नयी दिल्ली, 14 फरवरी (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय की ओर से आयोजित बैठक के ब्योरे का संज्ञान लिया और वीडियो संचार ऐप ‘जूम’ पर प्रतिबंध लगाने संबंधी याचिका की सुनवाई बंद कर दी।
याचिका में इस ऐप के सरकारी और व्यक्तिगत इस्तेमाल के लिए तब तक प्रतिबंधित करने की मांग की गयी थी जब तक उपयुक्त कानून बन नहीं जाता।
न्यायमूर्ति संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति एमएम सुंदरेश की पीठ ने कहा कि बाद के घटनाक्रमों के मद्देनजर दिल्ली निवासी हर्ष चुघ की ओर से 2020 में दायर जनहित याचिका में अब कोई दम नहीं बचा है।
पीठ ने अपने आदेश में कहा, “हमने वीसी प्लेटफॉर्म ज़ूम की सुरक्षा सुविधाओं के संबंध में 28 दिसंबर, 2020 को आयोजित राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय की बैठक के ब्योरे पर विचार किया है। हमारी राय में उक्त दस्तावेज के मद्देनजर वर्तमान रिट याचिका में कुछ भी नहीं बचा है। तदनुसार, कार्यवाही बंद की जाती है।’’
शीर्ष अदालत ने 22 मई, 2020 को उस जनहित याचिका पर केंद्र से जवाब मांगा था, जिसमें निजता संबंधी चिंताएं दर्ज कराई गई थीं और दावा किया गया था कि जूम ऐप का निरंतर उपयोग ‘उपयोगकर्ताओं को असुरक्षित और साइबर खतरों का शिकार बना रहा है’।
इस दलील ने अमेरिका स्थित जूम वीडियो कम्युनिकेशंस को भी पक्षकार बनाया था।
चुघ ने जनहित याचिका में, ज़ूम ऐप के इस्तेमाल से संभावित सुरक्षा और गोपनीयता जोखिमों का विस्तृत तकनीकी अध्ययन करने के लिए केंद्र को निर्देश देने की भी मांग की थी।
उन्होंने आरोप लगाया था कि इस ऐप के लगातार इस्तेमाल से राष्ट्रीय सुरक्षा दांव पर लग सकती है और भारत में साइबर खतरों और साइबर अपराधों को बढ़ावा मिल सकता है।
भाषा सुरेश माधव
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