(फाइल फोटो के साथ)
कोलकाता, 13 मार्च (भाषा) पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने शुक्रवार को घोषणा की कि उनकी सरकार विशेष समुदायों के लिए शीघ्र ही पांच नए सांस्कृतिक और विकास बोर्डों का गठन करेगी।
माना जा रहा है कि यह कदम विशेष तौर पर राजनीतिक रूप से संवेदनशील पश्चिमी जिलों में प्रमुख सामाजिक समूहों के बीच जनाधार को मजबूत करने के उद्देश्य से उठाया गया है।
ममता ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, ‘‘मुझे यह घोषणा करते हुए खुशी हो रही है कि हमारी सरकार की मंशा जल्द ही मुंडा (अनुसूचित जनजाति), कोरा (अनुसूचित जनजाति), डोम (अनुसूचित जाति), कुंभकार (अन्य पिछड़ा वर्ग) और सदगोपे (अन्य पिछड़ा वर्ग) समुदायों के लिए पांच नए सांस्कृतिक एवं विकास बोर्डों का गठन करने की है।’’
मुख्यमंत्री ने कहा कि ये समुदाय राज्य की जीवंत संस्कृति का अभिन्न अंग हैं। उन्होंने कहा,‘‘बोर्ड उनकी अनूठी भाषाओं और परंपराओं की रक्षा करते हुए उनके लिए बेहतर शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और रोजगार सुनिश्चित करेंगे।’’
मुख्यमंत्री ने कहा कि 2013 से उनकी सरकार ने सामाजिक और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के कल्याण के लिए कई ऐसे बोर्ड गठित किए हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘हम यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं कि कोई भी समुदाय पीछे न छूटे।’’
मुंडा, कोरा और डोम समुदायों का एक बड़ा वर्ग पश्चिमी जिलों– बांकुरा, पुरुलिया, झाड़ग्राम और पश्चिम मेदिनीपुर के कुछ हिस्सों में रहता है, जबकि सदगोप और कुंभकार समुदाय कई जिलों में फैले हुए हैं।
पश्चिमी जिले में परंपरागत रूप से भाजपा और सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस के बीच चुनावी मुकाबला रहा है। वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने इस क्षेत्र में व्यापक जीत हासिल की थी, हालांकि सत्तारूढ़ दल 2021 के चुनाव में कुछ हद तक अपनी पकड़ मजबूत करने में कामयाब रहा।
वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में तृणमूल ने बांकुरा, झाड़ग्राम और मेदिनीपुर जैसी सीटें भाजपा से वापस ले लीं, हालांकि भाजपा ने पुरुलिया सीट बरकरार रखी, लेकिन जीत का अंतर कम हो गया।
यह घोषणा राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की उत्तरी बंगाल यात्रा को लेकर हाल ही में हुए विवाद के बाद की गयी है।
पश्चिम बंगाल की 294 सदस्यीय विधानसभा के चुनाव अप्रैल में होने की संभावना है, जिसमें बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस लगातार चौथी बार सत्ता में आने के लिए प्रयासरत है।
भाषा राजकुमार प्रशांत
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