कोच्चि, एक दिसंबर (भाषा) बेंगलुरु निवासी सूरज लामा (59) का शव यहां एचएमटी परिसर के पास एक जंगली क्षेत्र में पाए जाने के बाद उनके बेटे सैंटन ने सोमवार को आरोप लगाया कि उनके पिता की मृत्यु एर्नाकुलम सरकारी मेडिकल कॉलेज के अधिकारियों की लापरवाही के कारण हुई है।
सैंटन ने पत्रकारों से कहा कि यदि अस्पताल ने उनके पिता को छुट्टी न दी होती तो उनकी मौत नहीं हुई होती। वह स्मृति लोप की समस्या से पीड़ित थे।
कुवैत में रेस्तरां संचालित करने वाले लामा को कथित तौर पर मेथनॉल विषाक्तता के बाद याददाश्त संबंधी समस्या हुई थी और उन्हें अक्टूबर की शुरुआत में वहां से निर्वासित कर दिया गया था।
वह पांच अक्टूबर को कोच्चि हवाई अड्डे पर पहुंचे और कलामसेरी स्थित एर्नाकुलम मेडिकल कॉलेज में भर्ती हुए।
हालांकि, 10 अक्टूबर को अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद वह लापता हो गए थे।
सैंटन ने केरल उच्च न्यायालय में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की थी। अदालत ने पुलिस को लापता सूरज लामा का पता लगाने के लिए एक विशेष जांच दल गठित करने का निर्देश दिया था।
सैंटन ने अस्पताल पर गैर-जिम्मेदाराना तरीके से उनके पिता को छुट्टी देने का आरोप लगाया।
उन्होंने सवाल किया, ‘मेरे पास कुवैत सरकार का एक मेडिकल प्रमाणपत्र है जिसमें लिखा है कि मेरे पिता मानसिक रूप अस्वस्थ हैं। अस्पताल कैसे कह सकता है कि उन्होंने छुट्टी मांगी थी? अस्पताल ने उन्हें उस हालत में कैसे जाने दिया?’
उन्होंने बताया कि शव को आगे की औपचारिकताओं के लिए उसी मेडिकल कॉलेज ले जाया गया है।
सैंटन ने कहा कि वह डीएनए पुष्टि का इंतजार करेंगे और उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर मामले को दूसरी जगह स्थानांतरित करने की मांग करेंगे।
भाषा सुमित नरेश संतोष
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