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Wednesday, 18 March, 2026
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चिदंबरम, रमेश और तन्खा ने भरा नामांकन, उम्मीदवारों के चयन को लेकर कांग्रेस में उभरे असंतोष के स्वर

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नयी दिल्ली, 30 मई (भाषा) राज्यसभा चुनाव के लिए उम्मीदवारों के चयन को लेकर कांग्रेस में उभरे असंतोष के बीच सोमवार को पार्टी के प्रत्याशियों पी चिदंबरम, जयराम रमेश, विवेक तन्खा और इमरान प्रतापगढ़ी ने अपना नामांकन पत्र दाखिल किया।

उम्मीदवारों के चयन को लेकर सवाल खड़े करने में सबसे मुखर आवाज अभिनेत्री और महिला कांग्रेस की महासचिव नगमा मोरारजी की सामने आई है। उन्होंने मुख्य रूप से इमरान प्रतापगढ़ी की उम्मीदवारी पर सवाल खड़े किए और दावा किया कि उनसे उच्च सदन में भेजे जाने का वादा 18 साल पहले किया गया था, लेकिन यह आज तक पूरा नहीं हुआ।

कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा, पार्टी नेता आचार्य प्रमोद कृष्णम और कुछ अन्य नेताओं ने भी राज्यसभा के लिए पार्टी के उम्मीदवारों के चयन के संदर्भ में दबी जुबान या फिर खुलकर अपनी नाखुशी जाहिर की।

उम्मीदवारों के चयन को लेकर पार्टी में उभरे इस असंतोष के बीच, चिदंबरम ने तमिलनाडु, रमेश और मंसूर अली खान ने कर्नाटक, तन्खा ने मध्य प्रदेश और प्रतापगढ़ी ने महाराष्ट्र से अपना नामांकन पत्र भरा।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता चिदंबरम ने नामांकन पत्र भरने के बाद उम्मीदवारों के चयन पर अपनी पार्टी के भीतर चल रहे असंतोष पर प्रतिक्रिया देने से इनकार कर दिया।

तमिलनाडु से राज्यसभा चुनाव के लिए अपना नामांकन पत्र दाखिल करने के बाद चिदंबरम ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए राज्य के मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन और वाम दलों सहित द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक)-कांग्रेस गठबंधन के अन्य सहयोगियों को धन्यवाद दिया। चिदंबरम ने कहा कि उन्होंने सभी के समर्थन से नामांकन पत्र दाखिल किया है।

कांग्रेस ने राज्यसभा के लिए 10 जून को होने वाले चुनाव के वास्ते रविवार को 10 उम्मीदवारों की घोषणा की थी। पी चिदंबरम को तमिलनाडु से, जयराम रमेश को कर्नाटक से, अजय माकन को हरियाणा से और रणदीप सुरजेवाला को राजस्थान से उम्मीदवार बनाया गया है।

पार्टी ने मुकुल वासनिक और प्रमोद तिवारी को राजस्थान से, विवेक तन्खा को मध्य प्रदेश से, राजीव शुक्ला और रंजीत रंजन को छत्तीसगढ़ से तथा इमरान प्रतापगढ़ी को महाराष्ट्र से उम्मीदवार बनाया है।

उम्मीदवारों की घोषणा के बाद कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता पवन खेड़ा ने रविवार रात परोक्ष रूप से अपनी नाखुशी का इजहार किया। उन्होंने ट्वीट कर कहा, ‘‘शायद मेरी तपस्या में कुछ कमी रह गई।’’

खेड़ा के ट्वीट को रिट्वीट करते हुए नगमा ने कहा, ‘‘हमारी भी 18 साल की तपस्या कम पड़ गई, इमरान (प्रतापगढ़ी) भाई के आगे ।’’

कांग्रेस प्रवक्ता खेड़ा ने एक वीडियो जारी कर अपनी कथित नाराजगी की चर्चा को खारिज करने का प्रयास किया और कहा कि निजी महत्वाकांक्षा को अलग रखकर पार्टी की विचारधारा के लिए लड़ना है।

उन्होंने कहा, ‘‘हमारी महत्वाकांक्षा कांग्रेस की विचारधारा के अनुसार कतार के अंतिम व्यक्ति के हक की लड़ाई लड़ने और जहरीली विचाराधारा को परास्त करने की है। आप लोग (कार्यकर्ता एवं समर्थक) रोजाना बिना किसी पद के लड़ रहे हैं। आपका जज्बा मुझे सिखाता है। सोनिया जी ने एक पद (प्रधानमंत्री का पद) को ठुकराया था और हमारी विचारधारा को मजबूती दी थी। यह हमारे लिए मिसाल है।’’

खेड़ा ने कहा, ‘‘हम अपनी निजी महत्कांक्षा को लेकर अंधे नहीं हो सकते, भावुक नहीं हो सकते। यह लड़ाई लंबी है, विचारधारा की लड़ाई। हरिवंश राय बच्चन कहते थे-जलने से भयभीत ना जो हो, आए मेरी मधुशाला। आइए कंधे से कंधा मिलाकर लड़ें और कांग्रेस की विचाराधारा को मजबूत करें।’’

नगमा ने राज्यसभा उम्मीदवार के तौर पर प्रतापगढ़ी के चयन को लेकर खुलकर नाराजगी जताई।

उन्होंने एक ट्वीट में कहा, ‘‘हमारी कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया जी ने 2003-04 में मुझसे उस वक्त राज्यसभा भेजने का वादा किया था, जब मैं पार्टी में शामिल हुई थी। उस वक्त हम लोग सत्ता में नहीं थे। इसके बाद 18 साल हो गए और उन्हें मुझे राज्यसभा भेजने का मौका नहीं मिला, इमरान के लिए मौका मिल गया। मैं यह पूछना चाहती हूं कि क्या मैं कम हकदार हूं?’’

कांग्रेस नेता आचार्य प्रमोद कृष्णम ने खुलकर अपना असंतोष प्रकट किया। उन्होंने खेड़ा के एक ट्वीट को रिट्वीट करते हुए कहा, ‘‘प्रतिभाओं का ‘दमन’ करना पार्टी के लिये ‘आत्मघाती’ क़दम है।’’

कृष्णम ने नगमा की ‘‘18 साल की तपस्या’’ वाली टिप्पणी को लेकर कहा, ‘‘सलमान ख़ुर्शीद, तारिक अनवर और (गुलाम नबी) आज़ाद साहब की तपस्या तो 40 साल की है, वे भी शहीद हो गए।’’

कांग्रेस द्वारा राजस्थान से राज्यसभा की तीन सीट के लिए अगले महीने होने जा रहे चुनाव में ‘बाहरी’ नेताओं को उम्मीदवार बनाए जाने का भी विरोध हुआ है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के सलाहकार एवं निर्दलीय विधायक संयम लोढ़ा ने कांग्रेस आलाकमान से अपने फैसले पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया है।

लोढ़ा ने रविवार रात हैशटैग ‘कांग्रेस संकल्प’ के साथ ट्वीट किया, “कांग्रेस पार्टी को यह बताना चाहिए कि राजस्थान के किसी भी कांग्रेस नेता/कार्यकर्ता को राज्यसभा चुनाव में प्रत्याशी नहीं बनाने के क्या कारण हैं?”

उन्होंने सोमवार को एक वीडियो बयान जारी कर कहा कि ‘बाहरी’ उम्मीदवारों के चयन से स्थानीय कार्यकर्ता नाउम्मीद हुए हैं और पार्टी को अपने फैसले पर पुनर्विचार करना चाहिए।

भाषा हक

हक दिलीप

दिलीप

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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