नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने चंडीगढ़ की सुखना झील के विनाश और सूखने की गंभीर स्थिति पर चिंता जताते हुए बुधवार को बिल्डर-माफिया और राज्य अधिकारियों की मिलीभगत पर कड़ी टिप्पणी की. चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि झील विनाश के कगार पर है और यह नौकरशाहों और बिल्डर माफिया के गठजोड़ का परिणाम है.
सीजेआई ने कहा, “सुखना झील, और कितना सुखाओगे? यह विनाश के कगार पर है. बिल्डर माफिया नौकरशाहों की राजनीतिक मदद से काम कर रहा है.”
यह टिप्पणी सुप्रीम कोर्ट के स्वत: संज्ञान मामले में आई, जिसमें अरावली की परिभाषा और उसके संरक्षण पर सुनवाई हो रही है. वकील अनुज कौशल ने झील के हालात को उठाया, जिस पर सीजेआई ने तुरंत अपनी नाराज़गी जताई.
मौजूदा मुकदमे का मुख्य फोकस झील के कैचमेंट एरिया की सुरक्षा है.
2020 में सुप्रीम कोर्ट ने अवैध निर्माणों को गिराने का आदेश दिया था. नवंबर 2024 में, न्यायालय ने पंजाब सरकार, चंडीगढ़ प्रशासन और केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया था.
बुधवार को पंजाब सरकार ने कोर्ट में अपनी अनुपालन हलफनामा पेश किया. इसमें कहा गया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार 100 मीटर इको-सेंसिटिव जोन (ESZ) पर्याप्त नहीं है और इसे बढ़ाकर 1 से 3 किलोमीटर किया जाएगा, जिसका अंतिम अनुमोदन मंत्रिपरिषद द्वारा किया जाएगा.
हलफनामे में स्पष्ट किया गया है कि ESZ के भीतर कोई भी स्थायी निर्माण नहीं होगा. 0.5 किलोमीटर के दायरे में कोई वाणिज्यिक निर्माण नहीं होगा. 0.5 से 1.25 किलोमीटर में केवल कम ऊंचाई की इमारतें (15 फीट तक) बन सकती हैं. 1.25 किलोमीटर से अधिक दूरी में नए आवासीय और अन्य भवनों का निर्माण अनुमति प्राप्त है.
