(तस्वीरों के साथ)
बेंगलुरु, 10 अप्रैल (भाषा) प्रमुख रक्षा अध्यक्ष (सीडीएस) जनरल अनिल चौहान ने शुक्रवार को कहा कि भारत के सशस्त्र बलों को एकीकृत, चुस्त और प्रौद्योगिकी से लैस बल के रूप में विकसित होने की तत्काल आवश्यकता है, जो विभिन्न युद्धक्षेत्रों में सुचारु रूप से काम करने में सक्षम हो।
उन्होंने यह भी कहा कि आधुनिक युद्ध तेजी से पारंपरिक सीमाओं और समय-सीमाओं से परे जा रहा है।
जनरल चौहान ने ‘रण संवाद-2026’ नाम से आयोजित संगोष्ठी के समापन सत्र को संबोधित करते हुए रेखांकित किया कि ‘मल्टी-डोमेन ऑपरेशंस’ (एमडीओ) अब केवल एक वैचारिक चर्चा का विषय नहीं रह गया है, बल्कि डेटा एनालिटिक्स, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और संघर्ष के बदलते स्वरूप में हुई प्रगति के कारण एक उभरती हुई युद्ध वास्तविकता बन गई है।
एमडीओ आधुनिक सैन्य रणनीति है जिसमें थल, जल (समुद्र), वायु, साइबर, और अंतरिक्ष सभी पांचों क्षेत्रों में एक साथ और समन्वित तरीके से युद्ध लड़ा जाता है।
सीडीएस ने कहा, ‘‘एमडीओ को इस वर्ष के विषय के रूप में इसलिए नहीं चुना गया कि यह एक प्रचलित शब्द है, बल्कि मुझे लगता है कि यह एक प्रकार की नयी वास्तविकता है।’’
देश के शीर्ष सैन्य अधिकारी ने कहा कि सेवारत अधिकारियों को रणनीतिक चर्चा के केंद्र में रखने के उद्देश्य से आयोजित इस संगोष्ठी ने मध्य स्तर और कनिष्ठ अधिकारियों को भविष्य के युद्ध को लेकर अपने दृष्टिकोण व्यक्त करने का मौका दिया है।
उन्होंने कहा, ‘‘आम तौर पर, अनुभवी लोग या विचारकों का समूह ही अपने विचार व्यक्त करते हैं। इसलिए मैंने उस विशेष प्रवृत्ति को उलट दिया।’’
जनरल चौहान ने कहा कि जो लोग सक्रिय रूप से सेवारत हैं, वे युद्ध में होने वाले बदलावों की गति से बेहतर ढंग से परिचित होते हैं।
सीडीएस ने कहा कि विचार-विमर्श के दौरान बल की संरचना, संगठनात्मक ढांचे और एक ऐसे युद्धक्षेत्र में मौजूदा पदानुक्रम की स्थिति सहित अहम मुद्दों पर मंथन किया गया, जो अब पारंपरिक सीमाओं से परे होता है।
उन्होंने कहा कि चर्चाओं के दौरान खुफिया जानकारी, निगरानी और टोह (आईएसआर) पर भी ध्यान केंद्रित किया गया, जहां ‘‘बाधा सूचना नहीं है, बल्कि इसकी व्याख्या की गति और गुणवत्ता है।’’
उभरती प्रौद्योगिकियों की बढ़ती भूमिका को रेखांकित करते हुए जनरल चौहान ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डेटा विश्लेषण निर्णय लेने की प्रक्रियाओं और परिचालन श्रेष्ठता को बदलने के लिए तैयार हैं।
उन्होंने अमेरिकी वायुसेना के अधिकारी रहे जॉन बॉयड द्वारा परिकल्पित ‘ओओडीए लूप’ का जिक्र करते हुए कहा, ‘‘जो भी इस विशेष चक्र को प्रतिद्वंद्वी से पहले पूरा करेगा, वही युद्ध जीतेगा।’’
‘ओओडीए लूप’ चार चरणीय निर्णय लेने की एक प्रक्रिया है, जिसे ‘अवलोकन, दिशा-निर्देश, निर्णय और कार्य’ के माध्यम से तेजी से बदलते माहौल में प्रतिस्पर्धियों से आगे निकलने के लिए अनिश्चितता में भी सटीक निर्णय लेने के वास्ते विकसित किया गया।
जनरल चौहान ने हालांकि, पूर्वानुमान तकनीकों द्वारा संचालित एक प्रतिमान परिवर्तन की ओर इशारा किया। उन्होंने कहा, ‘‘आज, एआई की पूर्वानुमान क्षमता के कारण, आपको अवलोकन करने से पहले ही खुद को सही दिशा में ढालने में सक्षम होना चाहिए।’’
सीडीएस ने युद्ध के बदलते स्वरूप को लेकर कहा कि संघर्ष अब केवल भौतिक क्षेत्र तक सीमित नहीं है। उन्होंने कहा, ‘‘अब तक सभी युद्ध भौतिक क्षेत्र में ही हुए हैं। ऐसे में यह कल्पना करना कि युद्ध एक नयी तरह की वास्तविकता में प्रवेश करेगा, जो कृत्रिम और संज्ञानात्मक प्रकृति की होगी, वास्तव में समझना कठिन है।’’
उन्होंने तर्क दिया कि युद्ध को राजनीतिक स्तर पर भी देखा जाना चाहिए, जहां युद्ध के मैदान में मिली जीत से परे भी परिणाम निर्धारित होते हैं।
उन्होंने सूचना में हेरफेर और प्रभाव अभियानों की बढ़ती भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा, ‘‘अगर आप वास्तव में गोली चलाए बिना अपने राजनीतिक उद्देश्यों को प्राप्त कर सकते हैं, तो निश्चित रूप से, यह एक अलग तरह की वास्तविकता है।’’
जनरल चौहान ने बहुआयामी युद्ध की अवधारणा को पेश किया, जो पारंपरिक क्षेत्रों से होती है। उन्होंने कहा कि भूमि, समुद्र और वायु के अलावा, समय, साइबर, विद्युत चुंबकीय स्पेक्ट्रम और संज्ञानात्मक क्षमता जैसे नए आयाम आधुनिक युद्ध को आकार दे रहे हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘हम शायद न केवल बहु-क्षेत्रीय, बल्कि बहु-आयामी युद्ध के युग में प्रवेश कर रहे हैं।’’
उन्होंने गतिक और गैर-गतिक साधनों, मानवयुक्त और मानवरहित प्रणालियों और पारंपरिक व उभरते क्षेत्रों के अभिसरण पर भी प्रकाश डाला।’’
जनरल चौहान ने कहा, ‘‘यह विनाश नहीं है, बल्कि वास्तव में यह दुश्मन को पंगु बना देना है।’’ उन्होंने इसका अभिप्राय समझाते हुए कहा कि इस तरह की रणनीति का प्रभाव कई स्तरों पर दुश्मनों को बाधित और अक्षम कर सकता है।
सीडीएस ने प्रभावी बहु-क्षेत्रीय संचालन को सक्षम बनाने के लिए नेटवर्क, मानक संचालन प्रक्रियाओं और साझा समझ सहित संस्थागत संरचना के महत्व को रेखांकित किया।
जनरल चौहान ने घोषणा की कि ‘रण संवाद-2027’ का आयोजन भारतीय नौसेना द्वारा किया जाएगा।
भाषा धीरज अविनाश
अविनाश
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