मुंबई, 20 अप्रैल (भाषा) मुंबई उच्च न्यायालय ने 2023 में कथित तौर पर दहेज उत्पीड़न के कारण एक महिला की मौत की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को सौंप दिया और पुलिस जांच में पाई गई गंभीर विसंगतियों का जिक्र किया।
न्यायमूर्ति सारंग कोटवाल और न्यायमूर्ति संदेश पाटिल की पीठ ने पीड़िता के पिता द्वारा दायर एक याचिका पर यह आदेश दिया, जिसमें उन्होंने ठाणे जिले की काशीमीरा पुलिस द्वारा जांच में की जा रही ‘लापरवाही’ को लेकर चिंता जताई थी।
अदालत ने अपने 16 अप्रैल के आदेश में कहा कि पुलिस जांच और आरोप-पत्र में कई विसंगतियां थीं।
इसमें कहा गया कि जांच में पाई गई विसंगतियां काफी गंभीर हैं और ‘निष्पक्ष और प्रभावी जांच’ के लिए इस मामले को सीबीआई को सौंपे जाने की आवश्यकता है।
पीड़िता के पिता ने फरवरी 2023 में काशीमीरा थाने में भारतीय दंड संहिता और दहेज निषेध अधिनियम के संबंधित प्रावधानों के तहत उसके पति और ससुराल वालों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी।
याचिका के अनुसार, पीड़िता ने नवंबर 2021 में शादी की थी और मई 2022 से अपने पति तथा ससुराल वालों के साथ रहने लगी थी।
हालांकि, उसके पिता को जल्द ही पता चला कि उनकी बेटी को दहेज के लिए प्रताड़ित किया जा रहा है और कई मौकों पर उसके साथ मारपीट भी की गई, जिसके परिणामस्वरूप उसका गर्भपात हो गया।
याचिकाकर्ता को 23 फरवरी 2023 को सूचित किया गया कि उनकी बेटी ने आत्महत्या कर ली है। उसके शरीर पर चोट के निशान पाए जाने के बाद पिता ने पुलिस से संपर्क किया।
याचिकाकर्ता ने दावा किया कि पुलिस ने अनमने तरीके से प्राथमिकी दर्ज की और आरोपी के खिलाफ हत्या का मामला भी दर्ज नहीं किया।
उन्होंने यह भी कहा कि उनका दामाद फरार हो गया जबकि परिवार के सदस्यों को गिरफ्तार कर लिया गया और बाद में जमानत पर रिहा कर दिया गया।
अदालत ने काशीमीरा थाने को निर्देश दिया कि वह जांच से जुड़े सभी दस्तावेज तत्काल सीबीआई को सौंप दे और कहा कि केंद्रीय एजेंसी इस जांच को कुशलतापूर्वक पूरा करेगी।
भाषा
शुभम अविनाश
अविनाश
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