नई दिल्ली: केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने एयरपोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एएआई) के एक सीनियर मैनेजर पर देहरादून एयरपोर्ट के 232 करोड़ रुपये की हेराफेरी का आरोप लगाते हुए केस दर्ज किया है.
आरोपी राहुल विजय 2019 से 2023 तक एएआई के देहरादून एयरपोर्ट पर वित्त और लेखा विभाग के प्रमुख था. फिलहाल वह जयपुर एयरपोर्ट पर इसी पद पर तैनात है.
मंगलवार को दर्ज एफआईआर देहरादून एयरपोर्ट पर तैनात एएआई के एक अन्य सीनियर मैनेजर (फाइनेंस) की शिकायत पर आधारित है. इसमें आरोप लगाया गया कि अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता होने के नाते विजय ने एएआई के बैंक खाते का दुरुपयोग किया और परिसंपत्तियों के निर्माण में उपयोग दिखाकर रकम को अपने निजी खाते में ट्रांसफर कर लिया.
शिकायत में कहा गया कि जब बैलेंस शीट में परिसंपत्तियों की असामान्य एंट्री देखी गईं, तो जांच के लिए एक समिति बनाई गई.
शिकायत के मुताबिक, “जांच में पाया गया कि राहुल विजय, जब देहरादून एयरपोर्ट पर तैनात था, तो उसने फर्जी एंट्रियां डालीं और फरवरी 2019 से अगस्त 2022 के बीच करीब 232 करोड़ रुपये अपने निजी बैंक खाते में ट्रांसफर कर दिए.”
जांच समिति ने पाया कि आरोपी ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए एएआई के बैंक खाते (स्टेट बैंक ऑफ इंडिया में) के लिए तीन यूजर आईडी बनवाईं और फिर छोटे-छोटे अमाउंट से पैसे ट्रांसफर करना शुरू किया ताकि पकड़ में न आएं.
सितंबर 2021 में विजय ने सबसे बड़ा गबन किया. आरोप है कि उन्होंने एयरपोर्ट की नई टर्मिनल बिल्डिंग के पहले चरण के इलेक्ट्रिकल वर्क के लिए 67.81 करोड़ रुपये की वास्तविक परिसंपत्ति दिखाने के एक दिन बाद ही रकम बढ़ाकर 189 करोड़ रुपये अपने खाते में ट्रांसफर कर लिए.
अगले दिन उन्होंने 189 करोड़ रुपये की 17 फर्जी परिसंपत्तियां और दिखाईं और वही रकम अपने निजी खाते में डलवा ली.
एएआई के अनुसार, विजय द्वारा हड़पे गए 232 करोड़ रुपये में से 43 करोड़ रुपये को उसने देहरादून एयरपोर्ट पर अपने कार्यकाल के दौरान अलग-अलग राजस्व खर्च मदों में समायोजित कर दिया.
शिकायत और सक्षम प्राधिकारी से अनुमति मिलने के बाद सीबीआई ने विजय के खिलाफ अज्ञात सरकारी कर्मचारियों और निजी व्यक्तियों के साथ मिलकर आईपीसी की धारा 120बी (आपराधिक साजिश), 409 (सरकारी कर्मचारी द्वारा आपराधिक विश्वासघात), 467 (बहुमूल्य सुरक्षा का जालसाजी), 468 (धोखाधड़ी के इरादे से जालसाजी), 471 (जाली दस्तावेज का असली बताकर इस्तेमाल), 477ए (खातों में गड़बड़ी) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की प्रासंगिक धाराओं में मामला दर्ज किया है.
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