scorecardresearch
Tuesday, 28 May, 2024
होमदेशगृह मंत्रालय के दवाब के बाद मिजोरम 'अवैध प्रवासियों' के बायोमेट्रिक्स डेटा इकट्ठा करने की तैयारी में

गृह मंत्रालय के दवाब के बाद मिजोरम ‘अवैध प्रवासियों’ के बायोमेट्रिक्स डेटा इकट्ठा करने की तैयारी में

हालांकि, मिजोरम सरकार की शरणार्थियों को वापस म्यांमार भेजने की कोई योजना नहीं है और उसने उनकी सहायता के लिए केंद्र से पैसे की मांग की है. मिजोरम में लगभग 35,000 शरणार्थी है.

Text Size:

आइजोल: केंद्रीय गृह मंत्रालय के आदेश के बाद मिजोरम सरकार राज्य भर में एक विशेष अभियान चलाकर “अवैध प्रवासियों” के बायोमेट्रिक विवरण एकत्र करने की तैयारी में है. मिजोरम म्यांमार के साथ 510 किलोमीटर लंबी सीमा साझा करता है. गृह मंत्रालय ने इसके लिए मिजोरम सरकार को 30 सितंबर तक का वक्त दिया है लेकिन राज्य सरकार ने केंद्र सरकार को बता दिया है कि 30 सितंबर की समय सीमा को पूरा करना “मुश्किल” होगा. दिप्रिंट को इसकी जानकारी मिली है.

यह एक बड़ा कदम है क्योंकि मिजोरम के मुख्यमंत्री ज़ोरमथांगा ने म्यांमार से शरणार्थियों को निर्वासित करने की केंद्र सरकार की सलाह का लगातार विरोध किया है. फरवरी 2021 में म्यांमार में सैन्य तख्तापलट हुआ था जिसने आंग सान सू की की चुनी हुई सरकार को गिरा दिया. तख्तापलट के बाद देश में हिंसक विरोध प्रदर्शन शुरू हुआ था जिसके बाद लोगों का पलायन शुरू हुआ था.  

मिजोरम के मुख्यमंत्री ज़ोरमथांगा का कहना है कि केंद्र सरकार को शरणार्थियों को राजनीतिक शरण देने की संभावना पर विचार करनी चाहिए. 

गुरुवार को दिप्रिंट से बातचीत के दौरान ज़ोरमथांगा ने कहा कि मिजोरम सरकार का म्यांमार से शरणार्थियों को निर्वासित न करने का निर्णय 1971 के बांग्लादेश मुक्ति युद्ध के दौरान भारत सरकार द्वारा लिए गए निर्णय के समान था, जब लाखों शरणार्थी भारत में आए थे.

ज़ोरमथांगा ने कहा, “मैंने केंद्रीय गृह सचिव को तीन दिन पहले भी टेलीफोन पर यह बात बताई थी. मैंने उनसे कहा कि अगर पूर्वी पाकिस्तान के लोगों को आश्रय और मदद दी गई थी, तो आप बर्मा के लोगों को क्यों नहीं दे सकते. अब यही फॉर्मूला अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लागू करना होगा.”

अच्छी पत्रकारिता मायने रखती है, संकटकाल में तो और भी अधिक

दिप्रिंट आपके लिए ले कर आता है कहानियां जो आपको पढ़नी चाहिए, वो भी वहां से जहां वे हो रही हैं

हम इसे तभी जारी रख सकते हैं अगर आप हमारी रिपोर्टिंग, लेखन और तस्वीरों के लिए हमारा सहयोग करें.

अभी सब्सक्राइब करें

दूसरी ओर, मणिपुर के मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह ने राज्य में जारी हिंसा के लिए म्यांमार के “घुसपैठियों” को जिम्मेदार ठहराया है और उन पर नशीले पदार्थों के व्यापार में शामिल होने का आरोप लगाया है. ये शरणार्थी मिज़ोस और कुकी के साथ जातीय संबंध साझा करते हैं.

3 मई को, मणिपुर में गैर-आदिवासी मेइतेई और आदिवासी कुकी के बीच जातीय झड़पें हुईं. तब से जारी हिंसा में 150 से अधिक लोग मारे गए हैं और कई हजार लोग विस्थापित हुए हैं.

दिप्रिंट से बात करते हुए, मिजोरम सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि बायोमेट्रिक्स एकत्र करने के निर्णय के बावजूद, लगभग 35,000 की संख्या वाले शरणार्थियों को म्यांमार वापस भेजने की कोई तत्काल योजना नहीं थी. इसके बजाय, राज्य सरकार उन्हें बेहतर जीवन के लिए केंद्र सरकार से धन की मांग कर रही है.

अधिकारी ने कहा, “मिजोरम सरकार को लगता है कि शरणार्थियों के इस समूह को सीएए (नागरिकता (संशोधन) अधिनियम, 2019) के तहत कवर किया गया होता तो उन्हें निर्वासन का सामना नहीं करना पड़ता.”

सीएए में- जिसके नियम अभी तक अधिसूचित नहीं किए गए हैं- पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से उत्पीड़न के कारण भाग रहे हिंदुओं, पारसियों, सिखों, बौद्धों, जैनियों और ईसाइयों को नागरिकता देने का प्रावधान है.

अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर दिप्रिंट से कहा, “लेकिन राज्य ने गृह मंत्रालय के आदेश का पालन करने और म्यांमार से आए शरणार्थियों के बायोमेट्रिक्स एकत्र करने का निर्णय लिया है. हम राज्य सरकार के कर्मचारियों को ट्रेनिंग देने की योजना पर काम कर रहे हैं, जो इस अभियान का नेतृत्व करेंगे. उनका प्रशिक्षण पिछले सप्ताह आयोजित किया गया था.”

इस संबंध में एक पायलट प्रैक्टिस के लिए लुंगलेई जिले में स्थित एक शरणार्थी शिविर में यह पहले ही हो चुका है. अधिकारी ने दिप्रिंट से कहा, “जो डेटा एकत्र किया गया है उसकी अभी समीक्षा की जा रही है. लुंगलेई से मिले अनुभव के आधार पर इस अभियान को बढ़ाया जाएगा. हालांकि, यह संभावना नहीं है कि हम गृह मंत्रालय के निर्देशानुसार इस साल 30 सितंबर तक अभियान पूरा कर पाएंगे.”


यहां पढ़ें: भारत के सॉफ्ट पावर प्रोजेक्शन, सांस्कृतिक कूटनीति में मदद के लिए समन्वय समिति बनाना जरूरी: हाउस पैनल


क्या कहता है गृह मंत्रालय का आदेश

आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार, मणिपुर और मिजोरम में “अवैध प्रवासियों” के “जीवनी और बायोमेट्रिक विवरण” को कैप्चर करने का निर्णय 3 मई को मणिपुर में हिंसा भड़कने से कुछ दिन पहले, 28 अप्रैल को एमएचए द्वारा लिया गया था.

गृह मंत्रालय ने दोनों राज्यों के मुख्य सचिव को लिखी चिट्ठी में कहा, “मणिपुर और मिजोरम राज्यों में अवैध प्रवासियों के बायोमेट्रिक डेटा को कैप्चर करने का अभियान सितंबर 2023 के अंत तक पूरा किया जाना है. मणिपुर और मिजोरम की राज्य सरकारों को जल्दी से योजना तैयार करने और बायोमेट्रिक कैप्चर शुरू करने की आवश्यकता है.” 

मणिपुर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के विधायक राजकुमार इमो सिंह द्वारा सोशल मीडिया पर शेयर किए गए आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार, इसने 22 जून को राज्यों को एक रिमाडंडर भी भेजा.

मिजोरम सरकार के एक अन्य अधिकारी ने कहा कि संयुक्त सचिव स्तर के एक अधिकारी ने अभियान की प्रगति की समीक्षा के लिए 5 जुलाई को इस संबंध में मिजोरम में एक बैठक की थी.

मिजोरम के अधिकारी ने दिप्रिंट ने बताया, “तभी हमने अपनी स्थिति बताई कि गृह मंत्रालय द्वारा निर्धारित 30 सितंबर की समय सीमा को पूरा करना बेहद मुश्किल होगा. आख़िर इस साल के अंत में राज्य में चुनाव भी होने हैं जिसके लिए प्रशासनिक मशीनरी व्यस्त हो गई है. गृह मंत्रालय के अधिकारी ने हमें बताया कि वह समय सीमा बढ़ाने के लिए अधिकृत नहीं हैं.”

(संपादन: ऋषभ राज)

(इस ख़बर को अंग्रेज़ी में पढ़नें के लिए यहां क्लिक करें)


यह भी पढ़ें: ‘INDIA में साथ, राज्य में मनमुटाव’, पंजाब में कांग्रेस और AAP नेताओं के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी


 

share & View comments