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Saturday, 14 March, 2026
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मराठी साहित्य सम्मेलन में वंचितों से जुड़े लेखन पर जोर दिया गया

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लातूर, 23 अप्रैल (भाषा) महाराष्ट्र के लातूर में भारत रत्न लता मंगेशकर साहित्य नगरी में हो रहे 95वें अखिल भारतीय मराठी साहित्य सम्मेलन में शनिवार को ‘लेखक और लोकतांत्रिक मूल्य’ विषय पर एक संगोष्ठी हुई जिसमें प्रतिभागियों ने पर्यावरण, कृषि, बेरोजगारी और गरीबों की समस्याओं से जुड़े लेखन के महत्व पर जोर दिया।

प्रतिभागियों में राज्य के मुख्य चुनाव अधिकारी श्रीकांत देशपांडे, पर्यावरणविद् अतुल देउलगांवकर, लेखक दिलीप चव्हाण, लेखक-निर्देशक राजकुमार तंगडे, लेखक सोनाली नवांगुल, विद्वान हेमांगी जोशी और पत्रकार हलीमा खुरेशी शामिल रहे। दीपक पवार ने कार्यवाही का संचालन किया।

देशपांडे ने कहा कि उनके विभाग ने चुनावों में लोगों की भागीदारी को मजबूत करने के लिए ‘लोकतंत्र पर चर्चा’ की शुरुआत की है। आदिवासी मुद्दों से जुड़े विद्वान हेमांगी जोशी ने कहा कि लेखकों को स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे विषयों पर काम करना चाहिए क्योंकि ये आम आदमी की मूलभूत आवश्यकताएं हैं।

नवांगुल ने कहा कि लोकतंत्र को सशक्त करते समय दिव्यांगों से लेकर वंचितों तक सभी के अधिकारों को ध्यान में रखा जाना चाहिए। प्रसिद्ध नाटक ‘शिवाजी अंडरग्राउंड इन भीमनगर मोहल्ला’ के लेखक राजकुमार तंगडे ने कहा कि समानता के अधिकार की रक्षा तभी होगी, जब साहित्य लोगों को जोड़ने के लिए लिखा जाएगा, न कि अलग करने के लिए।

भाषा नेत्रपाल दिलीप

दिलीप

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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