हैदराबाद, 17 अप्रैल (भाषा) तेलंगाना में कांग्रेस सरकार द्वारा 2024-25 में कराए गए जाति सर्वेक्षण में 18 वर्ष से कम उम्र की लगभग पांच प्रतिशत यानी 2.16 लाख लड़कियों के विवाह होने की जानकारी सामने आई है।
हाल ही में सार्वजनिक की गई सर्वे रिपोर्ट में कहा गया है कि तेलंगाना में औसतन महिला-पुरुष अनुपात 0.98 है। दिलचस्प बात यह है कि गोंड और कोया (दोनों अनुसूचित जनजातियां), तथा माला और मडिगा (दोनों अनुसूचित जातियां) में यह अनुपात 1 से अधिक है, जबकि अयंगर/अय्यर, जैन, राजू और सामान्य श्रेणी के मुसलमानों जैसे सामान्य वर्गों में यह अनुपात राज्य के औसत 0.98 से काफी कम पाया गया है।
रिपोर्ट में कहा गया है, “तेलंगाना में बालिका विवाह के संबंध में पाया गया कि पांच प्रतिशत लड़कियां या 18 वर्ष से कम उम्र की 2.16 लाख लड़कियों की शादी हो चुकी है। 18 वर्ष से कम उम्र में विवाहित लड़कियों का सबसे अधिक अनुपात अयंगर/अय्यर समुदाय में (21.2 प्रतिशत) पाया गया-जो राज्य के औसत से लगभग पांच गुना अधिक है, जबकि जैन समुदाय में यह आंकड़ा 11 प्रतिशत है, जो राज्य के औसत से लगभग दोगुना है।”
तेलंगाना सामाजिक, आर्थिक, शैक्षिक, रोजगार, राजनीतिक और जाति (एसईईईपीसी) सर्वे-2024 के अनुसार राज्य में लगभग दो-तिहाई महिलाएं माध्यमिक शिक्षा के बाद आगे पढ़ाई नहीं कर पाती। सबसे अधिक पिछड़ेपन के स्तर पर, अनुसूचित जनजाति कोलम समुदाय की महिलाओं में 83 प्रतिशत ऐसी हैं जो माध्यमिक शिक्षा के बाद आगे नहीं बढ़ पातीं। यह स्थिति आदिवासी लड़कियों के बीच शिक्षा तक अत्यंत कमजोर पहुंच और बेहद खराब शैक्षिक परिणामों को दर्शाती है।
वहीं, ब्राह्मण समुदाय की केवल 36.2 प्रतिशत महिलाएं ही माध्यमिक शिक्षा से आगे नहीं बढ़ पातीं, जो पिछड़ेपन के पैमाने पर सबसे कम है। राजू, जैन, कोमाती और कम्मा समुदायों की महिलाएं शैक्षिक उपलब्धि के मामले में इसके करीब हैं। इन सभी समुदायों की महिलाओं की बेहतर शैक्षिक उपलब्धियां उनके ऐतिहासिक रूप से मजबूत सामाजिक-आर्थिक स्थिति को दर्शाती हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि इस शैक्षिक अंतर को पाटने के लिए विशेष उप-जातियों पर केंद्रित शैक्षिक हस्तक्षेप की आवश्यकता है।
भाषा
राखी पवनेश
पवनेश
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