Sunday, 14 August, 2022
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AAP नेता संजय सिंह और BJP के वरुण गांधी ने अग्निपथ पर लगाया जातिवाद का आरोप, सेना ने बताया अफवाह

आप नेता संजय सिंह ने ट्वीट कर कहा था. 'भारत के इतिहास में पहली बार 'सेना भर्ती ' में जाति पूछी जा रही है. मोदी जी आपको 'अग्निवी' बनाना है या 'जातिवीर'.'

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नई दिल्ली: आम आदमी पार्टी के नेता संजय सिंह और बीजेपी के वरुण गांधी ने अग्निपथ योजना में जाति व धर्म प्रमाणपत्र मांगे जाने पर सवाल उठाए थे. जिसके बाद अब रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का बयान आया है जिसमें उन्होंने कहा है कि पहले की प्रैक्टिस में किसी भी तरह का कोई बदलाव नहीं किया गया है.

आप नेता संजय सिंह ने ट्वीट कर कहा था. ‘भारत के इतिहास में पहली बार ‘सेना भर्ती ‘ में जाति पूछी जा रही है. मोदी जी आपको ‘अग्निवी’ बनाना है या ‘जातिवीर’.’

इसी ट्वीट के कुछ घंटों बाद वरुण गांधी ने भी इस पर सवाल उठाए. उसी स्क्रीनशॉट को साझा करते हुए वरुण गांधी ने लिखा, ‘सेना में किसी भी तरह का कोई आरक्षण नहीं है पर अग्निपथ की भर्तियों में जाति प्रमाण पत्र मांगा जा रहा है. क्या अब हम जाति देख कर किसी की राष्ट्रभक्ति तय करेंगे? सेना की स्थापित परंपराओं को बदलने से हमारी राष्ट्रीय सुरक्षा पर जो प्रभाव पड़ेगा उसके बारे में सरकार को सोचना चाहिए.’

जून में रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने सेनाभर्ती की योजना अग्निपथ की घोषणा की थी. इस स्कीम के तहत 4 सालों के लिए अग्निवीरों की भर्ती की जाएगी. 4 सालों के बाद केवल 25 प्रतिशत लोगों को ही सेवा में रखा जाएगा. इस स्कीम को लेकर पूरे भारत में प्रदर्शन किए गए थे.

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अब फिर से इस स्कीम को लेकर उठे जाति विवाद पर संजय सिंह और वरुण गांधी की टिप्पणियों को वरिष्ठ सेना आधिकारियों ने खारिज किया है. उन्होंने कहा कि यह एक गैर-जरूरी विवाद है. जरूरत पड़ने पर जाति और धर्म प्रमाण पत्र जमा करने की प्रक्रिया हमेशा से रही है.

मामले से जुड़े एक एक सेना के अधिकारी ने कहा, ‘इस संबंध में अग्निवीर भर्ती योजना के लिए कोई बदलाव नहीं हुआ है.’

सेना के अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रशिक्षण के दौरान मरने वाले और प्रशिक्षण के दौरान मरने वाले सैनिकों का अंतिम संस्कार करने के लिए भी धर्म प्रमाण पत्र की आवश्यकता होती है.

उन्होंने कहा कि अग्निपथ के तहत भर्ती पहले के उलट अखिल भारतीय और सभी वर्गों में होगी, जब विभिन्न रेजिमेंटों द्वारा विशिष्ट जाति- और वर्ग-आधारित आवश्यकताओं को शामिल किया गया था.

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने संसद के बाहर इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह अफवाह थी कि जाति प्रमाण पत्र की आवश्यकता नई है.

उन्होंने कहा, ‘स्वतंत्रता से पहले के युग के बाद से मौजूद पुरानी व्यवस्था चल रही है. कोई बदलाव नहीं किया गया है. पुरानी व्यवस्था को जारी रखा जा रहा है.’

सेना ने 2019 की भर्ती प्रक्रिया से प्रो फॉर्म भी जारी किया, जिसमें तहसीलदार / एसडीएम / जिला मजिस्ट्रेट द्वारा जारी उम्मीदवार की तस्वीर के साथ एक जाति प्रमाण पत्र चिपकाया गया था. एक धर्म प्रमाण पत्र, यदि धर्म सिख / हिंदू / मुस्लिम / के रूप में है. जाति प्रमाण पत्र में ईसाई का उल्लेख नहीं है.

भारतीय सेना में रेजिमेंटल सिस्टम का इतिहास

भारतीय सेना ने हमेशा 225 से अधिक वर्षों से यूनिट एकजुटता के निर्माण के लिए रेजिमेंटल प्रणाली का पालन किया है.

उत्तरी सेना के पूर्व कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल एच.एस. पनाग ने पिछले महीने लिखा था कि अपने शासन की रक्षा के लिए, अंग्रेजों ने ‘मार्शल रेस’ की अवधारणा को बढ़ावा दिया और रेजिमेंटल सिस्टम जाति/धर्म/क्षेत्र पर आधारित था.

उन्होंने कहा, यह डिफ़ॉल्ट रूप से है, सामंजस्य भी उसी से जुड़ गया। यह प्रणाली हमारे संविधान के अनुरूप नहीं है और डिफ़ॉल्ट रूप से आरक्षण के कारण योग्यता विरोधी भी है.’

‘हालांकि अग्निपथ योजना का उद्देश्य इससे दूर जाना है.’

उन्होंने कहा, ‘अग्निपथ को अखिल भारतीय, सर्व-श्रेणी और योग्यता आधारित भर्ती योजना बनाकर, मोदी सरकार और सशस्त्र बलों ने रेजिमेंट के प्रति हमारे दृष्टिकोण में आमूलचूल परिवर्तन लाया है.’

‘नई प्रणाली रेजिमेंटल प्रणाली के साथ जारी रहेगी, जहां आप अपनी पूरी सेवा जीवन के लिए सेवा करते हैं लेकिन यह जाति, धर्म या क्षेत्र से प्रेरित नहीं होगा.’


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