रायपुर, 18 मार्च (भाषा) छत्तीसगढ़ विधानसभा ने बुधवार को सदन में विस्तृत चर्चा के बाद वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 1.87 लाख करोड़ रुपये का बजट पारित कर दिया।
छत्तीसगढ़ विनियोग विधेयक, 2026 पर हुई बहस का जवाब देते हुए वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने कहा कि यह बजट राज्य के तीन करोड़ नागरिकों की आकांक्षाओं को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इसका उद्देश्य समावेशी विकास और आर्थिक मजबूती को बढ़ावा देना है, साथ ही यह सुनिश्चित करना है कि सरकारी योजनाएं समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे।
चौधरी ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में तैयार किए गए इस बजट का लक्ष्य 2047 तक छत्तीसगढ़ को एक विकसित राज्य में बदलना है।
उन्होंने बताया कि कुल विनियोग एक लाख 87 हजार 500 करोड़ रुपये का है, जिसमें ऋणों का पुनर्भुगतान एवं अन्य समायोजन शामिल हैं। शुद्ध बजट आकार एक लाख 72 हजार करोड़ रुपये निर्धारित किया गया है।
वित्त मंत्री ने कहा कि यह बजट संकल्प (समावेशी विकास, अधोसंरचना, निवेश, कुशल मानव संसाधन, अंत्योदय, आजीविका और नीति) के सात स्तंभों पर टिका है। इस दृष्टिकोण को साकार करने के लिए 500 करोड़ रुपये की लागत से पांच नए मिशन शुरू किए जाएंगे। मुख्यमंत्री एआई मिशन के लिए 100 करोड़ रुपये (तकनीक के विस्तार के मद में), मुख्यमंत्री खेल उत्कर्ष मिशन के मद में 100 करोड़ रुपये, मुख्यमंत्री पर्यटन विकास मिशन के लिए 100 करोड़ रुपये, मुख्यमंत्री अधोसंरचना मिशन के लिए 100 करोड़ रुपये और मुख्यमंत्री स्टार्ट-अप एवं निपुन मिशन के लिए 100 करोड़ रुपये का प्रावधान है।
वित्त मंत्री ने बताया कि आर्थिक दृष्टि से छत्तीसगढ़ निरंतर प्रगति कर रहा है। वर्ष 2025-26 में राज्य की आर्थिक वृद्धि दर 8.11 प्रतिशत दर्ज की गई है, जो राष्ट्रीय औसत 7.4 प्रतिशत से अधिक है।
चौधरी ने कहा कि बजट में कृषि एवं किसान कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। ‘‘कृषक उन्नति योजना’’ के लिए 10 हजार करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जो इस बजट का सबसे बड़ा मद है। राज्य सरकार द्वारा किसानों से 3,100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदी की जा रही है और अब तक लगभग एक लाख 40 हजार करोड़ रुपये का भुगतान सीधे किसानों के खातों में किया जा चुका है। इससे न केवल किसानों की आय में वृद्धि हुई है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था में भी सकारात्मक प्रभाव पड़ा है।
उन्होंने कहा कि महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में भी बजट में महत्वपूर्ण प्रावधान किए गए हैं। ‘‘महतारी वंदन योजना’’ के अंतर्गत राज्य की लगभग 70 लाख महिलाओं को प्रतिमाह एक हजार रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है। इस योजना के प्रभावी संचालन के लिए 8,200 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। राज्य सरकार ने वर्ष 2026 को ‘‘महतारी गौरव वर्ष’’ घोषित कर महिलाओं के सम्मान, सुरक्षा और आत्मनिर्भरता को प्राथमिकता दी है।
इससे पहले, चर्चा में हिस्सा लेते हुए विपक्ष के नेता चरण दास महंत ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत सरकार की कड़ी आलोचना की।
उन्होंने धान खरीद में अनियमितताओं, जमीन की अवैध प्लॉटिंग और कानून-व्यवस्था बनाए रखने में सरकार की नाकामी के आरोप लगाए।
महंत ने बेरोजगारी पर भी चिंता जताई और कहा कि घर पर बैठे युवाओं के पास निराशा के अलावा कुछ नहीं है। उन्होंने राज्य में हाल ही में सामने आए अवैध अफीम की खेती के मामलों को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा।
उन्होंने कहा कि ‘गांजा’ की खेती सीधे मुख्यमंत्री के अपने जिले अंबिकापुर में हो रही है और यह हमारे कोरबा में भी हो रही है। इन गतिविधियों की जांच क्यों नहीं की जा रही है? दोषियों को गिरफ्तार क्यों नहीं किया जा रहा है?
महंत ने यह भी आरोप लगाया कि जैव-विविधता से समृद्ध हसदेव वन क्षेत्र को कोयला खदानों के लिए नष्ट किया जा रहा है।
चर्चा के बाद, सदन ने बजट पारित कर दिया गया।
भाषा संजीव सुरभि
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