(कुमार आनंद)
अहमदाबाद, 19 मार्च (भाषा) गुजरात के पुराने अहमदाबाद शहर में विरासत के तौर पर चिह्नित 2,692 निजी स्वामित्व वाली और संस्थागत इमारतों के जीर्णोद्धार के लिए सात साल पहले अहमदाबाद नगर निगम (एएमसी)द्वारा शुरू की गई प्रोत्साहन योजना का लाभ अबतक केवल 76 इमारतों के मालिकों ने ही लिया है। एक अधिकारी ने यह जानकारी दी।
प्रशासन ने कहा कि इस ठंडी प्रतिक्रिया की वजह जागरूकता में कमी और कागजी कार्रवाई पूरी करने में लगने वाला समय है।
उन्होंने बताया कि इन ढांचों में अधिकतर आवासीय इमारतें है जो 600 साल पुराने इस शहर को एक विशेष पहचान देती हैं और इन्होंने वर्ष 2017 में अहमदाबाद को यूनेस्को की मान्यता दिलाने में मदद की।
पुराना अहमदाबाद भारत का पहला शहर है जिसे वर्ष 2017 में यूनेस्को की विश्व विरासत शहर की सूची में शामिल किया गया।
नगर निकाय के विरासत विभाग के निदेशक आशीष त्राम्बडिया ने बताया, ‘‘ एएमसी ने वर्ष 2011-14 के बीच स्थानीय रूप से अहम सामाजिक और वास्तुकला महत्व की इमारतों का चुनाव करने के लिए सर्वेक्षण किया।इसका उद्देश्य पुराने शहर के सांस्कृतिक मूल्यों को बहाल और पोषित करना था और अहमदाबाद को वैकल्पिक विश्व विरासत सूची के नामांकन में स्थान दिलाना था।’’
उन्होंने कहा कि भारत में पहली बार निजी इमारतों की पहचान इमारत नियमन द्वारा संरक्षण के लिए की गई और उनके संरक्षण की व्यवस्था की गई।
उन्होंने बताया कि 449 संस्थागत इमारतों सहित 2,692 निजी ढांचों की पहचान की गई और श्रेणीवार उनके ‘विरासत मूल्य’ का आकलन किया गया।
त्राम्बडिया ने बताया कि मालिकों को स्थानांतरण विकास अधिकार (टीडीआर) की पेशकश ढांचों की विरासत मूल्यों को बहाल करने के लिए प्रोत्साहन के तौर पर की गई और प्रक्रिया को उनके अनुकूल बनाया गया।
उन्होंने बताया, ‘‘वर्ष 2015-16 में टीडीआर नीति लाने के बाद वर्ष 2019 में एकल खिड़की व्यवस्था की शुरुआत की गई। इन ढांचों के मालिकों से एएमसी को अबतक 76 आवेदन मिले हैं।’’
उन्होंने स्वीकार किया कि कम आवेदन आए हैं। उन्होंने इसकी वजहों का जिक्र किया जिनमें जागरूकता की कमी, संपत्ति के मालिकाना हक को एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक स्थानांतरित करने की लंबी कागजी प्रक्रिया और संपत्तियों के मालिक तक पहुंच का आसान नहीं होना शामिल है।
संपत्तियों के किराए पर होने या खाली होने पर भी उनके असली मालिक तक पहुंचना चुनौती है क्योंकि वे कहीं और रहते हैं।
उन्होंने बताया कि प्रथम और द्वितीय श्रेणी की संपत्ति की स्थिति में जितनी जमीन पर इमारत बनी है उसकी कीमत का 50 प्रतिशत वित्तीय प्रोत्साहन के तौर पर देने का प्रावधान है। अन्य श्रेणियों की संपत्तियों के मामले में यह राशि 30 प्रतिशत है।
भाषा धीरज संतोष
संतोष
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