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Thursday, 5 March, 2026
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बजट जनिवरोधी, आम लोगों के हितों की अनदेखी हुई: वाम दल

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नयी दिल्ली, एक फरवरी (भाषा) वामपंथी दलों ने रविवार को पेश केंद्रीय बजट को “जन-विरोधी और संघीय ढांचे के खिलाफ” करार दिया। उन्होंने कहा कि कि केंद्र सरकार आम लोगों की कीमत पर पूंजीपतियों के हितों को बढ़ावा दे रही है।

मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने एक बयान में कहा कि 2025-26 के बजट अनुमानों की तुलना में कई केंद्रीय और केंद्र-प्रायोजित योजनाओं में खर्च में भारी कटौती की गई है।

पार्टी ने कहा, ‘‘राष्ट्रीय कृषि विकास योजना, पीएम पोषण, प्रधानमंत्री स्कूल्स फॉर राइजिंग इंडिया (पीएम-श्री), प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (पीएम-जेएवाई), प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (पीएम-एमएसवाई), प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण और शहरी) और फसल बीमा योजना के बजट में कटौती की गई है। वहीं, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और पूर्वोत्तर क्षेत्रों के कल्याण के लिए आवंटन में भी कमी की गई है।’’

उसने दावा किया कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की ओर से संसद में पेश किया गया नौवां बजट इस बात की गवाही है कि मोदी सरकार कुछ बड़े कारोबारी घरानों और अमीर वर्ग के संकीर्ण हितों को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है, जबकि इसका बोझ मेहनतकश लोगों और सामाजिक रूप से वंचित वर्गों तथा व्यापक राष्ट्रीय आर्थिक हितों पर डाला जा रहा है।

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) के सांसद पी संदोष कुमार ने कहा कि बजट भाषण “लोगों की कठिनाइयों से मुंह मोड़ने और शक्ति एवं संसाधनों को कुछ हाथों में केंद्रित करने का सूचक है।”

कुमार ने एक बयान में कहा, ‘‘यह बजट ऐसे समय में आया है, जब आम लोग गिरती वास्तविक आय, बढ़ती बेरोजगारी और आर्थिक अनिश्चितता से जूझ रहे हैं। फिर भी मांग को पुनर्जीवित करने या जहां सबसे ज्यादा जरूरत है, वहां सार्वजनिक खर्च बढ़ाने का कोई गंभीर प्रयास नहीं किया गया है।”

भाकपा नेता ने कहा कि सार्वजनिक स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार सृजन के लिए आवंटन में कमी की गई है।

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) लिबरेशन ने दावा किया कि बजट 2026-27 कृषि एवं किसानों, मजदूरों, युवाओं और महिलाओं की लगातार उपेक्षा को रेखांकित करता है।

पार्टी ने एक बयान में कहा, ‘‘आबादी का बड़ा हिस्सा बढ़ती असमानता के बीच एक अत्यधिक तनावपूर्ण आर्थिक माहौल में रहने को मजबूर है, जहां कम आय, उच्च बेरोजगारी और सम्मानजनक जीवनयापन की लगातार बढ़ती लागत लोगों को परेशान कर रही है। ऐसे में कम से कम यह उम्मीद थी कि लंबे समय से ठहरी हुई आमदनी को बढ़ावा देने के लिए कुछ घोषणाएं की जाएंगी, लेकिन यह बजट इस मोर्चे पर पूरी तरह से असफल साबित होता है।’’

ऑल इंडिया फॉरवर्ड ब्लॉक ने एक बयान में बजट को “जनता के साथ विश्वासघात” करार दिया।

भाषा

हक

हक पारुल

पारुल

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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