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Monday, 30 March, 2026
होमदेशन्यायालय ने दिल्ली में सिविल न्यायाधीशों के लिए पात्रता मानदंड पर आदेश को संशोधित किया

न्यायालय ने दिल्ली में सिविल न्यायाधीशों के लिए पात्रता मानदंड पर आदेश को संशोधित किया

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नयी दिल्ली, 19 अप्रैल (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को सीमित विभागीय प्रतियोगी परीक्षा (एलडीसीई) के माध्यम से जिला न्यायाधीशों के रूप में पदोन्नति के लिए दिल्ली न्यायिक सेवा में सिविल न्यायाधीशों को लेकर पात्रता मानदंड के संबंध में अपने पहले के आदेश को संशोधित किया।

न्यायमूर्ति एल नागेश्वर राव, न्यायमूर्ति बीआर गवई और न्यायमूर्ति अनिरुद्ध बोस की पीठ ने कहा कि सिविल न्यायाधीश सात साल की अर्हक सेवा (सिविल जज के तौर पर पांच साल (जूनियर डिवीजन) और सिविल जज (सीनियर डिवीजन) के रूप में दो साल) या सिविल जज (जूनियर डिवीजन) के रूप में 10 वर्षों की अर्हक सेवा रहने पर एलडीसीई के माध्यम से योग्यता के आधार पर जिला न्यायाधीश के रूप में पदोन्नति के लिए पात्र होंगे।

पहले की नीति के अनुसार, एलडीसीई पदोन्नति के लिए योग्यता सिविल जज (सीनियर डिवीजन) के रूप में पांच साल की योग्यता सेवा और सिविल जज (जूनियर डिवीजन) के रूप में कुल 10 साल की योग्यता की आवश्यकता थी।

शीर्ष अदालत ने कहा कि एलडीसीई के माध्यम से पदोन्नति के मौके प्रदान करने का उद्देश्य अपेक्षाकृत कनिष्ठ अधिकारियों के बीच अधिकारियों को बेहतर बनाने तथा एक-दूसरे के साथ प्रतिस्पर्धा करने के लिए प्रोत्साहन प्रदान करना है ताकि उत्कृष्टता प्राप्त हो और त्वरित पदोन्नति हो सके।

शीर्ष अदालत ने कहा कि इस पर कोई विवाद नहीं है कि दिल्ली उच्च न्यायालय में सिविल जज (जूनियर डिवीजन) और सिविल जज (सीनियर डिवीजन) द्वारा किए जाने वाले कार्य की प्रकृति समान है।

भाषा आशीष दिलीप

दिलीप

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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