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Thursday, 5 March, 2026
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असम: कई मतदाताओं को ‘स्थानांतरित’ घोषित करने के नोटिस मिले

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गुवाहाटी/मोरीगांव, 23 जनवरी (भाषा) असम के मोरीगांव जिले में रहने वाले फरीदुद यूनुश अपने परिवार के उन छह मतदाताओं में शामिल हैं, जिनमें से तीन को राज्य में मतदाता सूचियों के विशेष पुनरीक्षण (एसआर) के तहत अधिकारियों से मिले नोटिस के अनुसार उनके पते से ‘स्थानांतरित’ दिखाया गया है।

अपना नाम ‘स्थानांतरित’ के रूप में दर्ज देखकर हैरान हुए यूनुश और उनके भाई-बहन बृहस्पतिवार को एसआर संबंधी सुनवाई में यह साबित करने के लिए दस्तावेजों के साथ पहुंचे कि वे अभी भी मोरीगांव विधानसभा क्षेत्र के मिकिरभेटा इलाके में रहते हैं।

यूनुश ने ‘पीटीआई-भाषा’ से फोन पर हुई बातचीत में कहा, ‘‘नोटिस बेहद चौंकाने वाला था। हम तीनों को ‘स्थानांतरित’ दिखाया गया है, जबकि परिवार के बाकी सदस्यों को उसी पते पर रहता बताया गया है।’’

उन्होंने दावा किया, ‘‘लेकिन इससे भी ज्यादा चिंताजनक बात यह थी कि निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (ईआरओ) ने यह बताने से इनकार कर दिया कि हमारे खिलाफ शिकायत किसने दर्ज कराई है। ईआरओ ने कहा कि शिकायतकर्ता का नाम जानने के लिए हमें आरटीआई (सूचना का अधिकार) आवेदन दाखिल करना होगा, जो हमने तुरंत जमा कर दिया।’’

यूनुश और उनके भाई-बहन की तरह राज्य भर में हजारों मतदाताओं को कथित तौर पर फॉर्म-7 के जरिये दायर आवेदनों के आधार पर नोटिस प्राप्त हुए हैं, जो मौजूदा मतदाता सूचियों में नामों को शामिल करने या हटाने के अनुरोध से संबंधित है।

कई मतदाताओं ने दावा किया कि उन्हें ऐसे नोटिस मिले हैं, जिनमें उन्हें ‘मृत’ के रूप में दिखाया गया है, जबकि वे सुनवाई में शारीरिक रूप से पेश हुए थे।

फॉर्म-7 का इस्तेमाल करके कोई व्यक्ति तीन कारणों में से किसी एक के लिए अपना नाम हटाने का अनुरोध कर सकता है-पहला-स्थायी रूप से स्थानांतरित होना, दूसरा-पहले से पंजीकृत होना और तीसरा-भारतीय नागरिक न होना।

इसी तरह, उस निर्वाचन क्षेत्र का कोई भी मतदाता पांच कारणों में से किसी एक के आधार पर दूसरों के नाम हटाने के लिए आवेदन कर सकता है, जिनमें मृत्यु, कम उम्र, अनुपस्थित/स्थायी रूप से स्थानांतरित होना, पहले से पंजीकृत या भारतीय नागरिक न होना शामिल है।

राज्य निर्वाचन आयोग के एक अधिकारी ने कहा, ‘‘केवल फॉर्म-7 के तहत आवेदन मिलने के आधार पर मतदाता सूची से नाम नहीं हटाए जाते हैं। संबंधित व्यक्तियों को नोटिस जारी किए जाते हैं और उन्हें यह साबित करने का पर्याप्त मौका दिया जाता है कि वे उस क्षेत्र के वास्तविक मतदाता बने हुए हैं।’’

हालांकि, इस साल बड़ी संख्या में जारी नोटिस ने निहित स्वार्थों के लिए प्रावधान के दुरुपयोग की आशंकाओं को जन्म दिया है, खासकर अगले कुछ महीनों में होने वाले विधानसभा चुनावों को देखते हुए।

निर्वाचन अधिकारी ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें एक ही शिकायतकर्ता ने एक ही निर्वाचन क्षेत्र में कई व्यक्तियों के नाम हटाने के लिए आवेदन दायर किए हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘शिकायतकर्ता से संपर्क करने पर कुछ मामलों में पाया गया कि उन्होंने (शिकायकर्ता ने) ऐसा कोई आवेदन दाखिल नहीं किया था और किसी अन्य व्यक्ति ने उनके विवरण का इस्तेमाल करके फॉर्म भरा था।’’

अधिकारी ने बिलासिपाड़ा विधानसभा क्षेत्र के एक उदाहरण का हवाला देते हुए कहा कि करण रे नामक एक व्यक्ति ने कथित तौर पर नौ मतदाताओं के नाम हटाने का अनुरोध करते हुए कई फॉर्म-7 आवेदन दाखिल किए गए थे।

उन्होंने बताया कि रे नौ अन्य व्यक्तियों के साथ अधिकारियों के समक्ष पेश हुए और कहा कि उन्होंने कोई आपत्ति दर्ज नहीं कराई है और उनके नाम का अनधिकृत इस्तेमाल किया गया है, जिसके बाद आपत्तियों को अमान्य घोषित कर दिया गया।

अधिकारी ने त्रुटिरहित मतदाता सूची के प्रति निर्वाचन आयोग की प्रतिबद्धता की पुष्टि करते हुए कहा कि जिन व्यक्तियों के खिलाफ नाम हटाने के अनुरोध मिले हैं, उन्हें पर्याप्त मौका दिया जाएगा।

उन्होंने बताया कि मोरीगांव, गोलपाड़ा और धुबरी जैसी जगहों पर जिला निर्वाचन अधिकारियों ने आशंकाओं को दूर करने और यह स्पष्ट करने के लिए सार्वजनिक नोटिस जारी किए हैं कि फॉर्म-7 के जरिये फर्जी आवेदन दाखिल करने वाले किसी भी व्यक्ति के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

अधिकारी ने कहा, ‘‘अगर कोई व्यक्ति नाम हटाने के अनुरोध के लिए वैध आधार के बिना फॉर्म-7 का इस्तेमाल करते हुए पाया जाता है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई शुरू की जाएगी।’’

एसआर के तहत दावे और आपत्तियां पेश करने की अंतिम तिथि बृहस्पतिवार को समाप्त हो गई, लेकिन इन पर आधारित सुनवाई की प्रक्रिया दो फरवरी तक जारी रहेगी।

राज्य में अंतिम मतदाता सूची 10 फरवरी को प्रकाशित की जाएगी।

पिछले साल दिसंबर में प्रकाशित मसौदा मतदाता सूची में कुल 2,52,01,624 मतदाता दर्शाए गए, जो जनवरी 2025 में जारी पिछली अंतिम मतदाता सूची की तुलना में 1.35 फीसदी अधिक है।

भाषा पारुल नरेश

नरेश

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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