नई दिल्ली: इस साल स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के तिरंगा फहराने से पहले भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) लाल किले की उस दीवार की सफाई और संरक्षण पर 12.55 लाख रुपये खर्च करेगा, जो प्रधानमंत्री के भाषण की पृष्ठभूमि में दिखाई देती है.
27 जून को ASI ने 5,096 लीटर मिनरल टरपेंटाइन ऑयल (एमटीओ) और 340 किलोग्राम सिलेन-सिलोक्सेन खरीदने के लिए टेंडर जारी किया. इनका इस्तेमाल स्मारक की सतह पर हाइड्रोफोबिक (पानी से सुरक्षा देने वाला) ट्रीटमेंट करने के लिए किया जाएगा.
एमटीओ पेट्रोलियम से बना एक सॉल्वेंट है, जिसका उपयोग पुरावशेषों की मरम्मत, सफाई और संरक्षण में किया जाता है. वहीं सिलेन-सिलोक्सेन का इस्तेमाल पत्थर, ईंट और कंक्रीट जैसी सतहों को पानी से सुरक्षित रखने के लिए किया जाता है.
इस सामग्री की अनुमानित लागत 12,55,708 रुपये है. यह काम एएसआई की दिल्ली साइंस ब्रांच के डिप्टी सुपरिंटेंडिंग आर्कियोलॉजिकल केमिस्ट की निगरानी में होगा.
यह संरक्षण कार्य पूरे लाल किले में नहीं होगा. केवल चांदनी चौक की ओर वाली किले की दीवार, जहां से प्रधानमंत्री हर साल तिरंगा फहराते हैं और देश को संबोधित करते हैं, उसी हिस्से पर यह ट्रीटमेंट किया जाएगा.
एएसआई की दिल्ली साइंस ब्रांच ने यह सामग्री GeM पोर्टल के जरिए मांगी है.
टेंडर दस्तावेज़ में कहा गया है, “इस उत्पाद का इस्तेमाल बलुआ पत्थर (सैंडस्टोन) की सतह पर हाइड्रोफोबिक ट्रीटमेंट के लिए सिलेन-सिलोक्सेन BS-290 को पतला करने में किया जाएगा.”
टेंडर 18 जुलाई को बंद होगा, जो स्वतंत्रता दिवस से लगभग एक महीना पहले है.
एएसआई ने बोली लगाने वाली कंपनियों के लिए शर्तें भी तय की हैं. कंपनी का सालाना कारोबार कम से कम 4 लाख रुपये होना चाहिए और इस तरह के काम का कम से कम दो साल का अनुभव होना चाहिए.
टेंडर के मुताबिक, आदेश मिलने के एक सप्ताह के भीतर सामग्री की आपूर्ति करनी होगी.
लाल किले की दीवारें हो रही हैं काली
पिछले कुछ वर्षों में शोधकर्ताओं ने पाया है कि यूनेस्को विश्व धरोहर लाल किले की लाल बलुआ पत्थर की दीवारें धीरे-धीरे काली पड़ रही हैं.
साल 2025 में भारत और इटली के संयुक्त अध्ययन में सामने आया था कि जहरीले प्रदूषक लाल किले की दीवारों पर काली परत (ब्लैक क्रस्ट) बना रहे हैं.
इस अध्ययन में ASI के अतिरिक्त महानिदेशक (ADG) संजय कुमार मंजुल भी शामिल थे.
अध्ययन में कहा गया, “ब्लैक क्रस्ट बनने की प्रक्रिया धीरे-धीरे शुरू होती है. शुरुआती दौर में यह पतली काली परत होती है, जिसे पत्थर को नुकसान पहुंचाए बिना हटाया जा सकता है. सबसे ज्यादा प्रभावित हिस्सों की नियमित सफाई और पत्थरों पर सुरक्षात्मक परत लगाने से इस समस्या को रोका या कम किया जा सकता है.”
इस बीच संसद की परिवहन, पर्यटन और संस्कृति संबंधी स्थायी समिति ने सुझाव दिया है कि लाल किले के संरक्षण और प्रबंधन के मॉडल को देश के अन्य प्रमुख ऐतिहासिक स्थलों पर भी लागू करने की संभावना पर विचार किया जाए.
23 मार्च को जारी समिति की रिपोर्ट में कहा गया, “समिति लाल किला परिसर के संरक्षण और प्रबंधन की सराहना करती है और सिफारिश करती है कि मंत्रालय इस मॉडल का दस्तावेज तैयार करे तथा इसे अन्य प्रमुख विरासत स्थलों पर लागू करने की संभावना का अध्ययन करे.”
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)