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Monday, 5 January, 2026
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जतिन मेहता केस: 7 साल बाद परिवार को भगोड़ा घोषित करने पर ईडी का मंथन

लंदन में रहने वाला मेहता परिवार कई बैंक घोटालों से जुड़ा है. सीबीआई ने जतिन मेहता के खिलाफ 16 मामले दर्ज किए हैं, जबकि उसकी पत्नी सोनिया और बेटे सूरज व विशाल पर करीब 12 धोखाधड़ी के मामले हैं.

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नई दिल्ली: प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) लंदन में रहने वाले हीरा कारोबारी जतिन मेहता की पत्नी और उसके दो बेटों के खिलाफ भगोड़ा आर्थिक अपराधी (एफईओ) कानून के तहत कार्रवाई शुरू करने पर विचार कर रहा है. यह कदम अदालत की कार्यवाही में उनके शामिल न होने के कारण उठाया जा सकता है. दिप्रिंट को इस बारे में जानकारी मिली है.

एफईओ कानून के तहत, अगर किसी आरोपी को भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित कर दिया जाता है, तो कानून लागू करने वाली नोडल एजेंसी ईडी, अदालत की मंजूरी के बाद उसकी संपत्ति जब्त कर लेती है. यह कानून 2018 में कई बड़े बैंक घोटालों और आरोपियों के देश छोड़कर भाग जाने के बाद लाया गया था.

ईडी पहले ही 2014 में सामने आए बड़े बैंक घोटालों के बाद, विंसम डायमंड्स एंड ज्वेलरी (WDJL) और फॉरएवर प्रेशस ज्वेलरी एंड डायमंड्स (FPJDL) के पूर्व मालिक जतिन मेहता के खिलाफ इस कानून के तहत आवेदन दे चुकी है.

ईडी के एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर दिप्रिंट से कहा, “हम सीबीआई द्वारा साझा की गई जानकारियों की जांच कर रहे हैं. उसके आधार पर उनके परिवार के सदस्यों के खिलाफ एफईओ कानून के तहत आवेदन दिया जाएगा. जतिन मेहता के खिलाफ 2019 में दिया गया ऐसा ही एक आवेदन फिलहाल मुंबई की एक अदालत में चल रहा है.”

ईडी जतिन मेहता की पत्नी सोनिया और बेटों सूरज व विशाल के खिलाफ यह कदम उठाने की योजना बना रही है. इन तीनों पर सीबीआई ने जतिन मेहता और उसकी कंपनियों से जुड़े बैंक धोखाधड़ी के मामलों में आरोप लगाए हैं.

इस पर प्रतिक्रिया मांगने पर जतिन मेहता के एक वकील विक्रम सुतारिया ने दिप्रिंट से कहा, “वकील अटकलों पर जवाब नहीं दे सकते, लेकिन पहली नज़र में एफईओ कानून का जतिन मेहता के परिवार के सदस्यों पर कोई लागू होना नहीं दिखता.”

कुल मिलाकर, गुजरात के रहने वाले जतिन मेहता के खिलाफ सीबीआई ने 2014 से 2019 के बीच 16 मामले दर्ज किए. इन मामलों में उस पर साजिश रचने और भारतीय बैंकों के एक समूह को करीब 7,000 करोड़ रुपये का नुकसान पहुंचाने का आरोप है.

समय के साथ, सीबीआई ने इन मामलों में 12 चार्जशीट दाखिल की हैं, जिनमें से 10 इसी साल दाखिल हुई हैं. वहीं, ईडी ने 2014 से अब तक मेहता परिवार के खिलाफ सात ईसीआईआर (Enforcement Case Information Report) दर्ज की हैं और अब तक एक अभियोजन शिकायत या चार्जशीट दाखिल की है.

सामान्य तौर पर, एजेंसियों का आरोप है कि मेहता ने यूएई में कई शेल कंपनियां बनाईं और बैंकों से फंडिंग पाने के लिए फर्जी निर्यात दस्तावेज़ पेश किए.

आरोप है कि मेहता ने यूके की बुलियन बैंकों से, जिनमें स्टैंडर्ड चार्टर्ड भी शामिल है, खरीदार के क्रेडिट पर कच्चा सोना मंगवाया. यह सोना चेन्नई और कोच्चि के विशेष आर्थिक क्षेत्रों (SEZ) में स्थित उनकी फैक्ट्रियों के नाम पर मंगवाया गया, ताकि उससे सिक्के और पेंडेंट बनाए जा सकें और बाद में यूएई के ज्वेलर्स को निर्यात किया जा सके.

बुलियन बैंक ज्वेलरी कंपनियों को कच्चा सोना (बुलियन) देते हैं, ताकि वे उससे ज्वेलरी बना सकें और प्रोसेसिंग कर सकें. मेहता की कंपनियों ने यूके स्थित बुलियन बैंकों से एक समझौते के तहत कच्चा सोना लिया. इस समझौते का एक हिस्सा यह भी था कि भारतीय बैंकों के एक समूह — जिनमें पंजाब नेशनल बैंक, केनरा बैंक और सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया शामिल थे — द्वारा स्टैंडबाय लेटर ऑफ क्रेडिट (SBLC) दिया जाए. SBLC एक तरह की गारंटी होती है, जिसमें बैंक यह वादा करता है कि अगर उसका ग्राहक भुगतान नहीं करता, तो बैंक तीसरे पक्ष को भुगतान करेगा.

करीब 2013 में, मेहता की कंपनियों ने बुलियन बैंकों को भुगतान करना बंद कर दिया. उसने कहा कि उनके यूएई स्थित ग्राहकों को नुकसान हुआ है और सोने के निर्यात का पैसा फंसा हुआ है.

मेहता ने दावा किया कि उनके खरीदारों को डेरिवेटिव ट्रेडिंग में 1 अरब डॉलर का नुकसान हुआ, लेकिन जब बैंकरों ने दुबई जाकर जांच की, तो पता चला कि हैथम सुलेमान अबू ओबैदा नाम का एक व्यक्ति, पावर ऑफ अटॉर्नी के जरिए मेहता की 13 ग्राहक कंपनियों को नियंत्रित कर रहा था. ईडी के मुताबिक, मेहता की कंपनियों द्वारा भुगतान न करने के बाद भारतीय बैंकों द्वारा दी गई SBLC लागू करनी पड़ी, जिससे करीब 7,000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ.

एजेंसियों का यह भी आरोप है कि मेहता ने यूएई स्थित शेल कंपनियों के जरिए, जो उनके और उनके परिवार के सदस्यों के नाम पर थीं, पैसों की हेराफेरी की.

यह भी आरोप लगाया गया है कि कुछ मामलों में मेहता की कंपनियों ने वास्तव में कोई निर्यात नहीं किया था, बल्कि कागज़ों में फर्जी एंट्री बनाकर पैसों को इधर-उधर किया गया.

‘सही’ पता

जतिन मेहता के खिलाफ पहला मामला 2014 में सीबीआई ने पंजाब नेशनल बैंक की शिकायत पर दर्ज किया था. बैंक का आरोप था कि एक साजिश के कारण उसे 1,658 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ.

ईडी ने इस एफआईआर के आधार पर एक ईसीआईआर दर्ज की थी, लेकिन ईडी का दावा है कि मेहता अपने परिवार के साथ 2016 में देश छोड़कर चला गया, इससे पहले कि अभियोजन शुरू हो पाता. इसके बाद से वह न तो जांच में शामिल हुआ और न ही न्यायिक कार्यवाही में.

एजेंसियों का आरोप है कि मेहता और उसका परिवार पहले यूएई भाग गया और बाद में कैरेबियन के द्वीपीय देश सेंट किट्स एंड नेविस की नागरिकता ले ली. इस देश का भारत के साथ प्रत्यर्पण समझौता नहीं है. एजेंसियों और अदालत में मेहता की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, यह परिवार फिलहाल लंदन में रह रहा है.

भारत में उसकी गैरमौजूदगी के कारण जांच और ट्रायल में देरी हुई है. इसी बीच, इस साल मेहता ने मुंबई की अदालतों में करीब 13 अर्जियां दाखिल कीं, जिनमें उसने सीबीआई और ईडी दोनों को समन भेजने की तय प्रक्रिया का पालन करने के निर्देश देने की मांग की. ये सभी अर्जियां फिलहाल लंबित हैं.

अदालत में दी गई अपनी अर्जियों में मेहता ने कहा कि एजेंसियां लंबे समय से जानती थीं कि वह 2011 से अपने मुंबई वाले पते पर नहीं रह रहा है. उसके मुताबिक, उसने 2012 में सेंट किट्स एंड नेविस की नागरिकता ले ली थी और वह लंदन में रह रहा था, इसके बावजूद एजेंसियां उसके मुंबई वाले पते पर समन भेजती रहीं, जिसे आखिरी बार 2017 में उसकी मां ने इस्तेमाल किया था.

इसी वजह से मेहता ने अदालत से अनुरोध किया कि वह एजेंसियों को भारत और ब्रिटेन के बीच मौजूद म्यूचुअल लीगल असिस्टेंस ट्रीटी (MLAT) का पालन करने का निर्देश दे. इसके तहत, भारत की कोई भी एजेंसी विदेश में रह रहे आरोपी को समन गृह मंत्रालय के जरिए भेजती है.

इस साल अक्टूबर में, एक विशेष पीएमएलए अदालत ने FEO कानून के तहत चल रही कार्यवाही में वर्चुअल रूप से पेश होने की मेहता की अर्जी खारिज कर दी.

अदालत ने अक्टूबर में दिए अपने आदेश में कहा कि मेहता के वकील स्वदीप सिंह होरा अपने मुवक्किल के अदालत में खुद पेश न होने की कोई ठोस वजह नहीं बता सके. अदालत ने कहा कि सिर्फ सुविधा या विदेश में ही रहने की इच्छा के आधार पर अदालत में व्यक्तिगत रूप से पेश होने की जरूरत को टाला नहीं जा सकता.

जज ने आदेश में कहा, “अर्जी की सामग्री और अधिवक्ता होरा द्वारा रखे गए तर्कों से ऐसा कोई ठोस कारण या वास्तविक बाधा सामने नहीं आती, जो जतिन मेहता की अदालत में शारीरिक रूप से पेशी को रोकती हो. व्यक्तिगत मौजूदगी से छूट देने के लिए कोई मेडिकल, कानूनी या लॉजिस्टिक जरूरत नहीं बताई गई है.”

आदेश में आगे कहा गया, “सिर्फ सुविधा या विदेश में बने रहने की पसंद, अदालत में पेश होने की कानूनी ज़रूरत से बचने का आधार नहीं हो सकती.”

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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