नयी दिल्ली, 24 फरवरी (भाषा) दिल्ली की एक अदालत ने ‘एआई इम्पैक्ट शिखर सम्मेलन’ में विरोध प्रदर्शन करने के आरोपी भारतीय युवा कांग्रेस के अध्यक्ष उदय भानु चिब और अन्य लोगों को प्राथमिकी की प्रति मुहैया कराने का मंगलवार को पुलिस को निर्देश दिया, साथ ही पुलिस के इस दावे को भी खारिज कर दिया कि मामला ‘संवेदनशील’ है।
अदालत ने कहा कि आरोप भारत मंडपम में हुए एक प्रतीकात्मक विरोध प्रदर्शन से जुड़े हैं, जिनमें आतंकवाद या विद्रोह के कोई लक्षण नहीं पाए गए, इसलिए यह कोई ‘संवेदनशील’ मामला नहीं है।
न्यायिक मजिस्ट्रेट रवि आरोपियों को आवश्यक दस्तावेजों के साथ प्राथमिकी की प्रति उपलब्ध कराने संबंधी याचिका पर सुनवाई कर रहे थे।
अर्जी में कहा गया कि प्राथमिकी की प्रति उपलब्ध न कराए जाने से उनके बचाव के संवैधानिक अधिकारों का हनन हुआ है।
मजिस्ट्रेट ने जांच अधिकारी के जवाब का उल्लेख करते हुए कहा कि नई दिल्ली जिले के पुलिस उपायुक्त द्वारा मामले को ‘संवेदनशील’ चिह्नित किए जाने के कारण प्राथमिकी की प्रति प्रदान नहीं की गई।
इससे पहले अदालत ने 20 फरवरी को भारत मंडपम में आयोजित ‘एआई इम्पैक्ट समिट’ के दौरान कमीज उतारकर विरोध प्रदर्शन करने के मामले में चिब को चार दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया था।
जांच अधिकारी द्वारा सात दिन की पुलिस हिरासत की मांग किए जाने के बाद न्यायिक मजिस्ट्रेट रवि ने चिब से पूछताछ के लिए पुलिस को चार दिन की हिरासत की अनुमति दी।
भाषा शोभना सुरेश
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