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Wednesday, 22 April, 2026
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एनआईए अधिनियम की वैधता को चुनौती वाली याचिका पर केंद्र, अन्य से जवाब मांगा

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नयी दिल्ली, 21 अप्रैल (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) अधिनियम-2008 की वैधता को चुनौती देने वाली याचिका पर केंद्र सरकार और अन्य से मंगलवार को जवाब तलब किया।

न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने केंद्र, एनआईए और अन्य को नोटिस जारी कर याचिका पर चार हफ्ते के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया।

पीठ ने याचिका में उठाए गए सवालों को बेहद महत्वपूर्ण बताते हुए कहा, “नोटिस जारी करें।”

याचिका में एनआईए अधिनियम को रद्द करने का अनुरोध किया गया है। इसमें दावा किया गया है कि यह अधिनियम संविधान के अनुच्छेद-14 (कानून के समक्ष समानता) का “उल्लंघन” करता है और केंद्र की विधायी क्षमता से परे है।

मुंबई में 26 नवंबर 2008 को हुए आतंकवादी हमलों के मद्देनजर इस अधिनियम के तहत एक केंद्रीय आतंकवाद विरोधी कानून प्रवर्तन एजेंसी के रूप में एनआईए की स्थापना की गई थी।

शीर्ष अदालत ने कहा कि प्रतिवादी चार हफ्ते के भीतर जवाबी हलफनामा दाखिल करें और याचिकाकर्ता को उसके बाद प्रत्युत्तर हलफनामा दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया जाएगा।

याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ दवे ने कहा कि ‘पुलिस’ राज्य सूची के अंतर्गत आती है। उन्होंने एनआईए अधिनियम के विभिन्न प्रावधानों का हवाला दिया, जिनमें धारा 3 भी शामिल है, जो केंद्रीय एजेंसी की स्थापना से संबंधित है।

पीठ ने मामले में पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी से पूछा, “पुलिस थाना न होते हुए भी क्या एनआईए प्राथमिकी दर्ज कर सकती है?”

दवे ने अधिनियम की धारा 6 (5) का भी जिक्र किया, जो अनुसूचित अपराधों की जांच से संबंधित है और कहती है : अगर केंद्र सरकार की राय है कि कोई अनुसूचित अपराध किया गया है, जिसकी इस अधिनियम के तहत जांच किए जाने की आवश्यकता है, तो वह स्वतः संज्ञान लेकर एजेंसी को इसकी जांच करने का निर्देश दे सकती है।

पीठ ने भाटी से कहा, “आपको स्वत: संज्ञान के आधार पर प्राथमिकी दर्ज करने से जुड़े प्रावधान को लेकर भी हमारी सहायता करनी होगी।”

उसने मामले की अगली सुनवाई के लिए 14 जुलाई की तारीख तय की।

भाषा पारुल रंजन

रंजन

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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