नयी दिल्ली, 18 फरवरी (भाषा) भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार अजय कुमार सूद ने बुधवार को कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) प्रौद्योगिकी प्रणालियों में डिजाइन और विकास के चरण में ही तकनीकी-कानूनी सुरक्षा उपायों को सीधे तौर पर शामिल किया जाना चाहिए।
सूद के अनुसार, इस प्रकार के अंतर्निहित अनुपालन तंत्र एल्गोरिद्म संबंधी पक्षपात, जवाबदेही और नैतिक एआई उपयोग से जुड़ी बढ़ती चिंताओं को दूर करने में मदद कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे तंत्र शासन से लेकर उद्योग तक विभिन्न क्षेत्रों में एआई के जिम्मेदार उपयोग को सुनिश्चित करने में सहायक होंगे।
‘एआई इम्पैक्ट समिट’ के एक सत्र में सूद से पूछा गया कि क्या भारत को अपना अलग रास्ता तय करना चाहिए और यह विभिन्न क्षेत्रों में एल्गोरिद्म पूर्वाग्रह और नैतिक एआई उपयोग से संबंधित चिंताओं को कैसे दूर कर रहा है।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत द्वारा हाल में जारी किए गए एआई शासन ढांचे में एक तकनीकी-कानूनी दृष्टिकोण के माध्यम से ‘सुरक्षित और भरोसेमंद एआई’ के निर्माण पर बल दिया गया है, जो एआई प्रणालियों के डिजाइन, विकास और तैनाती में नियामक आवश्यकताओं को एकीकृत करता है।
नवंबर 2025 में इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा जारी किए गए ‘इंडिया एआई गवर्नेंस फ्रेमवर्क’ की अध्यक्षता करने वाले सूद ने कहा कि इसके प्रमुख पहलुओं में से एक सुरक्षा और विश्वास पर केंद्रित है।
उन्होंने कहा, ‘हमने सुरक्षित और भरोसेमंद एआई का अर्थ स्पष्ट कर दिया है। डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (डीपीआई) के अपने अनुभव के आधार पर, हमने एक तकनीकी-कानूनी ढांचा प्रस्तावित किया है। सरल शब्दों में इसका अर्थ यह है कि आप विकास, तैनाती और उपयोग के चरण में ही प्रौद्योगिकी में कानूनी आवश्यकताओं को शामिल कर देते हैं।’
सूद ने स्वीकार किया कि यह सवाल उठ सकता है कि क्या कानूनी सुरक्षा उपायों को शामिल करने से मॉडल के प्रदर्शन पर असर पड़ सकता है, देरी हो सकती है या नवाचार धीमा हो सकता है।
उन्होंने आगाह करते हुए कहा, ‘इन सभी चिंताओं पर विचार करना आवश्यक है। लेकिन यदि आप सावधानी नहीं बरतते और जल्दबाजी करते हैं, तो कुछ वर्षों में कानूनी समस्याएं आपको घेर लेंगी। यदि नुकसान होता है, तो पहला सवाल यह होगा: इसके लिए कौन जिम्मेदार है?’
सूद ने इस बात की जांच करने का आह्वान किया कि तकनीकी-कानूनी या अन्य सुरक्षा ढांचों को अपनाने के लिए कैसे प्रोत्साहन दिया जा सकता है।
भाषा आशीष वैभव
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