मुंबई: मुंबई के बांद्रा ईस्ट रेलवे स्टेशन के पास स्थित घनी झुग्गी बस्ती गरीब नगर में पश्चिम रेलवे की बड़े स्तर की तोड़फोड़ कार्रवाई के बाद झड़पें, पत्थरबाजी और पुलिस की ज्यादती के आरोप लगे. यह सब तब हुआ जब अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के तहत दो दशकों पुरानी मस्जिदों को गिरा दिया गया.
गरीब नगर में हुई यह तोड़फोड़, जो मुंबई की सबसे पुरानी और प्रमुख झुग्गी बस्तियों में से एक है और महंगी जमीन पर बसी हुई है, रेलवे जमीन को लेकर लगभग एक दशक से चल रही कानूनी और प्रशासनिक लड़ाई का नतीजा है. यह मामला बांद्रा ईस्ट स्टेशन के पास रेलवे की जमीन से जुड़ा है और मुंबई की प्रस्तावित छठी उपनगरीय रेलवे लाइन जैसी बुनियादी ढांचा योजनाओं से भी जुड़ा हुआ है.
मंगलवार से शुरू हुई यह पांच दिन की तोड़फोड़ कार्रवाई, जिसके दूसरे दिन 1,200 से ज्यादा कर्मचारियों की तैनाती की गई, 29 अप्रैल के बॉम्बे हाई कोर्ट के आदेश के बाद की जा रही है. अदालत ने 2021 के सर्वे में पहचानी गई 100 सुरक्षित संरचनाओं को छोड़कर रेलवे जमीन पर बनी झुग्गियों को हटाने की अनुमति दी थी.
जहां रेलवे अधिकारी कह रहे हैं कि यह कार्रवाई अदालत के आदेश और रेल सुरक्षा के हित में की जा रही है, वहीं निवासी कहते हैं कि सैकड़ों गरीब परिवार, जो कई दशकों से यहाँ रह रहे हैं, उन्हें बिना सही पुनर्वास और बहुत कम समय देकर हटाया जा रहा है.

पश्चिम रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी विनीत अभिषेक ने दिप्रिंट से कहा, “हम यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि हमारी कार्रवाई में मानवीय पहलू मजबूत रहे. हम यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि किसी भी व्यक्ति को नुकसान न पहुंचे. तोड़फोड़ के दौरान किसी के घायल होने की एक भी घटना नहीं हुई है.”

“यह इलाका और यह मुद्दा बहुत संवेदनशील है, इसलिए हाई कोर्ट को फैसला देने में नौ साल लगे, क्योंकि उसने सभी पक्षों को सुना. 29 अप्रैल के फैसले में हमारे लिए साफ निर्देश हैं. 100 झुग्गियों को छोड़कर बाकी सभी ढांचों को हटाना है. पहले दिन यानी मंगलवार को हमने 20 प्रतिशत काम पूरा किया, जबकि आज यानी बुधवार को 60 प्रतिशत काम पूरा कर लिया. फैसले में कहा गया था कि आदेश के सात दिन के भीतर हमें उचित कार्रवाई करनी है.”
अभिषेक ने आगे कहा, “तोड़फोड़ के बाद खाली हुई जमीन बांद्रा इंटीग्रेटेड रेलवे कॉम्प्लेक्स का हिस्सा बनेगी. इस नई खाली हुई जमीन से बांद्रा रेलवे स्टेशन का विस्तार होगा और नई पटरियों पर 12 अतिरिक्त ट्रेनें चलाई जा सकेंगी.”
“इतने बड़े स्तर के अतिक्रमण शहर को बंधक नहीं बना सकते.”
अदालत के आदेश पर हुई तोड़फोड़
यह तोड़फोड़ कार्रवाई 2017 में रेलवे द्वारा गरीब नगर रहवासी संघ और एकता वेलफेयर सोसाइटी के खिलाफ शुरू की गई बेदखली प्रक्रिया से जुड़ी है. यह संगठन वहाँ रहने वाले लोगों का प्रतिनिधित्व करता है.
27 नवंबर 2017 को बेदखली आदेश जारी किया गया था, जिसे बॉम्बे हाई कोर्ट में याचिका दायर कर चुनौती दी गई. अदालत ने 15 दिसंबर 2017 को रोक लगा दी थी, जिसके बाद कई सालों तक मामले में ज्यादा हलचल नहीं हुई.
यह मामला अगस्त 2021 में फिर सामने आया, जब प्रस्तावित छठी रेलवे लाइन के लिए SPARC, MMRDA, MRVC और रेलवे अधिकारियों द्वारा संयुक्त सर्वे किया गया. इस सर्वे में रेलवे के “सुरक्षा क्षेत्र” के अंदर 140 झुग्गियाँ और बाहर 58 झुग्गियां पाई गईं.
रेलवे ने इस साल 17 मार्च को फिर कार्रवाई शुरू की. सुरक्षा क्षेत्र को घेर दिया गया और 35 हल्के अतिक्रमण हटाए गए. इसके बाद निवासियों के समूहों ने नई याचिकाएं दायर कीं, लेकिन 29 अप्रैल को हाई कोर्ट ने गरीब नगर रहवासी संघ और एकता वेलफेयर सोसाइटी दोनों से जुड़ी संरचनाओं को गिराने की अनुमति दे दी, जबकि 100 झुग्गियों को सुरक्षा दी गई.
गरीब नगर रहवासी संघ द्वारा 359 झुग्गियों का नया सर्वे कराने की मांग वाली दोबारा याचिका को बॉम्बे हाई कोर्ट ने 15 मई को खारिज कर दिया. अलग से, एकता वेलफेयर सोसाइटी की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने भी 6 मई को 29 अप्रैल के हाई कोर्ट के आदेश को सही ठहराया.
इसके बाद अधिकारियों ने 19 मई से पांच दिन की तोड़फोड़ कार्रवाई शुरू कर दी.

तोड़फोड़ के पहले दिन लगभग 1,000 कर्मचारियों की तैनाती की गई थी. इनमें 400 शहर पुलिसकर्मी, 200 रेलवे सुरक्षा बल (RPF) कर्मचारी, 200 सरकारी रेलवे पुलिस (GRP) कर्मचारी और रेलवे स्टाफ शामिल था. मशीनों में चार बुलडोजर, एक पोकलेन मशीन और डंपर शामिल थे.
दूसरे दिन यह तैनाती बढ़ाकर 1,200 से ज्यादा कर्मचारियों तक कर दी गई. इसमें 500 शहर पुलिसकर्मी, 250 RPF कर्मचारी, 200 GRP कर्मचारी और अतिरिक्त रेलवे स्टाफ शामिल था. सात बुलडोजर, छह पोकलेन मशीनें और पाँच डंपर लगाए गए.
दूसरे दिन बढ़ा तनाव
बुधवार दोपहर स्थिति और बिगड़ गई जब अधिकारियों ने ‘फैसाने मुस्तफा गरीब नवाज’ मस्जिद, जिसे स्थानीय लोग 70-80 साल पुरानी बताते हैं, और ‘मस्जिद-ए-इनाम’ को गिरा दिया. इसके बाद स्थानीय लोगों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया. अधिकारियों ने कहा कि ये ढांचे रेलवे की जमीन पर बने थे और कथित रूप से अवैध भी थे.
बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) द्वारा जारी नागरिक अस्पताल के रिकॉर्ड के अनुसार, गरीब नवाज मस्जिद को गिराए जाने के दौरान हुई पत्थरबाजी में पुलिसकर्मियों और प्रदर्शनकारियों समेत कम से कम 10 लोग घायल हुए. इससे पहले दिन में मस्जिद-ए-इनाम को गिराए जाने के विरोध में स्थानीय लोगों ने प्रदर्शन किया था, जिसके बाद पुलिस ने लाठीचार्ज किया.

बांद्रा के भाभा अस्पताल की रिपोर्ट के अनुसार, “पश्चिम रेलवे की अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान भीड़ द्वारा की गई पत्थरबाजी में तीन प्रदर्शनकारी और तीन पुलिसकर्मी घायल हुए.” चार अन्य घायल पुलिसकर्मियों का इलाज वी.एन. देसाई अस्पताल में किया गया.
BMC द्वारा जारी अस्पताल रिकॉर्ड के अनुसार, घायल प्रदर्शनकारियों में 22 वर्षीय फिजान अनवज खान, 17 वर्षीय ए. राशिद खान और 49 वर्षीय अंसार अली बेग शामिल हैं. उनकी हालत स्थिर बताई गई और वे अस्पताल में भर्ती रहे.
पत्थरबाजी पास के बेहराम पाड़ा इलाके से शुरू हुई, जहां गरीब नगर के कुछ निवासी तनाव के दौरान चले गए थे. हालांकि, स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि पुलिसकर्मियों ने जवाब में पत्थर फेंके और जरूरत से ज्यादा बल का इस्तेमाल किया.
अतिरिक्त पुलिस आयुक्त (पश्चिम क्षेत्र) अभिनव देशमुख ने मंगलवार शाम मीडिया से कहा, “हाई कोर्ट के आदेश के अनुसार निर्मल नगर पुलिस स्टेशन क्षेत्र के तहत बांद्रा ईस्ट के गरीब नगर में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की जा रही है. इस दौरान कुछ असामाजिक तत्वों ने पत्थरबाजी कर तोड़फोड़ टीम के काम में बाधा डालने की कोशिश की.”
उन्होंने कहा, “मुंबई पुलिस ने उपद्रवियों को हटाने के लिए उचित बल का इस्तेमाल किया. सात आरोपियों को हिरासत में लिया गया है और एफआईआर दर्ज करने की प्रक्रिया चल रही है. इसमें शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी. तीन लोगों को मामूली चोटें आईं, जिनमें दो RPF कर्मचारी और एक मुंबई पुलिस कांस्टेबल शामिल हैं.”
‘हमने अपनी जिंदगी यहां बनाई थी’
कई लोगों के लिए यह तोड़फोड़ उन जिंदगियों के अचानक टूटने जैसा था, जो उन्होंने दशकों में बनाई थीं.
45 वर्षीय आसिया बानो, जो 1990 में बेंगलुरु से मुंबई आई थीं, अपने पति और चार बच्चों के साथ रहने वाली तीन मंजिला झुग्गी को अधिकारियों द्वारा गिराए जाते देखती रहीं. वह अपने परिवार के साथ मस्जिद-ए-इनाम के पास बनी झुग्गी में रहती थीं, जिसे मंगलवार को सबसे पहले गिराया गया था.

उन्होंने दिप्रिंट से कहा, “मैं बहुत छोटी थी जब अपने माता-पिता के साथ यहां आई थी. मैंने यहां लगभग 40 साल बिताए हैं. यही मेरा एकमात्र घर था. हमने सालों में धीरे-धीरे हर मंजिल बनाई थी.” वह रेलवे पुल के नीचे टूटी कंक्रीट और मुड़े हुए लोहे के बीच बैठी थीं.
35 वर्षीय नाजनीन अंसारी, जिनके पति वसीम फर्नीचर मजदूर हैं, ने कहा कि परिवारों को पुनर्वास या आगे कहां जाना है, इस बारे में बहुत कम जानकारी दी गई थी.

नाजनीन, जो दिव्यांग हैं, ने कहा कि उनके पति को अकेले ही सामान हटाने का काम संभालना पड़ा. उन्होंने कहा, “हमारे पास जाने के लिए कोई दूसरी जगह नहीं है. शहर में कोई परिवार भी नहीं है. हमें अपना घर छोड़कर सामने वाली सड़क पर रहना पड़ा. अब हमें समझ नहीं आ रहा कि कहां जाएं.”
28 वर्षीय आफताब रफीक शेख, जो कुरियर डिलीवरी का काम करते हैं, के लिए हिंसा ने उनकी परेशानी और बढ़ा दी. उन्होंने आरोप लगाया कि पत्थरबाजी के बाद पुलिस की जवाबी कार्रवाई में उनकी बहन रफिया घायल हो गई. उनके परिवार में पिता, दो बहनें अनाम और सबा, और माँ यास्मीन भी इस कार्रवाई से प्रभावित हुए हैं.

उन्होंने कहा, “उन्होंने हमें मस्जिदों के बारे में कभी नहीं बताया. हमें घर खाली करने को कहा गया था लेकिन कहा गया था कि मस्जिदें नहीं गिरेंगी. इसी वजह से इतना हंगामा हुआ. हालांकि हम पत्थरबाजी में शामिल नहीं थे, लेकिन मेरी बहन रफिया तब घायल हो गई जब पुलिस ने जवाब में पत्थर फेंकने शुरू किए. उसके सिर में चोट लगी. उन्होंने कुछ दर्द की दवा दी है, लेकिन इस तरह पत्थर फेंकना सही नहीं है.”
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
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