नयी दिल्ली, 24 फरवरी (भाषा) राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली की आम आदमी पार्टी (आप) नीत सरकार ने अधिकारियों से कहा कि वे उपराज्यपाल वी के सक्सेना से सीधे निर्देश लेना बंद करें और उनके किसी भी ऐसे आदेश की सूचना संबंधित मंत्री को तत्काल दें। दिल्ली सरकार का यह निर्देश उसके और उपराज्यपाल कार्यालय के बीच टकराव की नयी वजह बन सकता है। सूत्रों ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।
एक सरकारी बयान के अनुसार, उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा कि सरकार ने चेतावनी दी है कि उपराज्यपाल से सीधे प्राप्त ऐसा कोई भी आदेश संविधान और उच्चतम न्यायालय के निर्देशों का उल्लंघन है।
उन्होंने कहा कि वैसे आदेशों के क्रियान्वयन को गंभीरता से लिया जायेगा, जो संविधान एवं देश के शीर्ष अदालत के निर्देशों का उल्लंघन है।
दिल्ली की आम आदमी पार्टी नीत सरकार और उपराज्यपाल कार्यालय के बीच विभिन्न मुद्दों को लेकर तकरार जारी है। इनमें सरकारी स्कूल के शिक्षकों को प्रशिक्षण के लिए फिनलैंड भेजने के सरकार के प्रस्ताव समेत कई अन्य मुद्दे शामिल हैं ।
पूर्व में भी कई मौकों पर आप नेताओं ने उपराज्यपाल पर आरोप लगाया है कि वह दिल्ली की निर्वाचित सरकार को दरकिनार कर अधिकारियों को सीधे आदेश दे रहे हैं।
सेवाओं पर नियंत्रण को लेकर केंद्र और दिल्ली सरकार के बीच विवाद पर सुनवाई उच्चतम न्यायालय कर रहा है।
बयान में कहा गया है, ‘‘केजरीवाल नीत दिल्ली सरकार ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे भारत के संविधान और उच्चतम न्यायालय के निर्देशों का सम्मान करते हुये दिल्ली के उपराज्यपाल से सीधे आदेश लेना बंद करें।’’
इसमें कहा गया है, ‘‘सभी मंत्रियों ने अपने-अपने विभागों के सचिवों को इस संबंध में पत्र लिख कर संविधान, कार्य संचालन नियम (टीबीआर) और उच्चतम न्यायालय की संविधान पीठ के फैसले का सख्ती से पालन करने का निर्देश दिया है।’’
इसमें कहा गया है, ‘‘सभी सचिवों को निर्देश दिया गया है कि उपराज्यपाल द्वारा दिए गए किसी भी प्रत्यक्ष आदेश की जानकारी संबंधित प्रभारी मंत्री को दी जाए।’’
इस बीच, सूत्रों ने दावा किया कि निर्वाचित सरकार को जानकारी दिए बिना उप राज्यपाल विभागों के सचिवों को आदेश दे रहे हैं, जो कार्य संचालन नियमावली की नियम संख्या 49-50 और उच्चतम न्यायालय के आदेश का उल्लंघन है।
सूत्र ने दावा किया, ‘‘निर्देश में कहा गया है कि उपराज्यपाल के ऐसे अवैध प्रत्यक्ष आदेश को लागू करना कार्य संचालन नियमावली की नियम संख्या 57 का उल्लंघन माना जाएगा।
भाषा रंजन दिलीप
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