बरेली (उप्र), छह फरवरी (भाषा) उत्तर प्रदेश के बरेली में गणतंत्र दिवस पर प्रादेशिक प्रशासनिक सेवा (पीसीएस) के 2019 बैच के अधिकारी और बरेली के नगर मजिस्ट्रेट के पद पर तैनात रहने के दौरान पद से इस्तीफा देने और उसके बाद शासन से निलंबित किए गए अलंकार अग्निहोत्री के खिलाफ आरोप पत्र जारी कर शामली के जिलाधिकारी (डीएम) को भेज दिया गया है।
शासन ने निलंबन की अवधि में अग्निहोत्री को शामली के ज़िलाधिकारी के साथ संबद्ध किया है।
आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, आरोप पत्र में तीन मुख्य आरोप शामिल हैं, जिनमें केंद्र और राज्य सरकार के खिलाफ आपत्तिजनक बयान देना, सरकारी कर्मचारी होते हुए भी जाति आधारित टिप्पणी करना और सेवा आचरण नियमों का उल्लंघन करते हुए विरोध प्रदर्शन और नारेबाजी में भाग लेना।
बरेली मंडल के आयुक्त भूपेंद्र एस चौधरी को इस मामले में जांच अधिकारी नियुक्त किया गया है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार के नियुक्ति अनुभाग से चार फरवरी को आरोप पत्र प्राप्त हुआ और अगले दिन अग्निहोत्री को तामील कराने के लिए शामली के जिलाधिकारी को भेज दिया गया।
बरेली के नगर मजिस्ट्रेट के पद पर तैनात अग्निहोत्री को राज्य सरकार ने 26 जनवरी को उनके इस्तीफे के दिन ही निलंबित कर दिया था। बाद में उन्हें शामली के जिलाधिकारी के कार्यालय में संलग्न किया गया।
आयुक्त ने अग्निहोत्री को जवाब दाखिल करने के लिए 15 दिन का समय दिया है।
चौधरी ने कहा, ‘यदि निर्धारित समय के भीतर कोई जवाब नहीं मिलता है, तो यह मान लिया जाएगा कि उनके पास अपने बचाव में कहने के लिए कुछ नहीं है।’
उन्होंने आगे कहा कि जांच रिपोर्ट निर्धारित समय सीमा के भीतर सरकार को सौंप दी जाएगी।
अग्निहोत्री ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के नए कानून से आहत होने और स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के कथित अपमान का हवाला देते हुए अपने इस्तीफे की घोषणा की थी। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकार ब्राह्मण विरोधी है।
उन्होंने बरेली के जिला मजिस्ट्रेट अविनाश सिंह पर उन्हें 45 मिनट तक हिरासत में रखने का आरोप लगाया और कलेक्ट्रेट गेट पर विरोध प्रदर्शन किया। डीएम द्वारा अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश के बाद, राज्य सरकार ने उन्हें निलंबित कर दिया और विभागीय जांच का आदेश दिया।
उप्र सरकार के निर्देशानुसार बरेली मंडल के आयुक्त द्वारा जांच की जा रही है।
भाषा सं आनन्द रंजन
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