Thursday, 8 December, 2022
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BJP ने बंगाल उपचुनाव में बांग्लादेश, कश्मीर, तालिबान का मुद्दा उछाला, TMC बोली- साम्प्रदायिकता काम न आएगी

पश्चिम बंगाल के चार निर्वाचन क्षेत्रों - नदिया जिले का शांतिपुर, कूचबिहार जिले का दिनहाटा, उत्तर 24 परगना के खरदह और दक्षिण 24 परगना के गोसाबा में 30 अक्टूबर को मतदान होगा.

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कोलकाता: पश्चिम बंगाल की चार विधानसभा सीटों के लिए होने जा रहे उपचुनाव, जिसमें दो निर्वाचन क्षेत्र भारत-बांग्लादेश अंतरराष्ट्रीय सीमा के 20 किलोमीटर के दायरे में स्थित हैं, के दौरान तमाम मुद्दे उछल रहे हैं—इसमें अफगानिस्तान पर तालिबान का कब्जा, कश्मीर में हिंदुओं को निशाना बनाकर आतंकी हमले और हाल में दुर्गा पूजा समारोहों के दौरान बांग्लादेश में सांप्रदायिक हिंसा की घटनाएं आदि शामिल हैं.

भाजपा का चुनावी अभियान जहां हिंदुओं की भावनाओं पर केंद्रित रहा है और वह उसी को भुनाने की कोशिश में जुटी है, वहीं तृणमूल ने राष्ट्रीय पार्टी की इस तरह की कोशिशों की कड़ी आलोचना की है.

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बांग्लादेश में कथित तौर पर हिंदुओं को निशाना बनाए जाने की घटनाओं पर अब तक चुप्पी साध रखी है. इस बीच, भाजपा की बंगाल इकाई ने उपचुनाव में इसे अपना मुख्य चुनावी मुद्दा बना लिया है और जिलों में विरोध मार्च और सड़कों पर प्रदर्शन शुरू कर दिए हैं.

पश्चिम बंगाल के चार निर्वाचन क्षेत्रों—नादिया जिले के शांतिपुर, कूचबिहार जिले के दिनहाटा, नार्थ 24 परगना के खरदहा और साउथ 24 परगना के गोसाबा में 30 अक्टूबर को मतदान होना है.

शांतिपुर और दिनहाटा दोनों क्षेत्र भारत-बांग्लादेश सीमा के 10 से 20 किमी के दायरे में स्थित हैं, दूसरी तरफ बांग्लादेश के रंगपुर और राजशाही जिले इससे लगे हुए हैं. ये बांग्लादेश के वही जिले हैं जहां से दुर्गा पूजा उत्सव के बाद कथित तौर पर सांप्रदायिक हिंसा की घटनाएं सामने आई हैं. नॉर्थ और साउथ 24 परगना जिलों के हिस्से भी बांग्लादेश के साथ सीमा साझा करते हैं, लेकिन खरदा अंतरराष्ट्रीय सीमा क्षेत्र से काफी दूर है, जबकि गोसाबा और बांग्लादेश के बीच सीमा के साथ एक नदी बहती है.

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भाजपा ने जॉय साहा (खरदाहा), पलाश राहा (गोसाबा), निरंजन विश्वास (शांतिपुर) और अशोक मंडल (दिनहाटा) को अपना उम्मीदवार बनाया है, जबकि तृणमूल ने पूर्व विधायक उदयन गुहा (दिनहाटा), राज्य के कृषि मंत्री सोवनदेव चटर्जी (खरदाहा), ब्रज किशोर गोस्वामी (शांतिपुर) और सुब्रत मंडल (गोसाबा) को अपना उम्मीदवार बनाया है.


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‘हिंदू उत्थान’ का आह्वान बनाम ‘सांप्रदायीकरण’ का आरोप

बंगाल भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने दिप्रिंट को बताया कि भाजपा ने इन चारों निर्वाचन क्षेत्रों में डोर-टू-डोर कैंपेन शुरू किया है जिसमें लोगों को कश्मीर और बांग्लादेश में हिंदुओं को निशाना बनाए जाने की घटनाओं का हवाला देते हुए बताया जा रहा है कि कैसे चरमपंथी हिंदुओं की हत्या कर रहे हैं और उनके घरों और मंदिरों में तोड़-फोड़ कर रहे हैं. भाजपा नेता ने दावा किया कि ‘अगर हिंदू जागरूक नहीं हुए तो बंगाल भी इसी तरह की हिंसा का शिकार होगा.’

बांग्लादेश की सीमा से लगी राणाघाट लोकसभा सीट से भाजपा सांसद जगन्नाथ सरकार ने कहा, ‘अफगानिस्तान पर तालिबान के कब्जे के बाद चरमपंथी तत्वों का हौंसला बढ़ा है और हर संवेदनशील क्षेत्र में वह अपनी गतिविधियां बढ़ा रहे हैं.’

उन्होंने कहा, ‘वे कश्मीर में, और हमारे पड़ोसी देश बांग्लादेश में हिंदुओं को मार रहे हैं. ऐसा मत सोचो कि वे बंगाल में चुप हैं. हम जानते हैं कि वे यहां कितने सक्रिय हैं. सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस अपनी वोटबैंक की राजनीतिक के लिए ऐसे तत्वों को संरक्षण दे रही है.’

जगन्नाथ सरकार ने इस साल के शुरू में पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दौरान शांतिपुर विधानसभा सीट पर 16,000 मतों से जीत हासिल की थी लेकिन बतौर सांसद अपनी सीट बनाए रखने के लिए उन्होंने इसे छोड़ दिया.

उन्होंने कहा, ‘हमने अपने कार्यकर्ताओं से कहा है कि तालिबान समर्थक चरमपंथी ताकतों की तरफ से कश्मीर और बांग्लादेश में जारी हिंसा का पूरा ब्यौरा हर मतदाता तक पहुंचाएं. अगर बंगाली हिंदू ऐसे तत्वों के खिलाफ खड़े नहीं हुए तो बंगाल भी बच नहीं पाएगा. यहां सत्ताधारी पार्टी तो केवल अपना वोट-बैंक (मुसलमान) देखती है.’

इस बीच, तृणमूल कांग्रेस नेताओं ने भाजपा नेताओं के इस तरह के विरोध प्रदर्शनों और बयानों को बंगाल में स्थिति को ‘सांप्रदायिक’ मोड़ देने की कोशिश करार दिया है.

बांग्लादेश सीमा से लगे नार्थ 24 परगना जिले की दम दम सीट से तृणमूल के सांसद सौगत रॉय ने दिप्रिंट से कहा, ‘भाजपा बंगाल में माहौल को सांप्रदायिक बनाने की कोशिश कर रही है. वे लोगों के बीच मतभेद बढ़ाकर मुश्किलें खड़ी करने की कोशिश कर रहे हैं और यही उनकी राजनीति है. वे खासकर बंगाल के सीमावर्ती जिलों में सांप्रदायिक तनाव भड़काने की कोशिश कर रहे हैं.’

सोशल मीडिया अभियान के हिस्से के तौर पर भाजपा ने राज्य में दुर्गा पूजा उत्सव के दौरान और उसके बाद पूर्वी मिदनापुर और नादिया जिलों में तनातनी की कथित घटनाओं के वीडियो और तस्वीरों का भी इस्तेमाल किया है.

पश्चिम बंगाल पुलिस के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने दिप्रिंट को बताया, ‘ऐसी भड़काऊ पोस्ट के खिलाफ कार्रवाई की गई है. हम सोशल मीडिया और लोकल ग्रुप पर कड़ी नजर रखे हुए हैं.’

दिनहाटा में तृणमूल के उम्मीदवार और पूर्व विधायक उदयन गुहा ने कहा, ‘हम जानते हैं कि वे हिंसा भड़काने की कोशिश कर रहे हैं. लेकिन अब लोग भी जानते हैं कि बंगाल के हिंदू और मुसलमान अब इस तरह के हिंसक विचारों से प्रभावित नहीं होते हैं.

उन्होंने कहा, ‘हम कभी भी कहीं भी हिंसा को प्रोत्साहित नहीं करते हैं—बात चाहे पाकिस्तान, अफगानिस्तान, बांग्लादेश की हो या हमारे कश्मीर की. हम भाजपा शासित राज्यों में भी हिंसा की निंदा करते हैं. हिंदू-मुस्लिम दंगे जैसी स्थिति उत्पन्न करने की भाजपा की इच्छा कभी पूरी नहीं होगी. हम सभी को ममता बनर्जी पर भरोसा है. उनमें एकजुट रखने की ताकत है.’

बांग्लादेश पर ममता की चुप्पी को लेकर भाजपा ने कसा तंज

हालांकि, बांग्लादेश में कथित हिंसा की घटनाओं पर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री की चुप्पी ने भाजपा को राज्य में मुस्लिम अल्पसंख्यक वोट-बैंक को कथित तौर पर लुभाने को लेकर तृणमूल कांग्रेस पर निशाना साधने का एक और मौका दे दिया है.

भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और सांसद दिलीप घोष ने भी इस मुद्दे पर ममता बनर्जी की चुप्पी पर सवाल उठाया है.

उन्होंने सवाल उठाया, ‘क्या हिंदू बंगालियों के खिलाफ इस तरह की क्रूर हिंसा के खिलाफ ममता बनर्जी या उनके सहयोगियों की तरफ से कोई निंदा की गई है? बांग्लादेश में निशाना बनाए गए हिंदू भी बंगाली हैं, वे कुछ साल पहले तक हमारा ही हिस्सा थे. हममें से कई लोगों के घर, रिश्तेदार और दोस्त वहां हैं. क्या यह हिंसा हमें आहत नहीं करती है?’

घोष ने कहा, ‘ममता बनर्जी तो शेख हसीना जी के साथ दोस्ती का दावा करती हैं. वह उन्हें उपहार और शुभकामनाएं भेजती हैं. क्या उन्होंने एक बार भी उनसे बंगाली हिंदुओं को सुरक्षा मुहैया कराने पर कोई बात की? हमें हसीना जी पर भरोसा है, हम जानते हैं कि वह वहां हमारे भाइयों और बहनों की रक्षा करेंगी. पांच-छह साल पहले ऐसी ही हिंसा के दौरान उन्होंने 8,000 से अधिक लोगों को गिरफ्तार कराया था. लेकिन हमारे राजनेताओं को ये बताने की जरूरत है. हमारे प्रधानमंत्री पहले ही प्रयास कर चुके हैं. बंगाल की मुख्यमंत्री क्या कर रही हैं? वह एक शब्द भी नहीं कहेंगी, क्योंकि इससे उनके वोट-बैंक को नुकसान हो सकता है.’

तृणमूल नेताओं ने बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों के खिलाफ कथित हिंसा के मुद्दे पर मुख्यमंत्री की चुप्पी के बारे में स्पष्ट करते हुए कहा कि इसमें उनकी कोई भूमिका नहीं है क्योंकि—भारत की तरफ से राजनयिक वार्ता के तौर पर—हिंसा रोकने के लिए बांग्लादेश सरकार पर दबाव डालना ‘प्रधानमंत्री मोदी की जिम्मेदारी’ थी.

टीएमसी सांसद सौगत रॉय ने कहा, ‘ममता बनर्जी की इसमें कोई भूमिका नहीं है. वह एक मुख्यमंत्री हैं. यह प्रधानमंत्री का काम है. उन्हें वहां हिंदुओं की रक्षा के लिए बांग्लादेशी सरकार पर दबाव बनाना चाहिए.’

(इस ख़बर को अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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