीं कहलाता।

उच्च न्यायालय ने कहा, ‘‘अपीलीय अदालत (सूरत में) द्वारा पारित किया गया आदेश न्यायसंगत, उचित और कानून-सम्मत है, और इसमें किसी हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है। हालांकि, संबंधित जिला न्यायाधीश से अनुरोध किया जाता है कि वह अपनी योग्यता के आधार पर तथा कानून के दायरे में यथाशीघ्र आपराधिक अपील पर निर्णय लें।’’

न्यायमूर्ति प्रच्छक ने अपराध गंभीर न होने की गांधी की दलील पर कहा, ‘‘अभियुक्त सांसद थे, वह राष्ट्रीय स्तर पर दूसरी सबसे बड़ी पार्टी के अध्यक्ष थे तथा उस पार्टी के अध्यक्ष थे, जिसने 50 साल से अधिक समय तक देश में शासन किया था। वह हजारों लोगों के सामने भाषा दे रहे थे और उन्होंने चुनाव परिणाम प्रभावित करने के इरादे से चुनाव में गलतबयानी की थी।’’

उन्होंने कहा कि अब अयोग्य घोषित किये जा चुके सांसद उस वक्त एक रैली को संबोधित कर रहे थे और प्रधानमंत्री मोदी का नाम लेकर खलबली पैदा करना चाहते थे।

अदालत ने कहा कि मौजूदा मानहानि मामला गंभीर प्रकृति का था। आदेश में कहा गया है, ‘‘आरोपी वहीं नहीं रुके, बल्कि यह भी कहा कि ‘सारे चोरों के (उप)नाम मोदी ही क्यों है। इस प्रकार मौजूदा मामला निश्चित तौर पर गंभीर अपराध की श्रेणी में आएगा।’’

आदेश पढ़ते हुए न्यायाधीश ने कहा, ‘‘उपरोक्त के मद्देनजर मौजूदा आपराधिक पुनरीक्षण याचिका खारिज किये जाने योग्य है और इसलिए इसे खारिज किया जाता है।’’

गुजरात में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायक पूर्णेश मोदी द्वारा 2019 में दायर एक मामले में सूरत की मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट अदालत ने 23 मार्च को राहुल गांधी को भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धाराओं 499 और 500 (आपराधिक मानहानि) के तहत दोषी ठहराते हुए दो साल जेल की सजा सुनाई थी।

फैसले के बाद गांधी को जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के प्रावधानों के तहत संसद की सदस्यता से अयोग्य घोषित कर दिया गया था। राहुल गांधी 2019 में केरल के वायनाड से लोकसभा के लिए निर्वाचित हुए थे।

राहुल गांधी ने 13 अप्रैल, 2019 को कर्नाटक के कोलार में एक चुनावी रैली के दौरान टिप्पणी की थी कि ‘‘सभी चोरों के उपनाम मोदी ही क्यों होते हैं?’’ इस टिप्पणी को लेकर विधायक ने गांधी के खिलाफ आपराधिक मानहानि का मामला दर्ज कराया था।

भाषा

सुरेश माधव

माधव

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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