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Monday, 18 May, 2026
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NEET मामला: गिरफ्तार हुए पुणे प्रोफेसर 2019 से NTA से जुड़े थे और सभी प्रश्नपत्र सेट्स तक थी पहुंच

एक्सक्लूसिव: पेपर सेटिंग पैनल में होने के साथ-साथ पुणे के कुलकर्णी प्रश्नों का मराठी में अनुवाद भी करते थे. NTA से लंबे जुड़ाव के कारण पुराने वर्षों में भी ऐसे लीक होने की आशंका बढ़ी.

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नई दिल्ली: 2026 के नेशनल एलिजिबिलिटी-कम-एंट्रेंस टेस्ट (नीट-यूजी) पेपर लीक मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा गिरफ्तार पुणे के रिटायर्ड प्रोफेसर पी. वी. कुलकर्णी के पास प्रश्नपत्र के सभी सेट्स तक पहुंच थी, क्योंकि वह सवालों का मराठी में अनुवाद करने के जिम्मेदार भी थे. दिप्रिंट को यह जानकारी मिली है.

सूत्रों के मुताबिक, पेपर लीक की शुरुआत कुलकर्णी से हुई थी.

एक सूत्र ने कहा, “वह सिर्फ उस समिति का हिस्सा नहीं थे जो परीक्षा के लिए प्रश्नपत्र तैयार करती थी, जिसमें वह अपने विषय के सवाल देते थे, बल्कि पूरे पेपर का मराठी में अनुवाद करने की जिम्मेदारी भी उन्हीं के पास थी.”

सूत्र ने आगे कहा, “इसलिए पेपर सेट करने वाले के तौर पर भले ही उन्हें यह नहीं पता होता था कि आखिर में कौन से सवाल फाइनल पेपर में जाएंगे, लेकिन अनुवादक होने के कारण उनके पास पूरे प्रश्नपत्र तक पहुंच थी.”

आमतौर पर नीट पेपर के चार सेट होते हैं, जिनमें 180 सवाल होते हैं. हर सेट को फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी समेत छह सब-सेट्स में बांटा जाता है. पूरे देश में सवाल एक जैसे होते हैं, लेकिन उनका क्रम अलग-अलग रहता है.

जांच एजेंसी के लिए चिंता बढ़ाने वाली बात यह भी है कि कुलकर्णी 2019 से एनटीए पैनल का हिस्सा थे. कई सूत्रों ने दिप्रिंट को इस बात की पुष्टि की है. इससे अब यह शक पैदा हो गया है कि पिछले वर्षों में भी इसी तरह पेपर लीक हुए हो सकते हैं.

सूत्र ने कहा, “यह जांच का विषय है. उनसे इन सभी पहलुओं पर पूछताछ की जा रही है.”

चेन और ‘क्लब’

दूसरे सूत्र के मुताबिक, कुलकर्णी की दोस्ती महाराष्ट्र के लातूर के केमिस्ट्री ट्यूटर शिवराज रघुनाथ मोटेगांवकर से थी, जिसे रविवार को गिरफ्तार किया गया. मोटेगांवकर इलाके में “रेणुकाई केमिस्ट्री क्लासेस” चलाता है और उसका “Motegaonkar Sir’s RCC” नाम का यूट्यूब चैनल भी है, जिसके 1.68 लाख सब्सक्राइबर हैं.

एजेंसी द्वारा कोर्ट में जमा दस्तावेजों के अनुसार, उसने 23 अप्रैल को प्रश्नपत्र हासिल किया था. परीक्षा 3 मई को हुई थी. जांचकर्ताओं ने बताया कि 14 मई को छापेमारी के दौरान मोटेगांवकर के मोबाइल फोन से लीक पेपर की कॉपियां बरामद हुईं.

कुलकर्णी की दोस्ती पुणे की कारोबारी मनीषा वाघमारे और करियर काउंसलर धनंजय लोखंडे से भी थी. दोनों फिलहाल सीबीआई की हिरासत में हैं.

दूसरे सूत्र ने दिप्रिंट से कहा, “ये सभी एक ही क्लब का हिस्सा थे. ये लोग पहले से एक-दूसरे को जानते थे. मनीषा, मोटेगांवकर और धनंजय को कुलकर्णी की पहुंच और एनटीए से उनके संबंधों के बारे में पता था. इसलिए सभी ने मिलकर पेपर हासिल करने और मोटी कमाई करने की साजिश रची.”

सूत्र ने आगे कहा, “इससे उन्हें सिर्फ पैसा ही नहीं मिला, बल्कि उनके कोचिंग संस्थानों और काउंसलिंग बिजनेस की लोकप्रियता भी बढ़ी, क्योंकि वे 100 प्रतिशत नीट एडमिशन का दावा कर सकते थे. वे एडमिशन की गारंटी देते थे और इतना भरोसा तभी आता है जब ऐसे संबंध हों.”

महाराष्ट्र के इस समूह से पेपर फिर नासिक के शुभम खैरनार तक पहुंचा. इसके बाद उसने गुरुग्राम के यश यादव और राजस्थान के मंगीलाल बीवाल से 10-15 लाख रुपये में सौदा किया.

जांच बीवाल के परिवार से पीछे जाते हुए कुलकर्णी तक पहुंची.

सूत्र ने कहा, “पूरी चेन अब सामने आ चुकी है. बीच में और भी लाभार्थी हो सकते हैं और इसकी जांच जारी है. यह भी जांच हो रही है कि क्या एनटीए के और अधिकारी इसमें शामिल थे.”

अब तक इस मामले में दिल्ली, जयपुर, गुरुग्राम, नासिक, पुणे, लातूर और अहिल्यानगर से कुल 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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