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Thursday, 26 March, 2026
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चिदंबरम ने रुपये में लगातार जारी गिरावट के लिए अर्थव्यवस्था के खराब प्रबंधन को जिम्मेदार ठहराया

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सुदीप्तो चौधरी

कोलकाता, 16 जुलई (भाषा) पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने रुपये में लगातार जारी गिरावट, रोजगार सृजन और रसोई गैस की कीमतों में वृद्धि सहित कई अन्य मुद्दों को लेकर शनिवार को केंद्र सरकार को घेरा।

चिदंबरम ने पीटीआई-भाषा को ईमेल पर दिए साक्षात्कार में कहा कि भारत के मौजूदा चालू खाता घाटे और उच्च मुद्रास्फीति सहित अन्य कारकों के कारण मुद्रा में गिरावट ‘अपरिहार्य’ है।

भारतीय रुपया बृहस्पतिवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 79.99 के सर्वकालिक निचले स्तर पर पर पहुंच गया था। हालांकि, शुक्रवार को यह आठ पैसे की मजबूती के साथ 79.91 पर बंद हुआ।

वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने कहा कि रुपये में गिरावट के लिए निर्यात में कमी, उच्च मुद्रास्फीति दर और विदेशी पोर्टफोलियो निवेश के बाह्य प्रवाह (आउटफ्लो) को भी जिम्मेदार ठहराया जा सकता है।

उन्होंने कहा, “डॉलर के मुकाबले रुपये की कीमत में गिरावट हमारे मौजूदा चालू खाता घाटे, उच्च मुद्रास्फीति, घरेलू स्तर पर और अमेरिका में ब्याज दरों में वृद्धि, विदेशी पोर्टफोलियो निवेश के बाह्य प्रवाह तथा निर्यात में कमी के चलते अपरिहार्य है।”

चिदंबरम ने कहा, “विनिमय दर को ‘कीमत’ के रूप में देखा जाना चाहिए। यह एक ऐसा ‘कारक’ है, जिसका प्रबंधन भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) को करना है। रुपये में तभी मजबूती आएगी, जब बुनियादी कारकों में सुधार होगा।”

बैंक ऑफ अमेरिका सिक्योरिटी की एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत का मौजूदा चालू खाता घाटा यानी अन्य देशों को उत्पाद बेचकर प्राप्त धन और विदेश से सामान की खरीदारी पर खर्च की गई राशि के बीच के अंतर के इस वित्तीय वर्ष में 105 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है, जो सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का तीन प्रतिशत है। इसमें कहा गया है कि देश के चालू खाता घाटे में वृद्धि के पीछे मुख्य रूप से बढ़ते व्यापार घाटे का हाथ है।

बृहस्पतिवार को जारी सरकारी आंकड़ों के अनुसार, सोने और कच्चे तेल के आयात में वृद्धि के कारण जून में व्यापार घाटा 26.18 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया।

आंकड़ों के मुताबिक, जून 2021 के मुकाबले जून 2022 में आयात 57.55 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 66.31 अरब डॉलर पर पहुंच गया, जबकि निर्यात 23.52 फीसदी बढ़कर 40.13 अरब डॉलर हो गया।

वहीं, जून में खुदरा महंगाई दर मामूली गिरावट के साथ 7.01 प्रतिशत पर पहुंच गई। हालांकि, यह अभी भी आरबीआई के ‘कंफर्ट लेवल’ से ऊपर बनी हुई है। जबकि, उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) आधारित मुद्रास्फीति मई में 7.04 प्रतिशत और जून 2021 में 6.26 प्रतिशत थी।

चिदंबरम ने प्रधानमंत्री के ‘दस लाख नौकरियां’ देने के अभियान की आलोचना भी की। उन्होंने दावा किया कि इससे देश में जारी ‘रोजगार संकट’ से निपटने में कोई मदद नहीं मिलेगी।

पूर्व वित्त मंत्री ने कहा, “मोदी सरकार ने स्वीकार किया है कि अकेले केंद्र में 8,00,000 से अधिक रिक्तियां हैं। अगर आप 10,00,000 लोगों की प्रस्तावित भर्ती के मुकाबले इन रिक्तियों को देखते हैं तो सृजन के लिए 2,00,000 से भी कम पद बचते हैं। और वो भी 18 महीने से अधिक की अवधि में।”

केंद्रीय कार्मिक राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने साल की शुरुआत में राज्यसभा में एक सवाल के लिखित जवाब में बताया था कि एक मार्च 2020 तक केंद्र सरकार के विभागों में 8.72 लाख से अधिक पद खाली थे।

चिदंबरम ने दावा किया कि केंद्र सरकारी की नयी ‘अग्निपथ’ योजना, जिसमें सशस्त्र बलों में अस्थाई नौकरी देने का प्रावधान है और सेवा अवधि की समाप्ति के बाद कोई लाभ नहीं मिलता, के लिए बड़ी संख्या में युवाओं का आवेदन करना इस बात का संकेत है कि देश में रोजगार की स्थिति ‘कितनी खराब’ है।

उन्होंने कहा, “भारतीय वायुसेना में ‘अग्निवीरों’ की भर्ती के वास्ते हाल ही में निकाले गए 3,000 पदों के लिए 7,50,000 युवाओं ने आवेदन किया था। यह इस बात का संकेत है कि देश में रोजगार की स्थिति कितनी खराब है और युवा कितने हताश हैं।”

रसोई गैस की कीमत में बढ़ोतरी पर चिदंबरम ने कहा कि संकट के इस दौर में सरकार आम लोगों की मदद करने को लेकर बिल्कुल भी गंभीर नहीं है।

उन्होंने कहा, “ये सरकार बेशर्म है। जब लोग परेशानियों से घिरे होते हैं तो यह सरकार का कर्तव्य है कि वह मदद को आगे आए और उनका बोझ घटाए। केंद्र को तेल और गैस विपणन कंपनियों के बहिखातों की ज्यादा चिंता है।”

कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया, “वे वैसे भी अप्रत्याशित लाभ कमा रही हैं। इसका कुछ हिस्सा लोगों को (कीमत में कटौती के रूप में) देने के बजाय सरकार अप्रत्याशित लाभ पर कर लगा रही है और खुद का खजाना भर रही है।”

भारत में छह जुलाई को रसोई गैस की कीमत में प्रति सिलेंडर 50 रुपये की बढ़ोतरी की गई थी, जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऊर्जा के दाम बढ़ने के मद्देनजर मई के बाद से दरों में तीसरी वृद्धि थी।

खुदरा ईंधन विक्रेताओं की मूल्य अधिसूचना के मुताबिक, राष्ट्रीय राजधानी में अब बिना सब्सिडी वाले 14.2 किलोग्राम के एलपीजी सिलेंडर की कीमत 1,053 रुपये हो गई है, जो पहले 1,003 रुपये थी।

भाषा पारुल माधव

माधव

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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