नयी दिल्ली, एक मार्च (भाषा) देश में 99 फीसदी महिलाओं को गर्भपात कानूनों में किए गए बदलावों के बारे में जानकारी नहीं है। ‘गर्भ का चिकित्सकीय समापन’ (एमटीपी), अधिनियम के बारे में जागरूकता को लेकर हाल में किए गए एक अध्ययन में यह दावा किया गया है।
अध्ययन में यह भी दावा किया गया कि जिन तीन महिलाओं का साक्षात्कार लिया गया, उनमें से एक ने गर्भपात को स्वास्थ्य का अधिकार नहीं माना या इसके बारे में अनिश्चित थीं।
गैर-सरकारी संगठन ‘फाउंडेशन फॉर रिप्रोडक्टिव हेल्थ सर्विसेज इंडिया’ (एफआरएचएस इंडिया) द्वारा कराए गए सर्वेक्षण में पाया गया कि 32 प्रतिशत उत्तरदाता गर्भपात के कानूनी अधिकार के बारे में अनभिज्ञ थीं जबकि 95.5 प्रतिशत महिलाओं को एमटीपी (संशोधन) अधिनियम, 2021 के बारे में कोई जानकारी नहीं थी।
नैदानिक परिवार नियोजन सेवाएं प्रदान करने वाले एफआरएचएस इंडिया ने एमटीपी अधिनियम और सुरक्षित गर्भपात से संबंधित नियमों के बारे में जागरूकता के स्तर को लेकर किए गए अध्ययन के निष्कर्ष हाल में जारी किए हैं।
एफआरएचएस ने यह अध्ययन दिल्ली, महाराष्ट्र, राजस्थान और उत्तर प्रदेश में किया था।
एफआरएचएस इंडिया में कार्यक्रम एवं भागीदारी मामलों की निदेशक देबंजना चौधरी ने कहा,‘‘एमटीपी अधिनियम में करीब डेढ़ साल पहले संशोधन किया गया था, लेकिन गर्भपात कराने वाली महिलाएं इस अधिनियम में किए गए बदलावों से अनभिज्ञ हैं। हमने पाया कि राजस्थान में सेवा प्रदाता (डॉक्टर) भी इस बदलाव के बारे में नहीं जानते कि भ्रूण के गर्भपात की अवधि 20 सप्ताह से बढ़ाकर 24 सप्ताह कर दी गई है।’’
अध्ययन में कहा गया कि यह ‘‘चिंताजनक’’ है कि 99 प्रतिशत महिलाओं को एमटीपी अधिनियम में बदलाव के बारे में नहीं पता है।
भाषा शफीक नेत्रपाल
नेत्रपाल
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