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Friday, 24 April, 2026
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रूस-यूक्रेन युद्ध में रूसी सेना की ओर से लड़ते हुए 10 भारतीयों की मौत: केंद्र ने न्यायालय को बताया

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नयी दिल्ली, 24 अप्रैल (भाषा) केंद्र सरकार ने शुक्रवार को उच्चतम न्यायालय को अवगत कराया कि रूस-यूक्रेन युद्ध में रूसी सेना की ओर से लड़ते हुए 10 भारतीयों की मौत हो चुकी है।

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम पंचोली की पीठ ने कहा कि स्थिति को ‘‘सावधानीपूर्वक एवं कुशलतापूर्वक’’ संभालने की आवश्यकता है, क्योंकि युद्ध क्षेत्र से शव वापस लाने में अत्यधिक कठिनाई हो सकती है।

केंद्र की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) ऐश्वर्या भाटी ने 10 भारतीयों की मौत की जानकारी पीठ को दी। भाटी ने यह जानकारी उस याचिका की सुनवाई के दौरान दी, जिसमें रूस में कथित तौर पर हिरासत में लिए गए और युद्ध लड़ने के लिए मजबूर किए गए 26 भारतीयों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करने का निर्देश सरकार को देने का अनुरोध किया गया है।

याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि उनके परिजनों को आकर्षक नौकरी का झांसा देकर रूस ले जाया गया, जहां उनके पासपोर्ट जब्त कर उन्हें युद्ध में शामिल होने के लिए मजबूर किया गया।

एएसजी ने इस बात की पुष्टि की कि याचिका में नामित 26 लोगों में से 10 की मौत हो चुकी है, एक व्यक्ति आपराधिक आरोपों में जेल में है और एक ने स्वेच्छा से रूस में रहने का निर्णय लिया है।

केंद्र ने कहा कि कुछ लोग धोखेबाज एजेंट द्वारा गुमराह किए गए थे, जबकि कई ने रूसी संस्थाओं के साथ “स्वैच्छिक अनुबंध” किए थे।

एएसजी ने यह भी कहा कि विदेश मंत्रालय को शवों की वापसी में साजो-सामान संबंधी बाधाओं और कुछ परिवारों के असहयोग का भी सामना करना पड़ा है।

उन्होंने कहा, ‘‘सरकार संकट में फंसे हर नागरिक की सहायता के लिए प्रतिबद्ध है।’’

भाटी ने कहा, ‘‘एक मामले में हमने शव वापस लाने की व्यवस्था की, लेकिन परिवार ने (मंत्रालय से) तीन महीने तक उसे रोककर रखने को कहा, क्योंकि वे (परिजन) कानूनी कार्रवाई कर रहे हैं। इसमें कई जटिल मानवीय पहलू जुड़े हैं।’’

याचिकाकर्ताओं के वकील ने सरकार के ‘स्वैच्छिक’ सेवा के दावे को खारिज करते हुए इसे मानव तस्करी का स्पष्ट मामला करार दिया।

उन्होंने कहा कि पीड़ितों को एजेंट ने धोखे से रूस भेजा और उनके यात्रा दस्तावेज जब्त कर उन्हें मोर्चे पर लड़ने के लिए मजबूर किया गया।

वकील ने कहा, ‘‘विदेश मंत्रालय सहयोग नहीं कर रहा है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘पीड़ित परिवारों ने पिछले कुछ महीनों में 120 से अधिक प्रतिवेदन भेजे हैं, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला है। शवों की पहचान के लिए डीएनए नमूने तक नहीं लिए गए हैं। यह केवल निष्क्रियता ही नहीं है, वे हमसे संपर्क में भी नहीं हैं।’’

वकील ने युद्ध क्षेत्र से एक पीड़ित द्वारा भेजा गया वीडियो साक्ष्य देखने का पीठ से अनुरोध किया, जिसमें उसने अपनी स्थिति का विवरण दिया है।

पीठ ने विदेश मंत्रालय को निर्देश दिया कि वह एक विस्तृत वस्तुस्थिति रिपोर्ट दाखिल करे, जिसमें नागरिकों की सुरक्षा और उनकी वापसी के लिए उठाए गए ठोस कदमों का विवरण हो।

इससे पहले, पीठ ने याचिका पर संज्ञान लेते हुए अदालत कक्ष में उपस्थित सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से इस मुद्दे पर निर्देश लेने को कहा था।

याचिकाकर्ताओं के वकील ने पीठ को बताया कि ये 26 लोग भारतीय नागरिक हैं, जो रूस में फंसे हुए हैं।

उन्होंने दावा किया कि इन लोगों को रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध में हिस्सा लेने के लिए मजबूर किया गया है।

याचिका में केंद्र सरकार को यह निर्देश देने का अनुरोध किया गया है कि वह रूस स्थित भारतीय दूतावास के माध्यम से तुरंत कूटनीतिक और वाणिज्य दूतावास संबंधी कदम उठाए, ताकि हिरासत में लिए गए भारतीयों की सुरक्षा और वापसी सुनिश्चित की जा सके।

भाषा सुरेश पारुल

पारुल

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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