नयी दिल्ली, 21 मार्च (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को कहा कि वह आम आदेश पारित करके उच्च न्यायालयों से यह नहीं कह सकता है कि वे सुनिश्चित करें कि विशेष सुनवाई अदालतें विशेष रूप से एमपी/एमएलए से जुड़े आपराधिक मामलों की सुनवाई करें और ऐसी सुनवाई पूरी करने से पहले अन्य मामलों पर सुनवाई ना करें।
प्रधान न्यायाधीश डी वाई. चन्द्रचूड़ और न्यायमूर्ति पी. एस. नरसिम्हा की पीठ ने ‘एमिकस क्यूरी’ व वरिष्ठ अधिवक्ता विजय हंसारिया की 17वीं रिपोर्ट पर सुनवाई करते हुए उक्त टिप्पणी की। हंसारिया एमपी/एमएलए के खिलाफ आपराधिक मामलों के निपटारे में तेजी लाने का अनुरोध करने वाली जनहित याचिका पर सुनवाई में अदालत की मदद कर रहे हैं।
पीठ ने कहा, ‘‘हम सभी उच्च न्यायालयों के लिए आम आदेश कैसे पारित कर सकते हैं? कुछ विशेष अदालतों में जनप्रतिनिधियों के खिलाफ लंबित मामलों की संख्या अन्य अदालतों के मुकाबले कम हो सकती हैं।’’
पीठ ने कहा कि जिला विशेष में ऐसे लंबित मामलों की रिपोर्ट मिलने पर तेजी से सुनवाई करने का आदेश पारित करने में आसानी होगी। पीठ ने कहा, ‘‘उच्च न्यायालयों (की रजिस्ट्री) को एमिकस क्यूरी की 17वीं रिपोर्ट में दिए गए सलाहों का अध्ययन करने दें और अदालत को स्थिति रिपोर्ट सौंपने दें।’’
वहीं, हंसारिया ने कहा कि वह सांसद (एमपी)/विधायक (एमएलए) के खिलाफ लंबे समय से लंबित मामलों की तेजी से सुनवाई और निपटारा सुनिश्चित करने के लिए दिशा-निर्देश चाहते हैं क्योंकि ऐसे नेताओं के खिलाफ 5,000 से ज्यादा मामले लंबित हैं।
भाषा अर्पणा आशीष
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