गुवाहाटी, 31 दिसंबर (भाषा) लगभग डेढ़ साल पहले तीन नए आपराधिक कानूनों को लागू किए जाने के बाद से असम में दोषसिद्धि दर लगभग दोगुनी हो गई है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बुधवार को यह जानकारी दी।
असम पुलिस के विशेष महानिदेशक (सीआईडी) मुन्ना प्रसाद गुप्ता ने संवाददाता सम्मेलन में कहा कि जांच प्रक्रिया के दौरान प्रौद्योगिकी, वैज्ञानिक साक्ष्य और वीडियोग्राफी के अनिवार्य इस्तेमाल के साथ, मुकदमों के दौरान गवाहों के मुकर जाने के मामले काफी कम हो गए।
उन्होंने कहा, ‘‘वैज्ञानिक जांच पर अधिक जोर देने के साथ, दोषसिद्धि दर में काफी वृद्धि हुई है। नए कानूनों के तहत दाखिल आरोपपत्रों के बाद 50 प्रतिशत से अधिक दोषसिद्धि दर हो गई है।’’
विशेष डीजीपी ने कहा कि असम में पुराने कानूनों के तहत दर्ज मामलों में वर्तमान दोषसिद्धि दर लगभग 25 प्रतिशत है।
उन्होंने कहा, ‘‘आजकल प्रौद्योगिकी का उपयोग असाधारण रूप से अधिक है। सात वर्ष या उससे अधिक की सजा वाले किसी भी अपराध के लिए, अपराध स्थल पर फोरेंसिक विशेषज्ञों का जाना अनिवार्य है। इससे साक्ष्यों की गुणवत्ता में सुधार हुआ है, जिसके परिणामस्वरूप दोषसिद्धि दर में वृद्धि हुई है।’’
भाषा आशीष संतोष
संतोष
यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.
