नई दिल्ली: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की लीगल विंग की प्रमुख रत्ना सिंह ने शनिवार को अपने घर के बाहर पुलिस द्वारा गलत तरीके से रोके जाने का आरोप लगाते हुए दिल्ली की एक अदालत का रुख किया है. राजधानी में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर हो रहे प्रदर्शनों के दौरान कई लोगों को हिरासत में लिया गया है. रत्ना सिंह ने इस मामले में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग की है.
CJP के विरोध प्रदर्शन के बीच फिलहाल उन्हें उनके घर पर ही हिरासत में रखा गया है.
वकील रत्ना सिंह ने साकेत जिला अदालत में एक तत्काल याचिका दायर की है. उन्होंने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 175(3) और 174 के तहत यह याचिका दायर की है. इसमें उन्होंने तुरंत FIR दर्ज करने और उन्हें कथित तौर पर गलत तरीके से हिरासत में रखने के मामले में स्थिति रिपोर्ट देने की मांग की है.
साकेत जिला अदालत के मुख्य मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट के सामने दायर याचिका के मुताबिक, सिंह को जंगपुरा एक्सटेंशन में उनके घर के बाहर उस समय हिरासत में लिया गया, जब वह सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी कर रही थीं. उन्हें वहां दूसरे वकीलों के साथ वकीलों के विरोध प्रदर्शन में शामिल होना था.
वकील ने गलत तरीके से हिरासत में रखने का आरोप लगाया
दिल्ली की अदालत में दायर याचिका में कहा गया, “…आवेदक वकील तारा नरूला की कार में उनके साथ बैठी थीं. लेकिन उन्हें वहां से जाने की अनुमति नहीं दी गई. दो गाड़ियों ने आवेदक की कार को आगे और पीछे से रोक रखा था और कार के दरवाजों के बाहर पुलिसकर्मी मौजूद थे.”
सिंह ने अपनी याचिका में कहा कि शिवांगी नाम की एक अन्य वकील के फोन नंबर से PCR कॉल भी की गई थी. शिवांगी भी उसी कार में आवेदक के साथ बैठी थीं.
याचिका में कहा गया, “आवेदक को गलत तरीके से हिरासत में रखा गया है और उनकी आवाजाही रोकी जा रही है. उन्हें अपनी आजादी, सुरक्षा, शारीरिक सुरक्षा और जान को खतरा होने की आशंका है.”
याचिका में आगे कहा गया कि आवेदक ने कार के बाहर मौजूद पुलिसकर्मियों से बार-बार पूछा कि उन्हें किस अधिकार के तहत हिरासत में रखा जा रहा है, उनकी आवाजाही क्यों रोकी जा रही है और उन्हें क्यों बंद करके रखा गया है. साथ ही, सार्वजनिक रास्ते को किस अधिकार के तहत रोका गया है.
याचिका के मुताबिक, पुलिसकर्मियों ने न तो इस कार्रवाई से जुड़ा कोई आदेश दिखाया और न ही अपनी कार्रवाई के लिए कोई अनुमति दिखाई. इसमें कहा गया कि सार्वजनिक रास्तों तक पहुंच रोकना गैरकानूनी और गलत है.
सिंह ने कहा कि उनके पास कोई दूसरा रास्ता नहीं बचा था, इसलिए उन्होंने इस याचिका के जरिए गलत काम करने वाले लोगों के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग की है.
याचिका में आगे कहा गया, “यह याचिका सही मंशा से दायर की गई है और न्याय के हित में है. समय की कमी और मामले की जल्दबाजी को देखते हुए आवेदक के पास वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के पास जाने का समय नहीं है. ऐसा भी हो सकता है कि वे खुद ऊपर बताए गए गैरकानूनी और गलत कामों में शामिल हों.”
रत्ना सिंह की क्या मांग है
याचिका में अदालत से उन लोगों के खिलाफ FIR/NCR दर्ज करने की मांग की गई है, जिन्होंने आवेदक को गलत तरीके से रोका या हिरासत में रखा है. याचिका में कहा गया है कि आवेदक को डर है कि स्थिति और बिगड़ सकती है, जिससे उनकी शारीरिक सुरक्षा, सेहत और जान को खतरा हो सकता है.
याचिका में यह भी मांग की गई है कि जंगपुरा की स्थिति पर एक रिपोर्ट दी जाए. जंगपुरा इस अदालत के क्षेत्रीय और प्रशासनिक अधिकार क्षेत्र में आता है.
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
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