पणजी, छह मार्च (भाषा) कानून मंत्री किरेन रीजीजू ने सोमवार को कहा कि एक संवैधानिक इकाई द्वारा दूसरों की शक्तियों का अतिक्रमण करने के प्रयासों का ‘‘कड़ा विरोध’’ किया जाना चाहिए क्योंकि यह लोकतंत्र के लिए एक बड़ा खतरा है।
रीजीजू ने राष्ट्रमंडल विधि सम्मेलन में यह टिप्पणी की। उनकी यह टिप्पणी उच्चतम न्यायालय द्वारा दिए गए उस फैसले के कुछ दिनों बाद आई है, जिसमें अदालत ने कहा है कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त और निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्तियां प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता और भारत के प्रधान न्यायाधीश वाली समिति की सिफारिश पर राष्ट्रपति द्वारा की जानी चाहिए।
उच्चतम न्यायालय ने यह भी कहा था कि यह सिद्धांत कि अदालतें कानून नहीं बना सकती हैं, एक मिथक है जो बहुत पहले टूट चुका है।
रीजीजू ने कहा, ‘‘ लोकतंत्र की सफलता की महत्वपूर्ण कहानी उस मजबूत संवैधानिक स्वीकृति पर आधारित है जो न्यायपालिका, कार्यपालिका और विधायिका के लिए शक्तियों का स्पष्ट विभाजन करती है। यदि कोई इकाई दूसरी इकाई के कार्यक्षेत्र में अतिक्रमण करने की कोशिश करती है, तो इसका कड़ा विरोध किया जाना चाहिए क्योंकि यह लोकतंत्र के लिए ही बड़ा खतरा है।’’
कानून मंत्री ने कहा, ‘‘कोई भी संवैधानिक प्रावधानों को चुनौती नहीं दे सकता। किसी को भी संविधान के प्रावधानों की अवहेलना करने का प्रयास नहीं करना चाहिए।’’
भाषा शफीक प्रशांत
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