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Saturday, 25 April, 2026
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एआईसीटीई ने तकनीकी शिक्षण संस्थानों से ‘परख’ कार्यक्रम को शामिल करने को कहा

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नयी दिल्ली, 11 जून (भाषा) अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) ने सभी तकनीकी शिक्षण संस्थानों से अपनी प्रणाली में छात्रों के समग्र विकास के लिये ज्ञान का मूल्यांकन, समीक्षा एवं विश्लेषण (परख) को शामिल करने को कहा है ।

एआईसीटीई के एक वरिष्ठ अधिकारी ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘ हमने शैक्षणिक सत्र 2022-23 से तकनीकी शिक्षण संस्थानों के लिये ‘परख’ के वास्ते पंजीकरण कराने को अनिवार्य विषय की श्रेणी में डाल दिया है और इस विषय को मंजूरी देने की व्यवस्था के साथ जोड़ दिया है। हमने तकनीकी संस्थानों से इसके लिये पंजीकरण कराने को कहा है। ’’

उन्होंने कहा कि पिछले तीन महीने में परख के लिये 2000 संस्थानों और करीब 2.5 लाख बच्चों ने पंजीकरण कराया है।

अधिकारी ने बताया कि करीब 1.5 लाख छात्रों ने परख के माध्यम से मूल्यांकन कराया है और उन्हें ‘स्टार रेटेड स्कोरकार्ड’ दिये गए हैं ।

गौरतलब है कि छात्रों में किताबी ज्ञान के साथ-साथ रचनात्मकता बढ़ाने के लिये एआईसीटीई ने ‘छात्रों के सीखने के स्तर का मूल्यांकन’ (परख) शुरू किया है ताकि छात्र समय के साथ होने वाले बदलाव के अनुरूप चीजों को सीखते हुए कमियों को दूर कर सकें।

छात्र तय समय के बाद खुद ऑनलाइन परीक्षा से अपनी परख कर सकेंगे। इसके तहत छात्रों के लिए सवालों का प्रश्न बैंक तैयार किया गया है।

अधिकारी ने बताया कि परिषद ने इंजीनियरिंग एवं प्रबंधन के छात्रों के लिये भी ‘परख’ का प्रारूप तैयार किया है। इस परीक्षा के माध्यम से छात्रों को पता लग सकेगा कि कहां पर कमी है और किस विषय में सुधार की जरूरत है।

उन्होंने बताया, ‘‘ परख के तहत स्वमूल्यांकन के लिये 100 प्रश्न होते हैं और इनका उत्तर 100 मिनट में देना होता है। ’’

उन्होंने कहा कि इसके माध्यम से छात्रों के सामाजिक, मानसिक, भावनात्मक पहलुओं को परखने के साथ उनकी आदतों का भी मूल्यांकन किया जाता है।

अधिकारी ने उदाहरण स्वरूप बताया कि मूल्यांकन में शामिल होने वाले छात्रों से जब पूछा गया कि वे तनाव में रहते हैं तब किससे बात करते हैं, इसके जवाब में 90 प्रतिशत छात्रों ने कहा कि वे माता- पिता अथवा संबंधियों से बात करते हैं ।

उन्होंने कहा कि छात्रों से यह भी पूछा गया है कि वे कितनी देर पढ़ते हैं और क्या-क्या पढ़ते हैं ?

अधिकारी ने बताया कि जो बच्चे पाठ्येतर गतिविधियों में समय देते हैं, उनका अकादमिक प्रदर्शन बेहतर पाया गया है।

उन्होंने कहा कि परख से बच्चों को सीखने के स्तर में अंतर का विश्लेषण कर अपने प्रदर्शन को बेहतर बनाने में मदद मिलती है।

भाषा दीपक

रंजन दिलीप

दिलीप

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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