(लक्ष्मी गोपालकृष्णन)
तिरुवनंतपुरम, पांच जून (भाषा) केआर उषाकुमारी पिछले हफ्ते गर्मी की छुट्टियों के बाद स्कूल खुलने पर दोबारा वहां पहुंचीं, ठीक उसी तरह जैसे वह पिछले दो दशकों से करती आई थीं, लेकिन इस बार उनके लिए चीजें बहुत अलग थीं।
दरअसल, नए स्कूल में उनके हाथों में किताबों, डस्टर और चॉक के बजाय झाड़ू, फर्श साफ करने वाला स्क्रबर व पोछा थमा दिया गया था। जी हां, उषाकुमारी के पास इतने वर्षों से मौजूद ‘शिक्षक’ का सम्मानित तमगा अब हमेशा के लिए खो चुका था।
जिले के सुदूर कुन्नथुमाला में एक पहाड़ी आदिवासी स्कूल में 20 वर्षों तक शिक्षण कार्य करने वाली उषाकुमारी अब शिक्षिका नहीं रह गई हैं। उन्हें केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम के एक सरकारी स्कूल में अंशकालिक सफाई कर्मचारी बना दिया गया है।
दरअसल, वह 344 ‘विद्या स्वयंसेवकों’ में से एक थीं, जो आदिवासी और अन्य पिछड़े इलाकों में संचालित मल्टी-ग्रेड लर्निंग सेंटर (एमजीएलसी) में काम करते थे। इन लोगों को अब राज्य सरकार के पुनर्वास कार्यक्रम के तहत विभिन्न सरकारी स्कूलों में अंशकालिक या पूर्णकालिक सफाईकर्मी के रूप में नियुक्त किया गया है।
हालांकि, उनकी आंखों में आंसू थे, लेकिन परिपक्व उषाकुमारी ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा कि उन्हें कभी भी सफाईकर्मी होने में शर्म नहीं आई और उनका मानना है कि हर काम की अपनी गरिमा होती है।
उषाकुमारी ने कहा, ‘‘मेरे आदिवासी स्कूल में भी सहयाक के नहीं आने पर मैंने कई दिनों तक परिसर में झाड़ू लगाया और कक्षा में धूल झाड़ी। मैंने बच्चों को पढ़ाने के अलावा कितने दिनों तक खाना बनाया है। मैं अपनी नयी नौकरी को एक वरदान मानती हूं। केवल एक ही चीज है कि मुझे अपने शिक्षक होने के गौरव और अपने छात्रों की याद आती है।’’
आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, इन ‘विद्या स्वयंसेवकों’ की मदद करने के लिए ये नियुक्तियां की गई थीं, वरना वे बेरोजगार हो जाते, क्योंकि इस साल 31 मार्च को राज्य सरकार ने सभी एमजीएलसी को बंद कर दिया था।
उन्होंने कहा कि वहां पढ़ने वाले बच्चों को बेहतर शिक्षा सुविधाएं और नजदीकी पब्लिक स्कूलों में समायोजित करने के इरादे से इन केंद्रों को बंद कर दिया गया था।
प्रधान सचिव (सामान्य शिक्षा) मोहम्मद हनीश द्वारा जारी एक हालिया सरकारी आदेश में कहा गया है कि 344 ‘विद्या स्वयंसेवक’, जो 10 वर्षों से अधिक समय से अनुबंध पर काम कर रहे थे, उन्हें उनकी सहमति एवं वरिष्ठता के आधार पर सामान्य शिक्षा विभाग के अंतर्गत अंशकालिक आकस्मिक सेवक (पीटीसीएम)/पूर्णकालिक सेवक (एफटीएम) के पद पर नियुक्त किया जाएगा।
सूत्रों के मुताबिक, कम से कम 50 ‘विद्या स्वयंसेवकों’ को नया शैक्षणिक सत्र शुरू होने पर राज्य भर के विभिन्न सरकारी स्कूलों में अंशकालिक या पूर्णकालिक सफाईकर्मी के रूप में नौकरी मिली है।
उषाकुमारी ने कहा कि वह और कई अन्य ‘विद्या स्वयंसेवक’ लंबे समय से मांग कर रहे हैं उनकी अनुबंध की नौकरी को नियमित किया जाए और उन्हें एक सरकारी कर्मचारी का लाभ दिया जाए।
चूंकि, राज्य में शिक्षकों के रूप में उन्हें नियुक्त करने के लिए तकनीकी सीमाएं आड़े आ रही थीं, क्योंकि कई ‘विद्या स्वयंसेवकों’ ने कक्षा 10 या कक्षा 12 तक ही पढ़ाई थी, इसलिए राज्य सरकार ने उन्हें अंशकालिक या पूर्णकालिक सफाई कर्मचारी के रूप में 23,000-50,200 रुपये के वेतनमान के साथ नियुक्त करने का निर्णय लिया है।
उषाकुमारी एक जून से पास के पेरुर्ककाडा में पीएसएनएम माध्यमिक स्कूल में नियुक्त हुई हैं। उन्होंने बताया कि ‘विद्या स्वयंसेवक’ के रूप में उनका मासिक वेतन सिर्फ 18,500 रुपये था और वह भी नियमित नहीं था।
उषाकुमारी ने कहा, ‘‘इसीलिए मैं अपनी सफाईकर्मी की नौकरी को एक वरदान के रूप में देख रही हूं। मैं अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए अपने परिवार पर निर्भर नहीं रहना चाहती। मैं उन पर बोझ नहीं बनना चाहती।’’
भाषा सुरभि पारुल
पारुल
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