लखनऊ, 26 अप्रैल (भाषा) उत्तर प्रदेश में गाजीपुर के करंडा थानाक्षेत्र में गंगा नदी के पुल के नीचे नाबालिग लड़की का शव मिलने के मामले में समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए इसे हाथरस कांड का दोहराव करार दिया।
पूर्व मुख्यमंत्री यादव ने रविवार को ‘एक्स’ पर लड़की के पिता के बयान का वीडियो साझा करते हुए पोस्ट किया,‘‘बयान बदलवाने से सच नहीं बदलता है। उत्तर प्रदेश ने इतना कमजोर मुख्यमंत्री कभी नहीं देखा, जो घोर अत्याचार के शिकार गरीब-बेबस पीड़ितों पर दबाव डालकर बयान बदलवाते हैं।’’
यादव के बयान पर प्रदेश भाजपा के सह संपर्क प्रमुख और गाजीपुर निवासी नवीन श्रीवास्तव ने ‘एक्स’ पर पलटवार करते हुए लिखा, ‘‘भैयाजी, आपको प्रशासन पर भरोसा नहीं, पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर भरोसा नहीं, पीड़िता के पिता पर भरोसा नहीं। आपको सिर्फ बांटने की कुत्सित राजनीति पर भरोसा है।’’
सपा प्रमुख द्वारा ‘एक्स’ पर साझा किए गए वीडियो में लड़की के पिता कह रहे हैं,‘‘प्रधानजी हमें गाली देते हुए कह रहे हैं कि हमारी तीन रुपये की औकात नहीं है, हमने उसे (बेटी को) 30 हजार रुपये का मोबाइल दिलवा दिया। प्रधान ने हमसे कहा, उस दिन नहीं सोचा कि लड़की हमारी क्या करेगी।’’
प्रधान का नाम लेते हुए पिता ने कहा, ‘‘वह पूरी तरह हमारे खिलाफ हैं। उन्होंने पथराव भी कराया। हमको बचाने में एसओ साहब पीटे गए। ‘
सपा प्रमुख ने इस पोस्ट के जरिए पांच सवाल खड़े किए। उन्होंने पूछा,‘‘प्राथमिकी दर्ज करने में इतनी देर क्यों हुई? बातें क्यों बदलवाई गईं? पीड़ित परिवार को और उत्पीड़ित क्यों किया जा रहा है? पुलिस पर पथराव करने वाले वर्चस्ववादियों के खिलाफ कार्रवाई से किसने रोका? और पोस्टमार्टम पर सवालिया निशान क्यों लगा?’’
अखिलेश ने कहा, ‘‘सच तो यह है कि सबको सच मालूम है। पोस्टमार्टम की रिपोर्ट कुछ भी कहे, गांव के हर घर को जमीनी सच्चाई मालूम है। सब जानते हैं हुआ क्या है और कहलवाया क्या जा रहा है। इससे गांव के हर समुदाय में भाजपा के झूठ की बात पहुंच गई है। इससे पीडीए समाज में बहुत गुस्सा और आक्रोश है।’’
यादव ने कहा कि गाजीपुर की बेटी का हत्याकांड हाथरस की बेटी के हत्याकांड का दोहराव है तथा इन दोनों में एक बात समान है कि पीड़ितों के परिवार ‘पीडीए परिवार’ थे और उत्पीड़क वर्चस्ववादी थे।
हाथरस जिले में 14 सितंबर 2020 की सुबह लड़की अपनी मां के साथ मवेशियों के लिए चारा लेने खेतों की तरफ जा रही थी, तभी आरोपियों ने कथित तौर पर उसे पकड़ लिया और सामूहिक दुष्कर्म किया। बाद में 29 सितंबर को नयी दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में उसकी मौत हो गई थी। इस मामले ने राज्य की राजनीति को गरमा दिया था। हालाकि अब अदालत का फैसला आ चुका है जिसमें सिर्फ एक ही आरोपी को दोषी करार दिया गया।
सपा प्रमुख ने सवाल उठाया कि दिखावटी कार्रवाई से क्या पीड़ित परिवार को न्याय मिल पाएगा?
उन्होंने कहा,‘‘ इस अन्याय की मूल वजह यह है कि समाज में भेदभाव है, इसीलिए हम कहते हैं कि सिर्फ ‘न्याय का राज’ की नहीं, बल्कि ‘सामाजिक न्याय का राज’ लाने की बात होनी चाहिए। यही सबसे बड़ा लक्ष्य होना चाहिए।’’
उन्होंने पीडीए के मिशन को आजादी के बाद की एक और ‘असली आजादी’ का आंदोलन बताया। उन्होंने कहा, ‘‘एक ऐसी आजादी जो लोगों के नजरिए को बदलने की बात करे। बराबरी एक ऐसी भावना है जो दुराव से नहीं, सच्चे लगाव से पैदा होगी। जिस दिन शोषक-शोषित का भेद समाप्त हो जाएगा और मन से लोग समता को स्वीकार कर लेंगे वो दिन ही ‘असली आजादी’ लेकर आएगा।’’
कटरिया गांव में गंगा में मृत मिली 16-17 वर्षीय बालिका के पिता ने शनिवार को पत्रकारों से कहा था कि बेटी की मौत से वह बेहद दुखी हैं और नहीं चाहते कि कोई नेता दरवाजे पर आकर राजनीतिक रोटी सेंके।
उन्होंने बताया कि जिलाधिकारी अनुपम शुक्ला और पुलिस अधीक्षक डॉ. इराज राजा ने आरोपी को सजा दिलाने का भरोसा दिया है तथा वह पुलिस कार्रवाई से संतुष्ट हैं।
उधर, वाराणसी जोन के अपर पुलिस महानिदेशक (एडीजी) पीयूष मोर्डिया ने शनिवार को बताया कि 14-15 अप्रैल की रात लड़की लापता हुई थी और सुबह साढ़े पांच बजे घर से तीन किलोमीटर दूर गंगा नदी में शव मिला। उन्होंने कहा कि परिजन की तहरीर पर प्राथमिकी दर्ज कर मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है।
एडीजी ने कहा,‘‘पुलिस और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों ने लड़की के परिजन से मुलाकात की। पिता से लंबी बातचीत हुई। उन्होंने पूरे घटनाक्रम से अवगत कराया और कार्रवाई पर संतुष्टि जताई। उन्होंने (पिता) अनुरोध किया कि त्वरित अदालत में मुकदमा चलाकर जल्द से जल्द आरोपी को सजा दिलाई जाए।’’
उन्होंने कहा कि घटना के बाद कुछ बाहरी लोगों ने गांव में अशांति फैलाने का प्रयास किया।
भाषा आनन्द राजकुमार
राजकुमार
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