पटना/नयी दिल्ली, 17 अगस्त (भाषा) बिहार में नीतीश कुमार मंत्रिमंडल के विस्तार के एक दिन बाद बुधवार को विधि मंत्री बनाए गए राजद नेता कार्तिक सिंह के खिलाफ वारंट लंबित होने की खबरों को लेकर राज्य में विवाद छिड़ गया है।
सिंह के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट लंबित होने की खबरों के बारे में पूछे जाने पर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बुधवार को कहा, ‘‘मुझे इस बारे में कोई जानकारी नहीं है।’’
भाजपा के वरिष्ठ नेता सुशील कुमार मोदी ने बिहार की नवगठित मंत्रिपरिषद में कार्तिक सिंह को शामिल किए जाने को लेकर बुधवार को बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को कठघरे में खड़ा करते हुए आरोप लगाया कि एक अभियुक्त को कानून मंत्री बनाकर उन्होंने संविधान का गला घोंटने की कोशिश की है।
मोदी ने सिलसिलेवार किए गए ट्वीट में कहा कि जिस कार्तिक सिंह को हत्या की नीयत से अपहरण के एक मामले में 16 अगस्त को आत्मसमर्पण करना था, उन्हें उसी दिन कानून मंत्री बनाकर नीतीश कुमार ने बिहार में दहशत वाले ‘लालू (प्रसाद यादव) राज’ की वापसी पक्की कर दी।
बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री मोदी ने दावा किया कि कार्तिक सिंह मोकामा के बाहुबली नेता अनंत सिंह के कारोबारी साझेदार हैं और पटना उच्च न्यायालय द्वारा कार्तिक की अग्रिम जमानत याचिका खारिज की जा चुकी है।
उन्होंने कहा, ‘‘नीतीश कुमार ने कानून की नजर में अभियुक्त व्यक्ति को ही कानून मंत्री बनाकर संविधान और कानून का गला घोंटने की कोशिश की है।’’
वरिष्ठ भाजपा नेता ने सवाल उठाया कि जब बाहुबलियों को मंत्री बना दिया गया है तब बिहार में उद्योग लगाने कौन आएगा।
उन्होंने कहा, ‘‘नीतीश कुमार को कानून-व्यवस्था और विकास के जिन दो मुद्दों पर जनता का समर्थन मिला था, उन दोनों मुद्दों पर उन्होंने 12 करोड़ लोगों से विश्वासघात किया। वे अब एक कमजोर, जनाधारहीन और नाम के मुख्यमंत्री हैं।’’
राज्यसभा सदस्य मोदी ने दावा किया कि जब कार्तिक सिंह के विरुद्ध दायर आरोपपत्र पर संज्ञान लिया जा चुका है और उच्च न्यायालय ने अभियुक्त को किसी प्रकार की राहत देने से इनकार कर दिया है तब कोई निचली अदालत उन्हें गिरफ्तारी से छूट जैसी राहत कैसे दे सकती है।
कार्तिक सिंह राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के विधायक हैं और उन्हें पार्टी के कोटे से बिहार की महागठबंधन सरकार में मंत्री बनाया गया है। कार्तिक वर्ष 2014 में अपहरण से जुड़े एक मामले में आरोपित हैं। दानापुर (पटना) की अदालत ने उनकी अग्रिम जमानत की अर्जी पर सुनवाई करते हुए एक सितंबर तक के लिए राहत दी है।
खबरों के मुताबिक कार्तिक सिंह को अपहरण के एक मामले में 16 अगस्त को दानापुर कोर्ट में आत्मसमर्पण करना था, लेकिन इसके बजाय वह पटना राजभवन में बिहार में नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली सरकार में नए मंत्री के रूप में शपथ लेने के लिए आए।
हालांकि, भाजपा के आरोपों को खारिज करते हुए राजद नेताओं ने बुधवार को कहा कि कार्तिक सिंह को अदालत ने एक सितंबर तक अंतरिम राहत प्रदान की है।
भाषा अनवर धीरज
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