पटना, 25 अप्रैल (भाषा) भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के अधिकारी जी. कृष्णैया की हत्या के मामले में उम्र कैद की सजा काट रहे बिहार के पूर्व सांसद आनंद मोहन, राज्य की विभिन्न जेलों में 14 वर्ष से अधिक समय से बंद 26 अन्य कैदियों के साथ रिहा किये जाने वाले हैं।
इस संबंध में सोमवार देर शाम एक अधिसूचना जारी की गई थी, जब आनंद मोहन अपने बेटे चेतन आनंद की सगाई के कार्यक्रम में थे, जो राज्य में सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के विधायक हैं।
आनंद मोहन अभी पैरोल पर जेल से बाहर हैं।
उन्होंने संवाददाताओं से बात करते हुए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का आभार जताया, जो पटना के बाहरी इलाके में आयोजित कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव के साथ शामिल हुए।
आनंद मोहन ने बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख मायावती के नाम का जिक्र किये बगैर ‘‘उन लोगों की आलोचना की, जो कृष्णैया की मौत को एक मुद्दा बना रहे हैं।’’
तेलंगाना में जन्मे आईएएस अधिकारी कृष्णैया दलित समुदाय से थे। वह बिहार में गोपालगंज के जिलाधिकारी थे और 1994 में जब मुजफ्फरपुर जिले से गुजर रहे थे तभी भीड़ ने पीट-पीट कर उनकी हत्या कर दी थी।
हत्या की घटना के वक्त आनंद मोहन मौके पर मौजूद थे, जहां वह दुर्दांत गैंगस्टर छोटन शुक्ला की शवयात्रा में शामिल हो रहे थे। शुक्ला की मुजफ्फरपुर शहर में गोली मार कर हत्या कर दी गई थी।
शुक्ला भूमिहार जाति से था, जबकि उससे सहानुभूति रखने वाले आनंद मोहन राजपूत जाति से आते हैं। वहीं कथित हत्यारे, ओबीसी (अन्य पिछड़ा वर्ग) नेता बृज बिहारी प्रसाद से सहानुभूति रखने वाले बताये जाते हैं जो राबड़ी देवी सरकार में मंत्री थे, लेकिन कुछ वर्षों बाद (जून 1998 में) पटना के एक अस्पताल में उपचार कराने के दौरान गोली मार कर उनकी हत्या कर दी गई थी।
देहरादून में अपने बेटे की शादी में शरीक होने को उत्सुक आनंद मोहन ने कहा, ‘‘इन वर्षों के दौरान, अन्य लोग महज मूकदर्शक बने रहे। मेरी पत्नी लवली और जी कृष्णैया के परिवार ने पीड़ा सहन की। मुझे हैरानी है कि जेल से मेरी रिहाई पर शोरगुल कर रहे लोगों ने क्या कभी दिवंगत आईएएस अधिकारी के परिवार के सदस्यों के आंसू पोंछने की सोची।’’
पूर्व सांसद की कथित तौर पर रिहाई का मार्ग प्रशस्त करने के लिए नियमों में बदलाव किये जाने को लेकर मायावती के बिफरने के बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के आईटी प्रकोष्ठ के प्रमुख अमित मालवीय की भी मिलती-जुलती प्रतिक्रिया देखने को मिली।
जनता दल(यूनाइटेड) अध्यक्ष राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा, ‘‘पहले अपनी ‘बी’ टीम (बसपा प्रमुख की ओर परोक्ष रूप से इशारा) को लगाने के बाद भाजपा आनंद मोहन की रिहाई के मुद्दे पर अब खुल कर सामने आ गई है।’’
ललन ने कहा, ‘‘आनंद मोहन ने जेल की अपनी सजा काट ली है और नीतीश कुमार सरकार ने एक भेदभावपूर्ण प्रावधान हटा दिया है, जिसने कुछ कैदियों की रिहाई रोकी थी। यह, किसी बेकसूर को नहीं फंसाने और किसी दोषी को नहीं बख्शने की हमारे नेता की नीति के अनुरूप है।’’
उल्लेखनीय है कि विधि विभाग की अधिसूचना, नियमों में एक हालिया संशोधन के बाद जारी की गई है, जिसमें सरकारी कर्मचारी/अधिकारी की हत्या या बलात्कार जैसे गंभीर अपराधों के लिए दोषी ठहराये गये लोगों को 14 साल कैद की सजा पूरी करने के बाद भी रिहा नहीं किया जा सकता था।
आनंद मोहन के अलावा, जिन अन्य लोगों की रिहाई का आदेश दिया गया है उनमें राजद के पूर्व विधायक राज वल्लभ यादव, जद(यू) के पूर्व विधायक अवधेश मंडल शामिल हैं। यादव को एक नाबालिग लड़की से बलात्कार के मामले में दोषी ठहराया गया है, जबकि मंडल कई आपराधिक मामलों में नामजद है। मंडल की पत्नी बीमा भारती एक पूर्व मंत्री हैं।
ललन ने केंद्रीय एजेंसियों के कथित दुरूपयोग का परोक्ष रूप से हवाला देते हुए कहा कि ‘‘भाजपा पिंजरे में बंद अपने तोते का इस्तेमाल विरोधियों के खिलाफ करेगी और जिन्हें अपना मानती है, उन्हें बचाएगी।’’
इस बीच, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी लेनिनवादी) लिबरेशन के विधायक महानंद सिंह ने उन लोगों को यह आम माफी देने की मांग की है जिनके खिलाफ 1990 के दशक में आतंकवादी एवं विध्वंसकारी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (टाडा) के तहत मामला दर्ज किया गया था, जब राज्य में नक्सली सिर उठा रहे थे।
सिंह की पार्टी महागठबंधन सरकार को बाहर से समर्थन दे रही है।
राज्य विधानसभा में अरवल का प्रतिनिधित्व कर रहे सिंह ने कहा, ‘‘अकेले अरवल में, छह लोग 20 वर्षों से अधिक समय से जेल में हैं। वे राजनीतिक कार्यकर्ता थे। एक व्यक्ति को पहले ही रिहा किया जा चुका है, जिसपर टाडा के तहत मामला दर्ज था। सरकार को जेल में कैद अन्य लोगों के लिए भी ऐसा ही करने का विचार करना चाहिए। इसके लिए नियमों में संशोधन की जरूरत नहीं पड़ेगी।’’
उन्होंने कहा, ‘‘मैंने इस संबंध में 20 अप्रैल को मुख्यमंत्री को एक ज्ञापन सौंपा था।’’
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