Saturday, 13 August, 2022
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‘2020 के केस में बुलाया और 2018 के ट्वीट के लिए किया अरेस्ट’-वकीलों ने ‘धोखा’ दिए जाने का आरोप लगाया

ऑल्ट न्यूज़ के सह-संस्थापक के वकील ने यह भी आरोप लगाया कि 2018 के इस ट्वीट पर इस साल 20 जून को प्राथमिकी दर्ज की गई थी, लेकिन उन्हें इसके बारे में एक सप्ताह तक सूचित नहीं किया गया था. साथ ही, उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें बदले की भावना के साथ' गिरफ्तार किया गया है

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नई दिल्ली: दिल्ली पुलिस विशेष प्रकोष्ठ (स्पेशल सेल) की साइबर इकाई द्वारा ऑल्ट न्यूज़ के सह-संस्थापक और फैक्ट चेकर (तथ्यों की जांच करने वाले) मोहम्मद जुबैर को साल 2020 के एक मामले के संबंध में शुक्रवार को नोटिस जारी किया गया था. जिसके बाद उन्हें सोमवार दोपहर लगभग 2 बजे पूछताछ के लिए बुलाया गया था.

मगर, दिल्ली पुलिस के सूत्रों के अनुसार पूछताछ के क्रम में हीं एक जांच अधिकारी ने उन्हें सीआरपीसी की धारा 41 ए के तहत दोपहर लगभग 3.20 बजे एक और नोटिस थमाया, जिसमें उन्हें साल 2018 के उनके एक अन्य ट्वीट से संबंधित एक अलग मामले की जांच में शामिल होने के लिए कहा गया था. इसके कुछ ही घंटों बाद उन्हें एक हिंदू पौराणिक व्यक्तित्व का जिक्र करते हुए 2018 में किए गए इस ट्वीट के माध्यम से धार्मिक भावनाओं को कथित तौर पर आहत करने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया था.

जुबैर के वकीलों ने आरोप लगाया है कि ज़ुबैर को गिरफ्तार करने के लिए उन्हें कुछ इसी तरह से ‘धोखा’ दिया गया.

दिप्रिंट ने ज़ुबैर के वकीलों के दावे पर टिप्पणी के लिए मोबाइल संदेशों के माध्यम से के.पी.एस. मल्होत्रा, पुलिस उपायुक्त (डीसीपी), विशेष प्रकोष्ठ की इंटेलिजेंस फ्यूजन एंड स्ट्रैटेजिक ऑपरेशंस (आईएफएसओ) इकाई से संपर्क किया, जिस पर उनकी प्रतिक्रिया की प्रतीक्षा की जा रही है.

2020 वाले मामले में, दिल्ली पुलिस ने राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) के अध्यक्ष प्रियांक कानूनगो द्वारा दायर एक शिकायत के आधार पर, प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रेन फ्रॉम सेक्षुयल ओफ्फेंसेस एक्ट, 2012 (पॉक्सो 2012) की धाराओं के तहत जुबैर पर आरोप लगाए हैं.

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कानूनगो की शिकायत 6 अगस्त 2020 को जुबैर द्वारा कथित रूप से पोस्ट किए गए एक ट्वीट से संबंधित थी, जिसमें एक नाबालिग लड़की की उसके पिता के साथ ऑनलाइन विवाद के दौरान ली गयी एक धुंधली सी तस्वीर थी. हालांकि, उसी साल सितंबर में दिल्ली हाई कोर्ट ने उस मामले में पुलिस को जुबैर के खिलाफ किसी तरह की कार्रवाई करने से रोक दिया था.

वर्तमान मामला, जिसके तहत उन्हें सोमवार को गिरफ्तार किया गया है, 2018 के एक ट्वीट से संबंधित है. पुलिस सूत्रों ने कहा कि शिकायतकर्ता, जो ट्विटर पर ‘हनुमान भक्त’ नाम से जाना जाता है, उसने इस साल 19 जून को एक ट्वीट में दिल्ली पुलिस को टैग किया और 20 जून को इस बारे में प्राथमिकी दर्ज की गई.

मंगलवार को एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने जुबैर की गिरफ्तारी की कड़ी निंदा की और उनकी तत्काल रिहाई की मांग की.

एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया 27 जून को दिल्ली पुलिस द्वारा तथ्यों की पड़ताल करने वाली वेब साइट ऑल्ट न्यूज़ के सह-संस्थापक मुहम्मद जुबैर की 2018 में किए गए एक ट्वीट के लिए की गई गिरफ्तारी की निंदा करता है. ईजीआई की मांग है कि दिल्ली पुलिस मुहम्मद जुबैर को तुरंत रिहा करे.

जुबैर, जिन्होंने पूर्व भाजपा प्रवक्ता नुपुर शर्मा द्वारा पैगंबर मुहम्मद पर की गई विवादास्पद टिप्पणी को उजागर किया था, ने इस महीने की शुरुआत में कुछ पुराने पोस्ट की वजह से विपरीत प्रतिकिया मिलने के बाद अपना फेसबुक अकाउंट निष्क्रिय कर दिया था.


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‘बदला लेने वाली है यह गिरफ्तारी’

जुबैर के क़ानूनी सलाहकार ने दावा किया है कि पुलिस ने उन्हें सोमवार को उनके सामने पेश होने के लिए ‘धोखा’ दिया और फिर उन्हें एक अलग मामले में बदला लेने की भावना के साथ गिरफ्तार कर लिया.

ज़ुबैर की दिल्ली स्थित वकील कवलप्रीत कौर ने दिप्रिंट को बताया. ‘उन्हें 2020 के उस मामले में पूछताछ के लिए बुलाया गया था, जहां उन्हें पहले से ही उच्च न्यायालय की तरफ से गिरफ्तारी से सुरक्षा प्राप्त है. वह मामला लंबित है और सुनवाई के अंतिम चरण में है. उन लोगों ने (पुलिस ने) उन्हें उस मामले के लिए बुलाया, लेकिन शाम 5 बजे के आसपास, उन्हें एक दूसरी प्राथमिकी के लिए नोटिस दिया गया, जिसके आधार पर बाद में उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया.’

कौर ने आगे कहा, ‘यह प्राथमिकी 20 जून को दर्ज की गई थी, लेकिन पिछले एक सप्ताह के दौरान जुबैर को इसके बारे में सूचित नहीं किया गया था. मंशा साफ है कि वे चाहते थे कि वह पुलिस कार्यालय आए और फिर उन्हें एक दूसरे मामले में बदले की भावना के साथ गिरफ्तार कर लिया गया. जुबैर ने पहले ही पुलिस को पत्र लिखकर कहा था कि उनके लिए सोमवार को पेश होना संभव नहीं होगा क्योंकि उनके ससुर की तबीयत ठीक नहीं है. मगर पुलिस ने जोर देकर कहा कि दूसरा व्यक्ति भी आ रहा है और यह बेहद संवेदनशील मामला है.’

यह कहते हुए कि जुबैर को गिरफ्तार करने के लिए ही यह पूरी साजिश रची गई थी, कौर ने बताया कि इसके बाद जुबैर को पूछताछ के लिए उनके सामने पेश होने की सलाह दी गई.

दिल्ली पुलिस के एक सूत्र के मुताबिक, जुबैर दोपहर करीब 2 बजे साइबर सेल यूनिट पहुंचे और इसके तुरंत बाद उनसे पूछताछ शुरू हुई. सूत्र ने बताया, ‘मगर, वर्तमान मामले में उन्हें नोटिस दिए जाने के बाद, वह जांच में सहयोग नहीं कर रहे थे. इसलिए उन्हें शाम करीब 5.45 बजे गिरफ्तार कर लिया गया.’

कौर ने यह भी दावा किया कि जुबैर को नोटिस दोपहर करीब तीन बजे नहीं दिया गया था. उन्होने दावा किया, ‘उन्हें शाम 5.30 बजे नोटिस दिया गया और इसके कुछ ही मिनट बाद गिरफ्तार कर लिया गया.’

सोमवार को, डीसीपी मल्होत्रा ने मीडियाकर्मियों से बातचीत में कहा था: ‘दिल्ली पुलिस ने एक ट्विटर हैंडल से शिकायत मिलने के बाद एक मामला दर्ज किया, जिसमें आरोप लगाया गया था कि मोहम्मद जुबैर ने एक विशेष धर्म के ‘ईश्वर’ का जानबूझकर अपमान करने के उद्देश्य से एक संदिग्ध तस्वीर ट्वीट की थी.’

डीसीपी ने आगे कहा कि जुबैर सहयोग नहीं कर रहे थे और जब उनसे पूछताछ की गई तो वे टाल-मटोल कर रहे थे.

ट्वीट और उसकी शिकायत

सवालों के घेरे में खड़े इस ट्वीट में कथित तौर पर ‘हनीमून होटल’ के बजाय ‘हनुमान होटल’ पढ़े जाने के लिए एक होटल के साइनबोर्ड को बदलने की तस्वीर को दिखाया गया है.

इसके बाद ‘हनुमान भक्त’ के नाम से बने एक ट्विटर हैंडल ने एक ट्वीट में दिल्ली पुलिस को टैग करते हुए कहा: ‘हमारे भगवान हनुमानजी को हनीमून से जोड़ना हिंदुओं का सीधा अपमान है, क्योंकि वह (हनुमानजी) ब्रह्मचारी हैं. कृपया कार्रवाई करें.’

इसके बाद, जुबैर पर आईपीसी की धारा 153ए (शत्रुता को बढ़ावा देना) और 295ए (धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के इरादे से जानबूझकर और दुर्भावनापूर्ण कृत्य) के तहत मामला दर्ज किया गया है.

ट्विटर हैंडल ‘हनुमान भक्त’, जिसके डिस्प्ले फोटो के रूप में हिंदू भगवान हनुमान की एक तस्वीर लगी है, के मंगलवार दोपहर तक 1,300 से अधिक फॉलोवर्स हो गए थे.

कुछ सोशल मीडिया यूजर्स ने आरोप लगाया है कि यह अकाउंट एक बॉट या ट्रोल अकाउंट है. इस अकाउंट की सत्यता के बारे में पूछे जाने पर, डीसीपी मल्होत्रा ने दिप्रिंट को बताया, ‘सवाल उस अकाउंट के बारे में नहीं है.’

क्या कहती है एफआईआर?

2020 के ट्वीट को लेकर जुबैर के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी – जिसे दिप्रिंट ने भी देखा है – के अनुसार शिकायत अरुण कुमार के नाम से किसी सब-इंस्पेक्टर द्वारा दर्ज की गई थी.

प्राथमिकी में लिखा गया है, ‘आज, मैं दिल्ली पुलिस की इफसो इकाई, द्वारका में एक आपातकालीन अधिकारी के रूप में मौजूद था, और सोशल मीडिया की निगरानी के दौरान मुझे यह पता चला कि एक ट्विटर हैंडल हनुमान भक्त ने मोहम्मद जुबैर (@zoo_bear) के नाम से एक अन्य ट्विटर हैंडल के खिलाफ एक ट्वीट साझा की है, जिसमें मोहम्मद जुबैर ने ट्वीट किया है – ‘2014 से पहले: हनीमून होटल, 2014 के बाद: हनुमान होटल’, और साथ ही एक होटल के साइन बोर्ड की तस्वीर भी दिखाई है, जिसमें ‘हनीमून होटल’ को ‘हनुमान होटल’ में बदल दिया गया है.’

इसमें लिखा गया है, ‘मोहम्मद जुबैर (zoo_bear) द्वारा एक विशेष धार्मिक समुदाय के खिलाफ इस्तेमाल किए जाने वाले ये शब्द और तस्वीर उस समुदाय के लिए बेहद उत्तेजक और लोगों के बीच नफरत की भावनाओं को भड़काने के लिए पर्याप्त से अधिक है, जो समाज में सार्वजनिक शांति बनाए रखने के लिए हानिकारक हो सकता है.’

शिकायत में आगे लिखा गया है, ‘ऐसी पोस्टों का प्रसारण और प्रकाशन जानबूझकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के माध्यम से किया गया है, जो एक समुदाय विशेष की धार्मिक भावनाओं का अपमान करने और शांति भंग करने के इरादे से किया गया है तथा यह धारा 153-ए और 295 के तहत अपराध माना जाता है. मोहम्मद जुबैर (zoo_bear) के ट्विटर हैंडल से पोस्ट की गई सामग्री से धारा 153-ए और धारा 295 का मामला बनता है.’

शिकायतकर्ता ने आगे कहा कि प्राथमिकी की ‘प्रकृति काफ़ी संवेदनशील’ है.

‘आमने-सामने की पूछताछ के लिए बुलाया गया था’

एक पुलिस सूत्र ने कहा कि ज़ुबैर को 2020 के मामले में लखनऊ के एक अन्य व्यक्ति के साथ जांच के लिए बुलाया गया था, लेकिन दूसरा शख़्श आया ही नहीं.

सूत्र ने आगे कहा, ‘हमने उन दोनों को आमने-सामने की पूछताछ द्वारा यह जानने के लिए बुलाया था, कि क्या जुबैर और यह दूसरा व्यक्ति एक-दूसरे को व्यक्तिगत रूप से जानते हैं, क्योंकि जुबैर के ट्वीट के बाद, बाद वाले शख़्श ने कई ट्वीट किए गए और इस दूसरे व्यक्ति के ट्वीट ने लोगों का बहुत अधिक ध्यान आकर्षित किया था.’

एक अन्य पुलिस सूत्र ने दिप्रिंट को बताया, ‘जुबैर को पहले-पहल 2020 के मामले में पूछताछ के लिए बुलाया गया था. जांच के दौरान दिल्ली पुलिस ने स्टेटस रिपोर्ट दी थी और उनका ट्वीट आपत्तिजनक नहीं पाया गया था. हालांकि, इस ट्वीट के बाद के ट्वीट्स के कारण कई संदिग्ध और अपमानजनक ट्वीट्स हुए. उससे पहले 2020 के मामले की जांच में पूछताछ की गई थी और वह जांच पूरी होने के कगार पर है.’

(इस खबर को अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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