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Saturday, 7 March, 2026
होमदेशकेंद्र ने अपनी विदेश नीति अमेरिका के पास गिरवी रख दी है: कर्नाटक के मंत्री प्रियंक खरगे

केंद्र ने अपनी विदेश नीति अमेरिका के पास गिरवी रख दी है: कर्नाटक के मंत्री प्रियंक खरगे

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कलबुर्गी, सात मार्च (भाषा) कर्नाटक सरकार में मंत्री प्रियंक खरगे ने शनिवार को केंद्र सरकार की विदेश नीति की कड़ी आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि भारत की वैश्विक प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाया जा रहा है और केंद्र सरकार भारत की आर्थिक व ऊर्जा नीतियों पर की गई अमेरिकी वरिष्ठ अधिकारियों की टिप्पणियों का कड़ा जवाब देने में विफल रही है।

खरगे ने कलबुर्गी में एक प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए इस मुद्दे पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नेताओं की चुप्पी पर भी सवाल उठाया और उन पर देश की गरिमा की रक्षा करने के बजाय विपक्षी नेताओं पर हमला करने का आरोप लगाया।

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के पुत्र ने कहा, “केंद्र सरकार को कम से कम थोड़ी शर्म तो आनी चाहिए। उन्होंने व्यावहारिक रूप से हमारी पूरी विदेश नीति को अमेरिका के पास गिरवी रख दिया है। आज हमारी गरिमा का कोई मूल्य नहीं रह गया है।”

मंत्री ने अमेरिका के उपविदेश मंत्री क्रिस्टोफर लैंडौ द्वारा दिल्ली में कथित तौर पर दिए गए बयानों का जिक्र करते हुए कहा कि इन टिप्पणियों से संकेत मिलता है कि विदेशी सरकारें भारत की आर्थिक दिशा पर खुलकर चर्चा कर रही हैं।

उन्होंने कहा, “कल (शुक्रवार को) आपने देखा होगा कि अमेरिका के एक उपविदेश मंत्री ने दिल्ली में (अमेरिका में नहीं, बल्कि दिल्ली में) कहा कि वे (अमेरिका) भारत में चीन के साथ की गई गलती नहीं दोहराएंगे और हम भारत को विकास नहीं करने देंगे’।”

खरगे ने जारी युद्ध के बीच रूस से कच्चे तेल के आयात के संबंध में अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट की टिप्पणियों का हवाला दिया।

उन्होंने कहा, “कल (शुक्रवार को) अमेरिकी वित्त मंत्री ने कहा कि युद्ध के कारण उन्होंने (अमेरिका ने) भारत को रूस से कच्चा तेल खरीदने के लिए 30 दिन की अनुमति दी है।”

खरगे ने सवाल उठाया कि केंद्र सरकार ने ऐसे बयानों पर कड़ी प्रतिक्रिया क्यों नहीं दी।

मंत्री ने ऊर्जा नीति और ईंधन आपूर्ति को लेकर केंद्र सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा कि भारत के तेल भंडार पर परस्पर विरोधी दावे हैं।

उन्होंने पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी समेत केंद्रीय मंत्रियों की चुप्पी की भी आलोचना की।

खरगे ने पूछा, “संसद में उन्होंने (हरदीप सिंह पुरी ने) कहा कि हमारे पास 75 दिनों का भंडार है। लेकिन तेल कंपनियां प्रेस वार्ता में कहती हैं कि हमारे पास सिर्फ 25 दिनों का भंडार है। ऐसा कैसे हो सकता है?”

उन्होंने केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी सहित भाजपा की कर्नाटक इकाई के नेताओं को निशाना बनाते हुए आरोप लगाया कि वे राज्य सरकार पर तो तुरंत टिप्पणी कर देते हैं, लेकिन राष्ट्रीय गरिमा को प्रभावित करने वाले मुद्दों पर बोलने से बचते हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की विदेश नीति की भी आलोचना की और इसकी तुलना पिछली कांग्रेस सरकारों से की।

प्रियंक खरगे ने अमेरिका की पूर्व विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन से जुड़े एक उदाहरण का जिक्र करते हुए कहा, “उन्होंने एक बार कहा था कि वह यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि क्या भारत ईरान से तेल खरीद सकता है। तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने उन्हें स्पष्ट रूप से कहा था कि ‘यह निर्णय मेरे अधिकार क्षेत्र में आता है, आपके नहीं। मैं निर्णय लूंगा, आप नहीं।”

उन्होंने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने भी तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन के साथ अपने व्यवहार में इसी तरह भारत की स्वतंत्र विदेश नीति पर जोर दिया था।

भाषा जितेंद्र माधव

माधव

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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