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Friday, 24 May, 2024
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सही है सबके लिए एक ही पैमाना? एनिमेशन, VFX, गेमिंग और कॉमिक्स पर पॉलिसी का कुछ चिंताओं के साथ स्वागत

इसे लेकर चिंताएं जताई जा रही हैं कि क्या सरकार बाधाओं को दूर करेगी और अपना टैक्सेशन सिस्टम बदलेगी. इसके अलावा, उद्योग जगत के हितधारकों का ध्यान बौद्धिक संपदा (आईपी) निर्माण क्षेत्र पर भी केंद्रित है.

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नई दिल्ली: उद्योग जगत ने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की तरफ से पिछले हफ्ते जारी एनिमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग और कॉमिक्स-एक्सटेंडेड रियलिटी (एवीजीसी-एक्सआर) मिशन डॉक्यूमेंट का स्वागत किया है, साथ ही यह भी कहा है कि इन सभी उद्योगों को एक ही श्रेणी में रखने से कुछ समस्याएं हो सकती हैं. क्योंकि ये सभी अपने आप में महत्वपूर्ण क्षेत्र हैं.

मंत्रालय अपने टास्कफोर्स के माध्यम से ‘रोजगार के अवसर पैदा करने’ और ‘ट्रेनिंग स्कूल और सेंटर’ स्थापित किए जाने पर एक व्यापक केंद्रीय नीति की निगरानी करना चाहता है. टास्क फोर्स का नेतृत्व सूचना एवं प्रसारण सचिव अपूर्व चंद्रा कर रहे हैं, और मंत्रालय ने इन क्षेत्रों के विकास के लिए पूरी जोरदारी से वित्तीय परिव्यय बढ़ाने की मांग की है.

सरकार की ओर से जारी रिलीज में कहा गया है, ‘एनीमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग एंड कॉमिक (एवीजीसी) टास्क फोर्स ने एवीजीसी सेक्टर के समन्वित प्रचार और विकास के लिए एक बजट परिव्यय निर्धारित करने के साथ एक राष्ट्रीय एवीजीसी-एक्सआर मिशन का आह्वान किया है. टास्क फोर्स ने भारत में, भारत के लिए और विश्व के लिए सामग्री निर्माण पर विशेष ध्यान देने के साथ ‘क्रिएट इन इंडिया’ अभियान शुरू करने की भी सिफारिश की है.

एवीजीसी मसौदा नीति रिपोर्ट के मुताबिक, नीति आयोग के अनुमान बताते हैं कि 2021 तक ‘भारत में एनीमेशन और वीएफएक्स क्षेत्र करीब 1.131 बिलियन अमेरिकी डॉलर का था.’ इसमें यह भी कहा गया है कि यह क्षेत्र ‘भारत के लिए अगला आईटी-बीपीएम बूम हो सकता है’ और इसमें ‘2030 तक 100 बिलियन अमेरिकी डॉलर का एमएंडई उद्योग’ बनने की क्षमता है.

यहां तक कि ऑनलाइन गेमिंग क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण वृद्धि देखी गई है. रिपोर्ट में बताया गया है, ‘यह सेगमेंट 2021 में 28 प्रतिशत बढ़कर 1.9 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया.’ अनुमानों में यह भी माना गया कि यह क्षेत्र ‘पिछले पांच वर्षों से लगातार बढ़ रहा है’ और ‘इसकी वैल्यू तीन गुना होने और 2025 तक 3.9 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंच जाने की उम्मीद है.’

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‘घरेलू आईपी पर टैक्स हटाया जाना चाहिए’

हालांकि, इस ‘बहुप्रतीक्षित’ कदम को उद्योग जगत की तरफ से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है. लेकिन इस बात को लेकर चिंताएं भी जाहिर की गई है कि इन सभी क्षेत्रों को प्रस्तावित नीति में एक ही श्रेणी में क्यों रखा गया है, और क्या सरकार इसकी बाधाएं दूर करेगी और अपनी मौजूदा कराधान प्रणाली को बदलेगी. बौद्धिक संपदा (आईपी) निर्माण को लेकर भी खासी चिंता जताई जा रही है. इस क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि घरेलू आईपी पर कराधान से छूट दी जानी चाहिए ताकि इनोवेशन के लिए अधिक धन उपलब्ध हो.

एवीजीसी रिपोर्ट के मुताबिक, वैश्विक एनिमेशन और विजुअल इफेक्ट्स बाजार का आकार 2021 में 168 अरब डॉलर आंका गया था और 2020 से 2026 के बीच 10.94 प्रतिशत की सीएजीआर (चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर) के साथ 2024 तक इसके 290 अरब डॉलर तक पहुंच जाने का अनुमान है.

गेमिंग क्रिएटर्स और ई-स्पोर्ट्स प्रशंसकों को समर्पित ब्लॉकचेन-आधारित फैन एंगेजमेंट प्लेटफॉर्म एसटीएएन के सह-संस्थापक शुभम गुप्ता ने दिप्रिंट को बताया, ‘मुझे लगता है कि वैश्विक स्तर पर इस क्षेत्र में उत्कृष्टता हासिल करने के लिए जरूरी सभी चीजें भारत के पास उपलब्ध हैं. भारत में हर प्रकार की सामग्री का उत्पादन किया जा सकता है, और कहानियों या आइडियाज की कोई कमी नहीं है.’

गुप्ता ने आगे कहा, ‘हालांकि मंत्रालय की तरफ से यह कदम बहुत अच्छी तरह सोच-विचारकर उठाया गया है, लेकिन हमें यह याद रखना होगा कि ये सभी क्षेत्र अपने आप में बहुत बड़े उद्योग हैं और उन्हें एक साथ जोड़कर उनकी अपनी-अपनी बजटीय और सहायक जरूरतों को पूरा नहीं किया जा सकता है.’

हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि ‘हर छोटी-बड़ी बात’ के लिए अकेले सरकार पर निर्भर रहना भी सार्थक नहीं होगा.

गुप्ता ने कहा, ‘उद्योग क्षेत्र की अगुआई करने वालों से भी महत्वपूर्ण योगदान की उम्मीद की जाती है, खासकर पैसों का इंतजाम करने और सही लोगों को किसी प्रोजेक्ट से जोड़ने के काम में, ताकि इसकी विश्वसनीयता सुनिश्चित की जा सकें. मैं यह तो नहीं कहूंगा कि यह पहले से नहीं हो रहा है, बस जरूरत है कि इसे सिर्फ छोटे पैमाने पर ही न किया जाए.’


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अंतरराष्ट्रीय संधियां और ‘धन की उपलब्धता’

इसमें कहा गया है, सरकार की नीति के कई पहलू हैं जिनसे उद्योग के खिलाड़ी सहमत हैं, खासकर कराधान से संबंधित प्रोत्साहन, समर्पित शैक्षणिक संस्थानों की शुरूआत और अंतरराष्ट्रीय समझौते.

एक ‘प्लेटेक मंच’ देसीअड्डाईएस के सीईओ अभिनव सिंह ने कहा, ‘एवीजीसी भारत में एक अपेक्षाकृत नया उद्योग है और इसलिए कोई निश्चित कानूनी प्रावधान नहीं है. इस क्षेत्र में शिक्षा और ट्रेनिंग मॉड्यूल की कमी है. सबसे तेजी से बढ़ते क्षेत्रों में से एक होने और बड़े पैमाने पर रोजगार पैदा करने की क्षमता के बावजूद, इस क्षेत्र को कोई सरकारी सहायता या समर्थन आसानी से उपलब्ध नहीं है.’

नई नीति में इन क्षेत्रों के लिए धन की उपलब्धता आसान बनाने संबंधी सिफारिशों का भी स्वागत किया गया.

सरकार की तरफ से हितधारकों के साथ चर्चा का हिस्सा रहे टूंज मीडिया ग्रुप के सीईओ पी. जयकुमार ने दिप्रिंट से कहा, ‘धन की उपलब्धता के लिए एवीजीसी क्षेत्र को विभिन्न योजनाओं में शामिल किए जाने और विभिन्न इनीशिएटिव और कराधान से संबंधित प्रोत्साहनों तक पहुंच हासिल करने के लिहाज से एवीजीसी को अंतरराष्ट्रीय समझौतों में एक प्राथमिकता क्षेत्र के तौर पर स्वीकारने जैसी सिफारिशें देश में इसके लिए आदर्श माहौल विकसित करेंगी.’

उन्होंने कहा, ‘राष्ट्रीय और क्षेत्रीय स्तर पर सेंटर्स ऑफ एक्सीलेंस अलावा, राष्ट्रीय शिक्षा नीति का लाभ उठाने और स्कूल स्तर पर एवीजीसी पर केंद्रित पाठ्यक्रम सामग्री के साथ रचनात्मक सोच विकसित करने का प्रस्ताव कुछ ऐसा है जिसका मैं विशेष तौर पर उल्लेख करना चाहूंगा.’

हालांकि, उद्योग से जुड़े लोगों की एक राय यह भी है कि सरकार को अंतरराष्ट्रीय समझौते करने में अधिक प्रभावी होना चाहिए ताकि पर्याप्त धन की उपलब्धता सुनिश्चित की जा सके.

जयकुमार ने कहा, ‘यह देखते हुए कि उद्योग पिछले कुछ सालों में कैसे विकसित हुआ है, यह जरूरी है कि सरकार एनीमेशन व्यवसाय के लिए उपयुक्त देशों के साथ अधिक को-प्रोडक्शन समझौते करने के उद्योग के अनुरोध पर गंभीरता से विचार करे. यह विभिन्न तरह के इनीशिएटिव तक पहुंच सुनिश्चित करेगा जिससे इस उद्योग को काफी प्रोत्साहन मिलेगा.’

बौद्धिक संपदा अधिकार के मामले में पिछड़ रहा भारत

गुप्ता के मुताबिक ग्लोबल एक्सेस और इनोवेशन के मामले में भारत पिछड़ गया है.

उन्होंने सवाल उठाया, ‘आपके फोन में ऐसे कितने ऐप हैं जिन्हें पूरी तरह भारतीयों ने बनाया है और ये अन्य देशों के ऐप के तौर पर फेमस हैं?’ साथ ही कहा, ‘वास्तव में अच्छे आईपी के इनोवेशन, गुणवत्ता या निर्माण के मामले में कमी रही है.’

बौद्धिक संपदा का मतलब है कि ऐसी रचनात्मक खोज का निर्माण जिसे पेटेंट और कॉपीराइट किया जा सके. रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार का इरादा ‘अनुसंधान और विकास और आईपी निर्माण के लिए प्रोत्साहन योजनाओं’ पर काम करने और ‘एवीजीसी क्षेत्र में कर लाभ, आयात शुल्क, पाइरेसी पर अंकुश आदि कदमों के जरिये ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को बढ़ाना है.’

विशेषज्ञों का मानना है कि यह एक अच्छा कदम होगा क्योंकि ‘अतीत में चूके अवसर’ एक ‘धारणा संबंधी समस्या’ का नतीजा रहे हैं, जिसे अब ठीक किया जा सकता है.

(अनुवादः रावी द्विवेदी | संपादन: ऋषभ राज)

(इस ख़बर को अंग्रेज़ी में पढ़नें के लिए यहां क्लिक करें)


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