लखनऊ: छह लोगों के खिलाफ मामला दर्ज. चार गिरफ्तार. लखनऊ विकास प्राधिकरण, फायर और बिजली विभाग के चार अधिकारियों को निलंबित किया गया. एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया गया.
उत्तर प्रदेश की राजधानी में भीषण आग लगने से 15 लोगों की मौत के एक दिन बाद तेज़ी से कार्रवाई हुई, लेकिन कई सवाल अब भी धधकते अंगारों की तरह बाकी हैं. सोमवार देर रात ही उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अलीगंज क्षेत्र में लगी आग के मामले में चार अधिकारियों को निलंबित कर दिया था. वहीं, उत्तर प्रदेश पुलिस ने अलीगंज घटना के संबंध में भवन मालिक सहित चार लोगों को गिरफ्तार किया.
यह कार्रवाई रेस्क्यू ऑपरेशन पूरा होने के कुछ घंटों के भीतर की गई. आरोपियों की पहचान रामकृष्ण उपाध्याय, वीरेंद्र प्रसाद शुक्ला और तुषाक कृष्ण जायसवाल के रूप में हुई है. चौथे आरोपी की पहचान अभी नहीं हो सकी है और आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है. पुलिस ने अभी तक संपत्ति के मालिक की पहचान सार्वजनिक नहीं की है.
दूसरी ओर, मुख्यमंत्री के निर्देश पर चार लोगों को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया. इनमें गौरव कुमार, कार्यकारी अभियंता (कलेक्शन); कमलेंद्र कुमार सिंह, एफएसएसओ (फायर विभाग); अनिल कुमार, सहायक अभियंता; और लखनऊ विकास प्राधिकरण के जूनियर इंजीनियर प्रमोद पांडे शामिल हैं. राज्य सरकार के सूत्रों ने कहा कि अभी तक किसी वरिष्ठ अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई है.
लखनऊ के अलीगंज इलाके में बनी इस मल्टीस्टोरी बिल्डिंग में ग्राउंड फ्लोर पर एक पेट शॉप थी, जबकि ऊपरी फ्लोर का इस्तेमाल गेमिंग ज़ोन और एनिमेशन ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट के तौर पर किया जा रहा था, जहां ट्रेनी गेमिंग और सॉफ्टवेयर से जुड़ी एक्टिविटीज़ पर काम करते थे.
यह हादसा तब हुआ जब गर्मी की छुट्टियों में एनिमेशन सीखने आए छात्र आग लगने के बाद इमारत के अंदर फंस गए.
शुरुआती जांच में संकेत मिले हैं कि आग इमारत के एयर कंडीशनिंग डक्ट से शुरू हुई हो सकती है, जबकि सही निकासी मार्ग न होने के कारण धुएं से दम घुटने की स्थिति बनी. यह दावा उत्तर प्रदेश के शहरी विकास एवं ऊर्जा मंत्री ए.के. शर्मा ने घटनास्थल का निरीक्षण करने के बाद किया.
उन्होंने कहा कि भवन सुरक्षा नियमों के संभावित उल्लंघन की भी जांच की जाएगी. हालांकि, शर्मा के अलावा किसी अन्य वरिष्ठ अधिकारी ने सार्वजनिक रूप से आग लगने के कारण पर टिप्पणी नहीं की है, जिससे कई सवाल अब भी अनसुलझे हैं.
घटनास्थल पर मौजूद स्थानीय निवासी वीरेंद्र कुमार ने कहा कि हादसे के दौरान इमारत के अंदर से मदद की पुकार सुनाई दे रही थी, जबकि बचाव दल जीवित लोगों की तलाश कर रहे थे. उन्होंने आरोप लगाया कि अलीगंज जैसे रिहायशी इलाकों में कई बहुमंजिला व्यावसायिक इमारतें पर्याप्त अग्नि सुरक्षा उपायों के बिना चल रही हैं और सवाल उठाया कि अधिकारियों ने ऐसे उल्लंघनों को जारी रहने क्यों दिया.
सुखमनी उन लोगों में शामिल था जिनकी इस हादसे में मौत हो गई. उसके दोस्त यश ने बताया कि सुखमनी पिछले चार वर्षों से एक 3डी एनिमेशन ऑफिस में काम कर रहा था. कार्यालय में करीब 40 लोग काम करते थे और मुख्य प्रवेश द्वार थंब-इम्प्रेशन एक्सेस सिस्टम से संचालित होता था.
आग फैलने के बाद कथित तौर पर गेट अपने आप लॉक रहा, जिससे उसे खोलने में देरी हुई. माना जा रहा है कि इस देरी ने हादसे को और गंभीर बना दिया. जिस मंजिल पर लोग फंसे थे वहां इमरजेंसी एग्जिट न होने को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं.
मीडिया से बात करते हुए हादसे में जान गंवाने वाले आदित्य श्रीवास्तव की मां ने कहा, “जब मुख्यमंत्री के दौरे की तैयारी हो रही थी, तब प्रशासन बहुत सक्रिय हो गया था. अगर पहले भी इतनी ही सतर्कता दिखाई गई होती, तो शायद इन युवाओं की जान बचाई जा सकती थी. मेरा बेटा एक एनिमेशन स्टूडियो में काम करता था. वह सिर्फ 25 साल का था. अगर थोड़ी और सावधानी बरती गई होती, तो आज मेरा बेटा ज़िंदा होता. मेरी पूरी दुनिया उजड़ गई है.”
इस बीच अधिकारियों ने कहा कि आग लगने के सही कारण की जांच अभी जारी है. पुलिस आग लगने के बाद के महत्वपूर्ण मिनटों में क्या-क्या हुआ, इसकी भी कड़ियां जोड़ रही है.
दूसरी ओर, घटनास्थल का दौरा करने वाले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मृतकों के परिजनों को 5-5 लाख रुपये और घायलों को 50-50 हजार रुपये की अनुग्रह राशि देने की घोषणा की है. उन्होंने इस अग्निकांड की जांच के लिए दो सदस्यीय एसआईटी का भी गठन किया है.
हादसे के बाद लखनऊ प्रशासन ने मृतकों की सूची जारी की. इस त्रासदी में जान गंवाने वालों की पहचान सागर, अनामिका, संयम, अनुच्छा, सुखमनी, आदित्य श्रीवास्तव, ज्योति, भविष्य, निलेश, अब्दुल रहमान, सूरज भाह, भाहजन, जयनिल चक्रवर्ती, मोहम्मद अम्मार और सुमल्या के रूप में हुई है. बताया गया है कि सभी पीड़ितों की उम्र 20 से 25 वर्ष के बीच थी.
घायलों की पहचान जयंत, लवप्रीत, मोहम्मद आसिफ, भुवन श्रीवास्तव, पंकज, शैलेंद्र, अभिषेक और पंकज जोशी के रूप में हुई है.
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
यह भी पढ़ें: लखनऊ में आग लगने से 15 लोगों की मौत, चश्मदीदों ने कहा: कई लोग जान बचाने के लिए कूदे