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Sunday, 18 January, 2026
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दिल्ली में एएसआई की फर्जी वेबसाइट बनाकर ठगी करने वाले गिरोह का भंडाफोड़, दो गिरफ्तार

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नयी दिल्ली, 20 दिसंबर (भाषा) दिल्ली पुलिस ने सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी करने वाले एक गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए दो लोगों को गिरफ्तार किया है। अधिकारियों ने शनिवार को बताया कि आरोपियों ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की एक फर्जी वेबसाइट बनाकर देशभर के छात्रों को चपत लगाने की साजिश रची थी।

पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपियों की पहचान जयपुर निवासी कुलदीप (30) और पीयूष (25) के रूप में हुई है। कुलदीप बी. कॉम स्नातक है और एलएलबी की पढ़ाई कर रहा है, जबकि पीयूष बी टेक (कंप्यूटर साइंस) स्नातक है और उसने ही यह फर्जी वेबसाइट बनाई थी।

पुलिस उपायुक्त (आईएफएसओ) विनीत कुमार ने एक बयान में बताया कि आरोपियों ने एएसआई का एक फर्जी भर्ती पोर्टल बनाया और उस पर गैर-मौजूद सरकारी पदों का विज्ञापन दिया।

अधिकारी ने बताया, “इस गिरोह का भंडाफोड़ तब हुआ जब वे (अभ्यर्थी) साक्षात्कार के चरण तक पहुंचने वाले थे, जहां कथित तौर पर उम्मीदवारों से चयन के बदले रिश्वत मांगी जानी थी।”

कुमार ने बताया कि उन्होंने संस्कृति मंत्रालय के तहत एएसआई में ‘क्यूरेटर’ के सात और ‘जूनियर असिस्टेंट’ के 84 पदों के लिए रिक्तियां निकाली थीं। उन्होंने बताया कि जांच में सामने आया कि फर्जी पोर्टल के लिंक कॉलेज समूहों, सोशल मीडिया और मैसेजिंग ऐप पर फैलाए गए थे, जिससे सैकड़ों छात्रों ने आवेदन किया।

अधिकारी ने बताया कि वेबसाइट को आधिकारिक एएसआई और मंत्रालय के पोर्टल की तरह डिजाइन किया गया था, जिसमें समान लोगो और कलर स्कीम का उपयोग किया गया था ताकि धोखाधड़ी का पता न चले।

पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने करीब 150 उम्मीदवारों को लिखित परीक्षा के लिए शॉर्टलिस्ट किया था।

उसने बताया कि विश्वसनीयता बढ़ाने के लिए आरोपियों ने जयपुर में एक प्रतिष्ठित परीक्षा केंद्र बुक किया और पेशेवर तरीके से परीक्षा भी आयोजित की।

पुलिस ने बताया कि उनकी योजना करीब आधे उम्मीदवारों को सफल घोषित कर साक्षात्कार के लिए बुलाने और फिर ‘गारंटीशुदा चयन’ व नियुक्ति पत्र के नाम पर पैसे वसूलने की थी।

हालांकि, दिल्ली पुलिस की आईएफएसओ इकाई ने तकनीकी निगरानी के आधार पर छापेमारी कर आरोपियों को समय रहते दबोच लिया।

पुलिस ने उनके पास से मोबाइल फोन, लैपटॉप, कंप्यूटर और पासबुक बरामद की है। मामले में अन्य सहयोगियों की पहचान और पैसे के लेनदेन की जांच जारी है।

भाषा सुमित प्रशांत

प्रशांत

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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