scorecardresearch
Sunday, 29 March, 2026
होमदेश2025 तक यमुना को स्नान लायक मानकों के अनुरूप साफ करना संभव: विशेषज्ञ

2025 तक यमुना को स्नान लायक मानकों के अनुरूप साफ करना संभव: विशेषज्ञ

Text Size:

नयी दिल्ली, 11 मई (भाषा) विशेषज्ञों ने कहा है कि देरी और चुनौतियों के बावजूद, दिल्ली में यमुना को 2025 तक स्नान लायक मानकों के अनुसार साफ करना और जलीय जीवन के प्रसार के लिए पानी की गुणवत्ता हासिल करना संभव है।

विशेषज्ञों ने कहा कि सभी घरेलू अपशिष्ट जल और उद्योगों से निकलने वाले पानी का शोधन करके और इसे ‘इन-सीटू’ तकनीकों का उपयोग करके और साफ करने से लक्ष्य हासिल करने में सहायता मिल सकती है।

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और जल मंत्री सत्येंद्र जैन ने कई अवसरों पर कहा है कि 2025 तक नदी को स्नान मानकों के अनुरूप साफ कर दिया जाएगा।

यदि जैविक ऑक्सीजन की मांग (बीओडी) 3 मिलीग्राम प्रति लीटर से कम है और घुली हुई ऑक्सीजन (डीओ) 5 मिलीग्राम प्रति लीटर से अधिक है तो यमुना को स्नान के लिए उपयुक्त माना जा सकता है।

घुली हुई ऑक्सीजन (डीओ) जीवित जलीय जीवों के लिए उपलब्ध ऑक्सीजन की मात्रा है। यदि पानी में डीओ का स्तर 5 मिलीग्राम प्रति लीटर से नीचे चला जाता है तो जलीय जीवन पर दबाव आ जाता है।

वजीराबाद और ओखला के बीच घरेलू अपशिष्ट जल और औद्योगिक अपशिष्टों को ले जाने वाले 22 नाले यमुना में गिरते हैं। हालांकि 22 किलोमीटर का यह हिस्सा नदी की लंबाई के दो प्रतिशत से भी कम है, लेकिन यह हिस्सा नदी के प्रदूषण के लगभग 80 प्रतिशत के लिए जिम्मेदार है।

सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) की स्थापना और उन्नयन, नालों में बहने वाले सीवेज को रोकना और प्रभावी सेप्टेज प्रबंधन निश्चित रूप से नदी के पानी की गुणवत्ता में सुधार लाएगा, नदी के लिए ताजा पानी की उपलब्धता हमेशा स्नान लायक मानकों तक पहुंचने के लिए महत्वपूर्ण है। तत्कालीन ‘यमुना मॉनिटरिंग’ ने 2020 में राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) को सौंपी रिपोर्ट में इसका जिक्र किया था।

जानेमाने वनस्पतिशास्त्री एवं पर्यावरण विशेषज्ञ सी आर बाबू ने कहा, ‘‘दिल्ली में नदी में पर्यावरणीय प्रवाह को बनाए रखने के लिए वजीराबाद बैराज से आगे पानी नहीं है। समाधान यह है कि हम सभी अपशिष्ट जल का शोधन नये मानकों (बीओडी और प्रति लीटर 10 मिलीग्राम से कम टीएसएस) के लिए करें और इसे इन-सीटू बायोरेमेडिएशन का उपयोग करके इसे और साफ करें हैं, जैसे 3 मिलीग्राम प्रति लीटर के बीओडी स्तर और 5 मिलीग्राम प्रति लीटर से अधिक घुली ऑक्सीजन प्राप्त करने के लिए आर्द्रभूमि व्यवस्था जैसी तकनीकों का इस्तेमाल।’’

‘इन-सीटू बायोरेमेडिएशन’ तकनीकों में जलीय पौधों या माइक्रोबियल उपचार विधियों का उपयोग करके मौके पर शोधन शामिल है।

उन्होंने कहा, ‘‘घुली हुई ऑक्सीजन पानी में सबसे बुनियादी मानक है। नदी में एक जैविक प्रणाली का होना महत्वपूर्ण है। यदि हम प्रति लीटर पांच मिलीग्राम का डीओ स्तर या उससे अधिक प्राप्त कर लें, तो यह जल प्रणाली में जैव विविधता में सुधार करेगा जो प्रदूषक को हटा देगा।’’ उन्होंने कहा कि यमुना का 2025 तक कायाकल्प किया जा सकता है।

प्रख्यात पर्यावरणविद् और यमुना जिये अभियान के संयोजक मनोज मिश्रा ने कहा कि निर्धारित समय के भीतर यमुना को स्नान मानकों के अनुसार साफ किये जाने की उम्मीद दिल्ली जल बोर्ड जैसी एजेंसियों के पूर्व के रिकॉर्ड को देखते कम प्रतीत होती है। उन्होंने कहा, ‘‘हालांकि यह किया जा सकता है यदि आप अपना मानदण्ड उच्च निर्धारित करते हैं और असंभव को प्राप्त करने के बारे में सोचते हैं।’’

भाषा अमित माधव

माधव

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

share & View comments